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कन्हैया लाल हत्याकांड पर बनी फिल्म के विरोध में उतरी जमीयत उलेमा ए हिन्द, कोर्ट में लगाई रोकने को याचिका: मुखिया मदनी ने किया ऐलान, नुपुर शर्मा का समर्थन करने पर रियाज और गौस ने रेता था गला

मदनी ने दावा किया है कि फिल्म में देवबंद को कट्टरता का केंद्र दिखाया गया है और उलेमा के खिलाफ भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने कहा कि यह फिल्म मुसलमानों को बदनाम करती है और समाज में नफरत फैलाने का काम करती है।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के मुखिया अरशद मदनी ने शनिवार (5 जुलाई 2025) को एक विवादास्पद बयान दिया है। मदनी ने कहा है कि उनकी संस्था ने ‘उदयपुर फाइल्स: कन्हैयालाल टेलर मर्डर’ फिल्म की रिलीज को रोकने के लिए देश के कई हाई कोर्ट में याचिकाएँ दायर की हैं।

यह फिल्म 28 जून 2022 को उदयपुर में हुई दर्जी कन्हैयालाल की हत्या पर आधारित है। यह हत्या इस्लामी आतंकियों मुहम्मद रियाज़ अत्तारी और मुहम्मद ग़ौस ने की थी। कन्हैयालाल ने बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के समर्थन में एक पोस्ट की थी, जिसके बाद उन्हें ‘ईशनिंदा’ का आरोपित बताया गया और सरेआम उनकी हत्या कर दी गई।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद पर पहले भी आतंकियों के पक्ष में खड़े होने के आरोप लग चुके हैं और अब इस संगठन ने अब इस फिल्म का विरोध किया है। संगठन ने दिल्ली, गुजरात और महाराष्ट्र के हाई कोर्ट में याचिकाएँ दायर कर फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की माँग की है।

मदनी ने अब आरोप लगाया है कि फिल्म में इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ कथित आपत्तिजनक बातें कही गई हैं। उन्होंने कहा, “फिल्म के ट्रेलर में नूपुर शर्मा का वह बयान दिखाया गया है, जिसने पूरे देश में बवाल मचा दिया था। इस बयान से भारत की कई देशों के साथ दोस्ताना रिश्तों पर असर पड़ा और अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की छवि भी खराब हुई। इसके चलते बीजेपी को उन्हें पार्टी से निकालना पड़ा।”

मदनी का कहना है कि अगर यह फिल्म रिलीज होती है, तो इससे देशभर में मुस्लिम समुदाय में आक्रोश फैल सकता है और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। उनके इस बयान को कई लोग धमकी के तौर पर देख रहे हैं।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स: कन्हैयालाल टेलर मर्डर’ के ट्रेलर को लेकर गंभीर आपत्तियाँ जताई हैं। उन्होंने कहा, “इस फिल्म के ट्रेलर में इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद और उनकी पवित्र बीवीयों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की गई हैं, जो देश की शांति और कानून-व्यवस्था को बिगाड़ सकती हैं।”

मदनी ने दावा किया है कि फिल्म में देवबंद को कट्टरता का केंद्र दिखाया गया है और उलेमा के खिलाफ भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने कहा कि यह फिल्म मुसलमानों को बदनाम करती है और समाज में नफरत फैलाने का काम करती है।

इसके साथ ही अरशद मदनी ने फिल्म में विवादित ज्ञानवापी मस्जिद से जुड़े दृश्यों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि “ऐसे दृश्य संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हैं।” मदनी ने माँग की है कि इस फिल्म की रिलीज पर रोक लगाई जाए ताकि देश में सौहार्द बना रहे।

‘उदयपुर फाइल्स: कन्हैयालाल टेलर मर्डर’ 11 जुलाई को होगी रिलीज

‘उदयपुर फाइल्स: कन्हैयालाल टेलर मर्डर’ फिल्म सिनेमाघरों में शुक्रवार (11 जुलाई) को रिलीज होने वाली है। यह फिल्म उदयपुर के दर्जी कन्हैयालाल की बेरहमी से हुई हत्या पर आधारित है।

फिल्म में अभिनेता विजय राज मुख्य भूमिका में नजर आएँगे। इसके अलावा रजनीश दुग्गल, प्रीति झंगियानी, कमलेश सावंत, काँची सिंह और मुश्ताक खान जैसे कलाकार भी फिल्म का हिस्सा हैं।

इस फिल्म का निर्देशन और लेखन भारत एस. श्रीनाथे ने किया है, जबकि फिल्म के निर्माता अमित जानी हैं। वहीं फिल्म का वितरण रिलायंस एंटरटेनमेंट द्वारा किया जा रहा है। फिल्म में 2022 में उदयपुर में कन्हैयालाल की हत्या के दौरान और उसके बाद देश में घटी घटनाओं को दिखाया गया है।

जमीयत उलमा-ए-हिंद और आतंकवादियों का बचाने का उसका इतिहास

जमीयत उलमा-ए-हिंद का आतंकियों को इसी तरह से बचाने और पनाह देने का इतिहास रहा है। इसी के तहत जमीयत उलमा-ए-हिंद (JUH) ने 2007 में अपने नेता अरशद मदनी के नेतृत्व में एक लीगल सेल (कानूनी प्रकोष्ठ) शुरू किया था, इसका मकसद आतंकवाद में गिरफ्तार हुए मुस्लिम लड़कों को कानूनी मदद देना।

उन्होंने जिनको बचाया, वह इसलिए छूटे क्योंकि उनके खिलाफ सबूत नहीं थे। जमीयत ने 7/11 का मुंबई ट्रेन विस्फोट, 2006 मालेगांव विस्फोट मामले में आरोपितों को सहायता दी है। इसी तरह जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने 26/11 मुंबई आतंकी हमला मामले, 2011 मुंबई ट्रिपल ब्लास्ट केस, मुलुंड ब्लास्ट केस, गेटवे ऑफ इंडिया ब्लास्ट केस के आरोपितों का भी बचाव किया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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