Monday, September 27, 2021
Homeराजनीतिएक खबर यह भी! दिहाड़ी मजदूर की पत्नी चंदना बाउरी ने बंगाल में खिलाया...

एक खबर यह भी! दिहाड़ी मजदूर की पत्नी चंदना बाउरी ने बंगाल में खिलाया कमल

चंदना बाउरी तीन बच्चों की माँ हैं। वह अपनी दो बेटियों और एक बेटे को अपनी माँ और सास के साथ घर में छोड़ चुनाव प्रचार करने निकलती थीं। कभी-कभी उनके पति भी उनके साथ जाते थे जो कि एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में दिहाड़ी मजदूर हैं।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में किस्मत आजमा रहे सबसे निर्धन उम्मीदवारों में से एक चंदना बाउरी थीं। बीजेपी ने उन्हें सल्तोरा से मैदान में उतारा था। तृणमूल कॉन्ग्रेस के शानदार प्रदर्शन के बीच वह जीत हासिल करने में कामयाब रहीं हैं। 30 साल की चंदना एक दिहाड़ी मजदूर की पत्नी और तीन बच्चों की माँ हैं।

बांकुरा जिले की सल्तोरा विधानसभा सीट पर चंदना बाउरी ने तृणमूल कॉन्ग्रेस के प्रत्याशी संतोष कुमार मण्डल को 4,145 मतों से हराया है। बीजेपी का टिकट मिलने के बाद इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि उन्हें इसका बिल्कुल अंदाजा नहीं था। बीजेपी की सूची में नाम आने के बाद स्थानीय नेतृत्व ने उन्हें उम्मीदवारी की सूचना दी थी।  

चुनावों से पहले भाजपा में शामिल हुए अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने सल्तोरा क्षेत्र से चंदना का प्रचार अभियान प्रारंभ किया था। इसके बाद चंदना बाउरी ने कहा था, “मिथुन चक्रवर्ती द्वारा मेरे विधानसभा क्षेत्र से चुनाव प्रचार शुरू किया जाना मेरे लिए गर्व की बात है।”

कौन हैं चंदना बाउरी :

चंदना बाउरी तीन बच्चों की माँ हैं। वह अपनी दो बेटियों और एक बेटे को अपनी माँ और सास के साथ घर में छोड़ चुनाव प्रचार करने निकलती थीं। कभी-कभी उनके पति भी उनके साथ जाते थे जो कि एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में दिहाड़ी मजदूर हैं।

चंदना, सल्तोरा में 2014 से भाजपा कार्यकर्ता के रूप में काम करती आ रही हैं। वह 2018 में पंचायत चुनावों के समय ग्राम पंचायत सदस्य बनीं। इसके बाद चंदना 2019 में भाजपा बांकुरा जिला समिति की सदस्य बनीं। चंदना के अनुसार भाजपा में कोई अमीर या गरीब नहीं है। भाजपा सबकी है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने मुझे बहुत सम्मान दिया है जिसके लिए मैं पार्टी की शुक्रगुजार हूँ।

इसके अलावा भाजपा ने पूर्वी बर्दवान के आशाग्राम से कलिता माझी को टिकट दिया था। कलिता एक बेहद साधारण महिला हैं जो घर-घर काम करके अपना जीवन-यापन करती हैं। चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें काम करने में दिक्कत आ रही थी इसलिए उन्होंने इसके लिए एक महीने की छुट्टी ली थी। खबर लिखे जाने तक कलिता तृणमूल कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार से पीछे चल रहीं थी।

 

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

देश से अवैध कब्जे हटाने के लिए नैतिक बल जुटाना सरकारों और उनके नेतृत्व के लिए चुनौती: CM योगी और हिमंता सरमा ने पेश...

तुष्टिकरण का परिणाम यह है कि देश के बहुत बड़े हिस्से पर अवैध कब्जा हो गया है और उसे हटाना केवल सरकारों के लिए कानून व्यवस्था की चुनौती नहीं बल्कि राष्ट्रीय सभ्यता के लिए भी चुनौती है।

‘टोटी चोर’ के बाद मार्केट में AC ‘चोर’, कन्हैया ‘क्रांति’ कुमार का कॉन्ग्रेसी अवतार

एक 'आंगनबाड़ी सेविका' का बेटा वातानुकूलित सुख ले! इससे अच्छे दिन क्या हो सकते हैं भला। लेकिन सुख लेने के चक्कर में कन्हैया कुमार ने AC ही उखाड़ लिया।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
124,789FollowersFollow
410,000SubscribersSubscribe