राम नवमी हिन्दुओं के लिए हिंसा व सांप्रदायिकता की जगह! Scroll ने फिर उगला जहर, लेख में केवल झूठ

स्क्रॉल का यह लेख उसी समय आ रहा है जब पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा पर घटिया सवाल घटिया तरीके से उठाने को लेकर पत्रकारिता के समुदाय विशेष का एक दूसरा सदस्य The Hindu पहले ही घिरा हुआ है। यह महज़ एक संयोग नहीं है। यह इनकी साज़िश है।

स्क्रॉल ने पिछले दिनों इतिहासकारों के 70 साल तक हिन्दुओं पर मुसलमानों के अत्याचार को छिपाने की साजिश को उजागर करने का जो ‘गुनाहे-अज़ीम’ किया था, कल उसकी कायदे से भरपाई कर दी। हिन्दुओं को एक ‘पॉइंट’ देने के बदले स्क्रॉल ने झूठ का लम्बा-चौड़ा जाल फैलाया है राम नवमी के खिलाफ- बताया गया है कि राम नवमी झारखण्ड में साम्प्रदायिकता का बहाना बनती जा रही है। (ज़ाहिर तौर पर इस साम्प्रदायिकता के लिए दोषी हिन्दू ही हैं, और इसे रोकने का तरीका यह है कि राम नवमी मनाना ही बंद कर दिया जाए।)

जिन घटनाओं का हवाला दिया, वह झूठ

लेख की शुरुआत में एक-एक हत्या की घटना का हवाला दिया जाता है ‘मॉब-लिंचिंग’ के तौर पर। जबकि यह मॉब-लिंचिंग या भीड़ द्वारा (जातिगत/मज़हबी) नफरत के चलते हुई हत्या की घटना नहीं थी। जिस आदमी मोहम्मद शालिक की हत्या का जिक्र इस लेख में है, उसका एक स्थानीय नाबालिग लड़की के साथ प्रेम-प्रसंग चल रहा था। शालिक 19 साल का था और लड़की महज़ 15 साल की। इसी प्रसंग में लड़की के ही परिजनों ने अपनी नाबालिग लड़की पर डोरे डाल रहे लड़के की पीट-पीट कर हत्या कर दी।

उनका कानून हाथ में लेना बिलकुल गलत था, इसमें शायद ही कोई दोराय हो सकती है; और नाबालिग किशोरों/किशोरियों के प्रेम-प्रसंग और यौन-संबंध पर आप जितनी चाहें उतनी दोराय बना सकते हैं- लेकिन इस घटना का हिन्दू धर्म, राम नवमी या शालिक के मुसलमान होने से कोई संबंध नहीं था। और यही बात पुलिस जाँच में भी निकल कर आईइसके बावजूद कि मामले का साम्प्रदायिक न होना घटना के 4 दिन के भीतर ही साफ हो चुका था, स्क्रॉल ने मामले को साम्प्रदायिक हिंसा बताकर झूठ बोला। यह अधिक-से-अधिक ऑनर-किलिंग का मामला हो सकता था, लेकिन वह ‘हेट-क्राइम’ नहीं है- दूर-दूर तक नहीं।

राम नवमी की भूमिका पर न ही कोई आँकड़े, न ही दावा करने वाले की पहचान

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

“अन्य पाँच ‘हेट-क्राइम’ के घटनास्थलों पर भी राम नवमी की सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका रही” यह दावा इस लेख में अनाम पुलिस अफसरों और स्थानीय देखने वालों के हवाले से किया गया है। अनाम पुलिस अफसरों, अनाम लोगों के हवाले से गोल-मोल दावा, और उसके आधार पर हिन्दुओं के त्यौहार को गुंडागर्दी ठहरा देना- यही स्क्रॉल की पत्रकारिता है

अपनी मनमर्जी से बनाया हुआ ‘हेट-क्राइम’ डाटाबेस

इस लेखक कुणाल पुरोहित और उनकी संस्था ‘फैक्ट-चेकर डॉट इन’ के अनुसार “झारखण्ड में 2009 से अब तक 16 ‘हेट-क्राइम’ हुए हैं, जोकि साम्प्रदायिक नीयत से किए गए, और इनमें 12 लोगों की जान गई है।” इसमें छेद-ही-छेद हैं।

पहली बात तो यह कि इस कथन का स्रोत क्या है? कौन से स्वतंत्र डाटाबेस का इस्तेमाल इस दावे के लिए किया गया है? अगर खुद के बनाए डाटाबेस के आधार पर फैक्टचेकर राम नवमी बंद करने के लिए पर्याप्त कारण ढूँढ़ कर ले आ रहा है और उम्मीद कर रहा है कि उसे ही अंतिम सत्य मान लिया जाए तो मैं भी कल सुबह तक अपने ‘आंतरिक सर्वे’ से यह निष्कर्ष निकाल सकता हूँ कि फैक्टचेकर को अपनी दुकान बंद कर लेनी चाहिए। करेंगे अपनी दुकान बंद?

दूसरी बात, फैक्टचेकर यह तो बताता है कि वह ‘क्राइम’ की परिभाषा सरकारी ही रखता है, और वही मामले देखता है जिनमें असल में अपराध यानि हिंसा हुआ हो, लेकिन यह बात गोल कर जाता है कि उसकी ‘हेट’ की परिभाषा क्या है? और उसमें भी ‘साम्प्रदायिकता पर आधारित नफरत‘ मापने या ढ़ूँढ़ने का पैमाना क्या है? क्या उन्होंने पुलिस रिपोर्ट का सहारा लिया, अदालत के निष्कर्ष का इंतजार किया, किसी मनोवैज्ञानिक या समाजशास्त्री का ऑन-रिकॉर्ड दावा है? या यह सब कुछ नहीं, खाली देखा कि हिन्दू-मुस्लिम ऐंगल है, वह भी सुविधाजनक (हिन्दू अपराधी, मुस्लिम भुक्तभोगी) तो उसे अपने डाटाबेस में चिपका लिया?

यहाँ बहस के लिए कोई बहस कर सकता है कि फैक्टचेकर की खुद की हेट-क्राइम की परिभाषा क्यों नहीं विश्वसनीय है। तो इसका जवाब होगा कि यह ऊपर मोहम्मद शालिक के मामले में साफ हो चुका है कि जब उन्होंने आशनाई में हुई हत्या को ‘साम्प्रदायिकता पर आधारित नफरत’ का नाम दे दिया तो ज़ाहिर तौर पर या तो उनकी परिभाषा में खोट है, या उनकी नीयत में।

अगर उनके डाटाबेस पर भरोसा कर भी लें तो इसकी क्या गारंटी है कि उनके डाटाबेस में कुछ, या फिर शायद अधिकाँश, ‘हेट-क्राइम’ के भुक्तभोगी चंदन गुप्ता, अंकित सक्सेना जैसे हिन्दू ही न हों? अगर ऐसा निकला तो भी गलती हिन्दुओं की ही होगी कि वो ऐसी राम नवमी मनाते ही क्यों हैं जिससे नाराज़ होकर ‘समुदाय विशेष’ को उनके खिलाफ ‘हेट-क्राइम’ करने पर मजबूर होना पड़ता है?

अपने ही ‘हेट-क्राइम’ डाटाबेस की ‘जाँच’ छापने के बाद?

लेख में यह भी कहा गया है कि फैक्टचेकर ‘हेट-क्राइम वॉच’ के डाटाबेस की ‘जाँच’ करने निकली थी। हालाँकि साथ में ‘फॉलो-अप’, ‘लॉन्ग-टर्म इम्पैक्ट’ जैसे भारी-भरकम शब्द भी देकर बात को घुमाने की कोशिश की गई, लेकिन तथ्य यह है कि फैक्ट-चेकर को अपने ‘हेट-क्राइम वॉच’ के डाटाबेस में कुछ ऐसी घटनाओं के होने का अंदेशा था, जो शायद तहकीकात में ‘हेट-क्राइम’ न निकलतीं। तो क्या फैक्ट-चेकर को उन सन्देहास्पद घटनाओं को छापने से, उनसे वेबसाइट ट्रैफिक, फंडिंग आदि कमाने के पहले, उनके जरिए भारत को बदनाम करने के पहले ही जाँच नहीं कर लेनी चाहिए थी?

‘हेट-क्राइम वॉच’ का डाटाबेस खोटा

‘हेट-क्राइम वॉच’ के डाटाबेस की विश्वसनीयता ही शून्य है। इस डाटाबेस में ‘हेट-क्राइम’ के तौर पर सूचीबद्ध लगभग एक-तिहाई (30%) घटनाओं में उन्हें हमलावरों का मज़हब/पंथ ही नहीं पता।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब मारने वाले का मज़हब नहीं पता तो यह कैसे पता लगा लिया गया कि हत्या नफरत के चलते ही हुई है, छिनैती में नहीं? और ऐसे किसी भी अपराध को बिना जाँचे-परखे, बिना पूरी जानकारी इकठ्ठा हुए हेट-क्राइम बता देने वाला या तो बहुत ही मूर्ख होगा, या बहुत ही धूर्त! कुणाल जी और फैक्ट-चेकर बता दें कि हम अपने डाटाबेस में उनकी एंट्री किस खाने में करें।

नाबालिग का आशिक पुलिस से बचने के लिए कुएँ में कूदा, दोष श्री राम का?

अगला उदाहरण इस लेख में झारखण्ड में एक लड़की और उसके माँ-बाप की मॉब-लिंचिंग कर हत्या का है, जिसका दोष राम नवमी के सर ठेला जा रहा है। मामला यूँ है कि हिन्दू परिवार की 17 साल की नाबालिग लड़की का चक्कर ईसाई लड़के नंदलाल करकेट्टा (23 वर्ष) से चल रहा था। उसे पुलिस ने लड़की के अपहरण की शिकायत मिलने पर बुलाया तो उसने पुलिस से बचने के लिए कुएँ में छलाँग लगा दी और मर गया। उसकी मौत का दोषी लड़की के परिवार वालों को मानते हुए करकेट्टा के परिजनों ने लड़की के माँ-बाप लखपती देवी और तहलू राम की और उसकी बड़ी बहन रूनी कुमारी की पीट-पीट कर हत्या कर दी। नाबालिग लड़की और उसकी एक और बहन को भी गंभीर रूप से घायल कर दिया

इस घटना में मॉब-लिंचिंग करने वाले ईसाई हैं, जबकि मॉब-लिंचिंग के के शिकार हिन्दू, और इस घटना को राम नवमी से स्क्रॉल और फैक्ट-चेकर बिना किसी कारण के जोड़ देते हैं।

हिन्दू लड़की का शौहर के बाप, चाचा गैंगरेप कर कत्ल कर दें, लेकिन यह ‘हेट-क्राइम’ नहीं होता

अगली घटना जिसका स्क्रॉल ज़िक्र करता है, वह एक हिन्दू लड़की के उसके मुस्लिम आशिक के बाप और उसके चाचा द्वारा गैंगरेप कर हत्या कर देने की है। लड़की को केवल इसलिए मार दिया गया क्योंकि उसने इस्लाम कबूल करने से मना कर दिया था। ज़ी न्यूज़ पुलिस द्वारा जारी आशिक आदिल बयान के आधार पर यह जानकारी देता है, लेकिन पुलिस से ज्यादा बड़ी जाँच एजेंसी फैक्ट-चेकर इस्लाम न कबूल करने के बदले हुए गैंगरेप-हत्या में मज़हबी ऐंगल देखने से मना कर देती है।

इसके बाद सीधा बाकी घटनाओं की कोई जानकारी दिए स्क्रॉल राम नवमी को झारखण्ड में बढ़ते साम्प्रदायिक तनाव के लिए जिम्मेदार ठहरा देता है।

हर चीज का घुमा-फिरकर राम-नवमी कनेक्शन

इसके बाद स्क्रॉल कहीं से कुछ भी उठाकर येन-केन-प्रकारेण राम नवमी को एक मुसीबत का दर्जा देने की कवायद शुरू कर देता है। और इसके लिए वह बेहूदा तर्कों का इस्तेमाल करता है; मसलन ‘कभी-कभी राम नवमी वाले अपना रास्ता बदलकर मुसलमानों के इलाके से जुलुस निकालने लगते हैं’ (लेकिन यह नहीं बताता कि कुल कितनी घटनाएँ, या सारे जुलूसों में से कितने प्रतिशत जुलुस ऐसा करते हैं), ‘जुलूस में शामिल एक अनाम हिंन्दू राष्ट्रवादी के फ़ोन में भड़काऊ, राम मंदिर के गाने वाली रिंगटोन लगी है’, ‘रामलीला आयोजकों में से दो (इतने सालों की रामलीला में दो, महज़ दो) रामलीला आयोजक किसी मॉब-लिंचिंग वाली भीड़ का हिस्सा थे’, और ऐसी ही बकवास।

मदरसे के नाम पर ऐंठी जमीन पर बनी मस्जिद, हिन्दुओं पर चले पत्थर, फिर भी बंद करो राम नवमी

इसके बाद हिन्दुओं और मुस्लिमों के बीच असल में हुए टकराव का ज़िक्र लेख के सबसे अंत में होता है- महज़ दो बार। एक बार 2017 में, जब हिन्दुओं की भीड़ पर मुसलमानों ने पहले थूका, और उसके बाद गुस्साए हिन्दुओं की भीड़ ने मस्जिद में घुस कर हिंसा की। हिन्दू पहले से ही भरे हुए बैठे थे क्योंकि यह जमीन उन्हीं की थी, जो उनसे मदरसा बनाने यानि शिक्षा के नाम पर ऐंठ ली गई, और बाद में उस पर मस्जिद बना दी गई।

दूसरी घटना इसी साल की है, लेकिन इसमें मुसलमानों ने ही हिन्दुओं पर पथराव किया था। लेकिन इस सच को दबा कर, “दोनों समुदायों का टकराव” कहकर हिन्दूफ़ोबिया में सने हुए कुणाल पुरोहित, फैक्ट-चेकर और स्क्रॉल इसे भी राम नवमी को बदनाम करने के एक बहाने के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं।

हिन्दू त्यौहारों को बंद कर देने की तैयार हो रही है ज़मीन

स्क्रॉल का यह लेख उसी समय आ रहा है जब पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा पर घटिया सवाल घटिया तरीके से उठाने को लेकर पत्रकारिता के समुदाय विशेष का एक दूसरा सदस्य The Hindu पहले ही घिरा हुआ है। यह महज़ एक संयोग नहीं है। यह इनकी साज़िश है। फार्मूला है हिन्दू त्यौहारों को बंद करने, हिन्दू धर्म को खात्मे की तरफ ढकेलने का- पहले “धर्म के नाम पर फलाना-ढिकाना हो रहा है” की चिंता जताने के बहाने धर्म और त्यौहारों के खिलाफ माहौल तैयार करों, सालों तक त्यौहारों के खिलाफ एक संस्कृति तैयार करो और फिर न्यायिक याचिका डाल कर त्यौहार को खत्म कर दो। उसी के लिए ज़मीन तैयार की जा रही है।

शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by paying for content

यू-ट्यूब से

बड़ी ख़बर

स्थापना के 49 वर्ष बीत जाने के बवजूद SKMCH में Pediatrics (बाल्चिकित्सा) का पोस्ट ग्रेजुएट कोर्ट क्यों नहीं है? अपनी नाकामी छिपाने के लिए राबड़ी देवी को बिहार का नेहरू बनाने वाले सुशील मोदी को समझना चाहिए कि सीटों की संख्या के साथ ज़िम्मेदारियों का बोझ भी बढ़ता है।

ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

हस्तमैथुन

‘दाढ़ी वाला ऑटो ड्राइवर मुझे देखकर हस्तमैथुन कर रहा था’: MBA कर रही 19 साल की लड़की की आपबीती

"मैं हीरानंदानी में जॉगिंग कर रही थी। फिर पास के एक बैंक एटीएम की सीढ़ियों पर बैठ गई। अपना फोन देखने में बिजी हो गई। जैसे ही मेरी नजर फोन से हटकर ऊपर को हुई तो सामने एक ऑटो में एक आदमी बैठा मुझे घूर रहा था। फिर जल्द ही यह भी समझ आ गया कि वह सिर्फ मुझे घूर ही नहीं रहा था बल्कि वो हस्तमैथुन भी कर रहा था।"
रेप आरोपित को गोली मारी

6 साल की बच्ची का बलात्कार और हत्या: आरोपित नाज़िल को IPS अजय पाल ने मारी गोली, हो रही तारीफ

आरोपित नाज़िल ने बच्ची की पहचान भी छिपाने की पूरी कोशिश की थी। उसने बच्ची को मार कर उसके चेहरे पर तेज़ाब डाल दिया था, ताकि उसका चेहरा बुरी तरह झुलस जाए और कोई भी उसे पहचान नहीं पाए।
रेप

तौसीफ़ इमरान ने नाबालिग छात्रा को बनाया हवस का शिकार, Tik Tok पर बनाता था बलात्कार का वीडियो

"मेरी बेटी का धर्म-परिवर्तन कराने के मक़सद से उसे विभिन्न धार्मिक स्थलों पर ले जाता था। शादी का वादा करने पर मेरी नाबालिग बेटी ने रमज़ान पर रोज़ा रखना भी शुरू कर दिया था।"
ज्योति मल्होत्रा-मोहम्मद नबी

अफगानिस्तान पर भारत की जीत को पचा नहीं पाईं The Print की पत्रकार, सोशल मीडिया पर उगला जहर

अफगानिस्तान पर भारत की रोमांचक जीत से जहाँ पूरा हिंदुस्तान बेहद खुश था तो वहीं, 'द प्रिंट' की पत्रकार काफी क्षुब्ध और व्यथित लगीं। परेशानी जब हद से ज्यादा बढ़ गई तो उन्होंने अपनी निराशा और भड़ास को जहर के रूप में ट्विटर पर उगला। विराट कोहली पर निशाना साधा।
भारतीय नौसेना, बालाकोट स्ट्राइक

बालाकोट के बाद वो लड़ाई जो भारतीय नौसेना ने लड़ी: कहानी गायब पाकिस्तानी सबमरीन की

कराची में जिस आखिरी लोकेशन से पीएनएस साद गायब हुआ था, वहाँ से उसे गुजरात के तटीय स्थल तक पहुँचने में 3 दिन लगते और अगर वो मुंबई स्थित वेस्टर्न फ्लीट के मुख्यालय तक पहुँचने की चेष्टा करता तो उसे 5 दिन लगते। अगर सच में ऐसा होता तो यह देश की सुरक्षा के लिए ख़तरा हो सकता था।
तेजश्वी यादव

’44 AC, 108 पंखे, 464 फैंसी लाइट्स, 35 क़ीमती सोफे: तेजस्वी ने सरकारी फंड से बंगले पर ख़र्च किए करोड़ों’

"किस नियम के तहत तेजस्वी ने अपने घर में 44 AC (जिनमें से कुछ बाथरूम में भी थे), 35 क़ीमती लेदर सोफे, 464 फैंसी LED लाइट्स, 108 पंखे, क़ीमती बिलियर्ड्स टेबल, दीवालों पर महँगी लकड़ियों के पैनल और इम्पोर्टेड ग्रेनाइट फ्लोरिंग- यह सब लगवाए?"
मंसूर खान, वीडियो

‘शायद मार दिया जाऊँ… फिर भी भारत लौट कर नेताओं के नाम का खुलासा करना चाहता हूँ’

"जो नेता मेरे करीबी थे, वही नेता अब मेरे लिए और मेरे परिवार के लिए खतरा बने हुए हैं। मैं भारत वापस आना चाहता हूँ, सारी जानकारी देना चाहता हूँ। भारत आकर मैं निवेशकों का पैसा लौटाना चाहता हूँ।"
पशु क्रूरता

तेलंगाना में नगरपालिका की क्रूरता: 100 कुत्तों को ज़हर देकर मार डाला, ज़मीन में दफनाया

"मैं इस बात को देख कर हैरान थी कि मेरे सारे कुत्ते गायब हैं। उनमें से कोई भी आक्रामक नहीं था और किसी ने भी कभी कोई हिंसक परिस्थिति नहीं पैदा की। अगर लोगों ने शिकायत की ही थी तो नगरपालिका वालों को 'एनिमल बर्थ कण्ट्रोल' अपनाना चाहिए था।"
अरविन्द केजरीवाल

क्या कपिल मिश्रा के खुलासे के बाद केजरीवाल ने की ‘पैरेंट्स को कसम खिलाने वाली’ मीटिंग रद्द?

यदि AAP के बागी विधायक कपिल मिश्रा की मानें तो अरविन्द केजरीवाल स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों को मीटिंग के बहाने बुलाकर आगामी विधानसभा चुनाव में AAP को ही वोट दिलवाने की कसम खिलाने वाले थे। लेकिन अब केजरीवाल ने यह प्लान रद्द कर दिया है।
दीपिका पादुकोण

एयरपोर्ट पर गार्ड ने माँगा ID प्रूफ तो ‘माई चॉइस’ पादुकोण ने फेंका सेलिब्रिटी कार्ड!

इस वीडियो में देखा जा सकता है कि दीपिका अपने पिता के साथ एयरपोर्ट के अंदर जा रही हैं। लेकिन जब दीपिका एयरपोर्ट के अंदर एंट्री कर रही थीं, तभी एक सिक्योरिटी गार्ड ने उन्हें रोक लिया और उन्हें आवाज लगाते हुए पूछा- 'आईडी-आईडी'।

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

51,921फैंसलाइक करें
8,978फॉलोवर्सफॉलो करें
70,203सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

शेयर करें, मदद करें: