Saturday, May 15, 2021
Home रिपोर्ट मीडिया मौलवी जारी करे फतवा, राजदीप को लगता है ये इस्लाम के खिलाफ मीडिया की...

मौलवी जारी करे फतवा, राजदीप को लगता है ये इस्लाम के खिलाफ मीडिया की है साजिश!

"एक ऐरे-गैरे मौलाना के फालतू कथन के आधार पर बिग डिबेट नहीं चला देना चाहिए। अगर कोई ऐसा करता है तो वह Islamo-phobia फैला रहा है।"

राजदीप सरदेसाई ने ट्वीट किया है कि एक “unknown Maulana” के “stupid remark” के आधार पर ‘बिग डिबेट’ नहीं चला देना चाहिए। अगर कोई ऐसा करता है तो वह ‘Islamo-phobia’ फैला रहा है। सही बात है- या शायद सही बात लगती, अगर राजदीप सरदेसाई का रवैया सभी मज़हबों/आस्थाओं के खिलाफ हिंसा या द्वेष न भड़काने को लेकर इतना ही संजीदा होता। लेकिन हिन्दुओं को लेकर उनका नज़रिया इसके उलट ही रहा है।

याद कीजिए पिछले लोक सभा चुनाव को, जिसमें उर्मिला मातोंडकर ने ‘डर का माहौल है’ का हवाला देकर अपने चुनाव लड़ने को तर्कसंगत बताने की कोशिश की थी। उस समय जब यही राजदीप सरदेसाई उनका साक्षात्कार कर रहे थे तो मातोंडकर ने हिन्दू धर्म के बारे में कहा था, “… and the religion that has been known for its tolerance has turned out to be the most violent religion of them all”

समय का अभाव हो तो नीचे के वीडियो में 5:30 से 5:40 तक आप उर्मिला को सुन सकते हैं, जहाँ सीधा-सीधा हमला धर्म पर ही था- किसी विचारधारा पर नहीं, किसी राजनीतिक दर्शन या व्यक्ति या पर नहीं, सीधे धर्म पर। और राजदीप सरदेसाई को उस पर चाय/कॉफ़ी/पानी का घूँट भरते हुए मौन सहमति देते देखा जा सकता है। न कोई सवाल, न टोकना, न कोई स्पष्टीकरण। उनकी मूक सहमति ऐसे थी जैसे हिन्दुओं को “सबसे हिंसक मज़हब/आस्था वाली कौम” कहा जाना सूरज के पूर्व से निकलने जितनी ‘obvious’ बात है- इस पर बहस क्या करना?


यहाँ उनका मौन, मौन सहमति ही माना जाएगा- इसलिए कि जिस खुद को ‘लिबरल’ कहने वाले पत्रकारिता के समुदाय विशेष से वह आते हैं, वह, और राजदीप सरदेसाई भी, मोदी को इसी ‘चुप्पी’ के आधार पर गुजरात का दोषी मानते हैं। उनके हिसाब से पहले तो मोदी की चुप्पी उनका आँख मार के हिन्दू दंगाईयों को इशारा थी कि तमे जो मरजी आए, तीन दिन तक करी जाओ; हूँ पुलीसानी संभाल लईसा। जब ये ‘थ्योरी’ औंधे मुँह गिर गई, क्योंकि न केवल मोदी के पुलिस का हाथ पकड़ने का एक भी सबूत अदालत को नहीं मिला, और मारे जाने वालों में एक तिहाई हिन्दू निकले, तो राजदीप ने गियर बदल कर मोदी पर ‘नैतिक जिम्मेदारी’ ठेलनी शुरू कर दी- क्योंकि वे चुप रहे, समुदाय विशेष के पैर में नाक रगड़ कर माफ़ी नहीं माँगी। जिन्हें इस बात पर शक है, इन्टरनेट पर बहुतेरे इंटरव्यू मिल जाएँगे, जिनमें राजदीप बताते हैं कि मोदी न केवल दंगों के लिए ‘नैतिक रूप से जिम्मेदार’ हैं, बल्कि यह भी कि राजदीप ने खुद उन्हें “एक बार माफ़ी माँग के खुद को इस जिम्मेवारी से मुक्त कर लो” की सलाह दी थी।

अतः अगर राजदीप मोदी को उनकी चुप्पी से दंगों में सहभागी मानते हैं, तो उर्मिला मातोंडकर के हिन्दुओं को हिंसक बताने में भी उनकी सहभागिता चुप्पी के चलते मानी जाएगी।

और यह कोई पहली और आखिरी घटना होती तो एक बार अपवाद माना भी जा सकता था। राजदीप सरदेसाई लगातार हिन्दुओं के बारे में वही चीजें अन्यायपूर्ण तरीके से कहते रहते हैं, जो अगर समुदाय विशेष के बारे में न्यायोचित, तथ्यपरक तौर पर भी कही गई हो तो भी उन्हें तकलीफ़ होने लगती है। मसलन कुरआन के आधार पर भी इस्लाम की व्याख्या कर उसकी आलोचना करने वाले हिन्दुओं को राजदीप अक्सर बिन-मांगी सलाह देते फिरते हैं कि वे समुदाय विशेष पर कोई ‘लेबल’ लगाने का हक़ नहीं रखते। और यही राजदीप लल्लनटॉप के सम्पादक सौरभ द्विवेदी के साथ लगभग हर सप्ताह हिन्दुओं पर ऐसी ही ‘ठप्पागिरी’ करते, किसका “हिंदूइस्म” सही, किसका गलत, इसकी विवेचना करते देखे जा सकते हैं।

“My Hinduism” के नाम पर हिन्दुओं के खिलाफ़ नफ़रत और भ्रम फ़ैलाने और उनकी धार्मिक भावनाएँ आहत कर उन्हें उकसाने (Hindu baiting) वाले राजदीप एक तरफ़ हिन्दुओं पर ही निशाना साधने के लिए “diversity” का नाटक करते हैं, और दूसरी ओर उसी diversity वाले धर्म के साधुओं पर निशाना इस आधार पर साधते हैं कि उनका साधु होना ‘स्व-घोषित’ है, किसी पवित्र किताब या ‘अथॉरिटी’ से ठप्पा-प्राप्त नहीं।

इस्लामोफोबिया सच में है या नहीं, मैं यह तो नहीं जानता। नहीं जानता, क्योंकि इस शब्द का अर्थ है कि समुदाय विशेष के व्यवहार और कुरान की आयतों की आलोचना गलत है, जबकि दुनिया भर में हो रहे बम धमाकों से लेकर महज़ ढोल बजा कर नाच लेने, या चूड़ी-बिंदी लगा लेने, पर नुसरत जहाँ के खिलाफ़ समुदाय विशेष की नाराज़गी से ऐसा लगता तो नहीं है। लेकिन इतना तो पक्का है कि राजदीप जैसे हिन्दूफ़ोबिक इन्सान को तो इस पर बोलने का कोई नैतिक हक़ नहीं है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

पुणे में बनेगी कोरोना वैक्सीन, इसलिए 50% सिर्फ महाराष्ट्र को मिले: महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने कहा कि राज्य सरकार हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक के पुणे में लगने वाले वैक्सीन निर्माण संयंत्र से...

‘लगातार बम बरसाए, एकदम निर्ममता से… हमारा (हमास) एक भी लड़ाका नहीं था’: 10000+ फिलिस्तीनी घर छोड़ कर भागे

इजराइल और फिलिस्तीनी आंतकियों के बीच खूनी संघर्ष और तेज हो गया है। हमास को इजराइल की जवाबी कार्रवाई में कम से कम...

इजरायली रॉकेट से मरीं केरल की सौम्या… NDTV फिर खेला शब्दों से, Video में कुछ और, शीर्षक में जिहादियों का बचाव

केरल की सौम्या इजरायल में थीं, जब उनकी मौत हुई। वह अपने पति से बात कर रही थीं, तभी फिलिस्तीनी रॉकेट उनके पास आकर गिरा। लेकिन NDTV ने...

1971 में भारतीय नौसेना, 2021 में इजरायली सेना: ट्रिक वही-नतीजे भी वैसे, हमास ने ‘Metro’ में खुद भेज दिए शिकार

इजरायल ने एक ऐसी रणनीतिक युद्धकला का प्रदर्शन किया है, जिसने 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध की ताजा कर दी है।

20 साल से जर्जर था अंग्रेजों के जमाने का अस्पताल: RSS स्वयंसेवकों ने 200 बेड वाले COVID सेंटर में बदला

कभी एशिया के सबसे बड़े अस्पतालों में था BGML। लेकिन बीते दो दशक से बदहाली में था। आरएसएस की मदद से इसे नया जीवन दिया गया है।

₹995 में Sputnik V, पहली डोज रेड्डीज लैब वाले दीपक सपरा को: जानिए, भारत में कोरोना के कौन से 8 टीके

जानिए, भारत को किन 8 कोरोना वैक्सीन से उम्मीद है। वे अभी किस स्टेज में हैं और कहाँ बन रही हैं।

प्रचलित ख़बरें

हिरोइन है, फलस्तीन के समर्थन में नारे लगा रही थीं… इजरायली पुलिस ने टाँग में मारी गोली

इजरायल और फलस्तीन के बीच चल रहे संघर्ष में एक हिरोइन जख्मी हो गईं। उनका नाम है मैसा अब्द इलाहदी।

दिल्ली में ऑक्सीजन सिलेंडर के बदले पड़ोसी ने रखी सेक्स की डिमांड, केरल पुलिस से सेक्स के लिए ई-पास की डिमांड

दिल्ली में पड़ोसी ने ऑक्सीजन सिलेंडर के बदले एक लड़की से साथ सोने को कहा। केरल में सेक्स के लिए ई-पास की माँग की।

1971 में भारतीय नौसेना, 2021 में इजरायली सेना: ट्रिक वही-नतीजे भी वैसे, हमास ने ‘Metro’ में खुद भेज दिए शिकार

इजरायल ने एक ऐसी रणनीतिक युद्धकला का प्रदर्शन किया है, जिसने 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध की ताजा कर दी है।

गाजा पर गिराए 1000 बम, 160 विमानों ने 150 टारगेट पर दागे 450 मिसाइल: बोले नेतन्याहू- हमास को बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी

फलस्तीन के साथ हवाई संघर्ष के बीच इजरायल जमीनी लड़ाई की भी तैयारी कर रहा है। हथियारबंद टुकड़ियों के साथ 9000 रिजर्व सैनिकों की तैनाती।

जेल के अंदर मुख्तार अंसारी के 2 गुर्गों मेराज और मुकीम की हत्या, UP पुलिस ने एनकाउंटर में मारा गैंगस्टर अंशू को भी

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जेल में कैदियों के बीच गैंगवार की खबर। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फायरिंग में जेल के अंदर दो बदमाशों की...

‘क्या प्रजातंत्र में वोट की सजा मौत है’: असम में बंगाल के गवर्नर को देख फूट-फूट रोए पीड़ित, पाँव से लिपट महिलाओं ने सुनाई...

बंगाल के गवर्नर हिंसा पीड़ितों का हाल जानने में जुटे हैं। इसी क्रम में उन्होंने असम के राहत शिविरों का दौरा किया।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,349FansLike
94,118FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe