Sunday, August 1, 2021
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द वायर ने एडिटेड वीडियो से कृषि बिल विरोधी प्रदर्शनकारियों पर बीजेपी कार्यकर्ताओं के हमले के बारे में फैलाई फर्जी खबरें, यहाँ जाने सच

ऑपइंडिया ने पटना बिहार में पप्पू यादव द्वारा आयोजित किसान बिल के विरोध प्रदर्शन का ओरिजिनल वीडियो हासिल किया, जहाँ पर कथित तौर पर यह घटना हुई थी। इसमें देखा जा सकता है कि विपक्षी पार्टी के नेताओं-कार्यकर्ताओं का समूह पटना के वीरचंद पटेल मार्ग स्थित भाजपा कार्यालय के भीतर घुसने की कोशिश कर रहा था।

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में दावा किया गया है कि बिहार की राजधानी पटना में भाजपा कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी (JAP) के कुछ सदस्यों के साथ मारपीट की।

यह हमला कथित रूप से उस समय हुआ जब मोदी सरकार द्वारा पारित कृषि बिलों के विरोध में JAP नेता पप्पू यादव पटना में एक ट्रैक्टर रैली निकाल रहे थे।

बिहार के पटना में किसान बिल विरोधी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा तथाकथित हमलों का यह वीडियो ‘National Dastak’ नामक न्यूज पोर्टल ने ट्वीट किया था। घटना के वीडियो को पोस्ट करते हुए, समाचार संगठन ने दावा किया था कि मोदी समर्थकों ने कृषि बिलों का विरोध करने के लिए कुछ लोगों पर लाठियों से हमला किया था।

1:30 मिनट के इस वीडियो को काफी चतुराई से एडिट किया गया। इसमें देखा जा सकता है कि लोगों के एक समूह को पार्टी के कार्यकर्ताओं को लाठी से पिटाई करने के लिए JAP पोस्टर वाले वाहन पर चढ़ रहे थे। कथित तौर पर ये लोग भाजपा कार्यकर्ता थे।

जैसे ही कथित घटना का वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ, ‘लिबरल-सेक्युलर’ समुदाय के सदस्य पूरी घटना के बारे में गलत जानकारी फैलाने में जुट गए कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने किसान बिल का विरोध करने के लिए विपक्षी दलों के सदस्यों पर हमला किया। 

वामपंथी वेबसाइट ‘द वायर’ के संस्थापक संपादक -सिद्धार्थ वरदराजन भी इस होड़ में शामिल हो गए, जिनका फेक न्यूज़ फ़ैलाने का पुराना इतिहास रहा है। वरदराजन ने ‘नेशनल दस्तक’ द्वारा शेयर किए गए वीडियो को पोस्ट किया और दावा किया कि विपक्षी कार्यकर्ताओं के खिलाफ भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया हमला ‘काम पर फासीवाद’ के अलावा कुछ नहीं था।

Image Source: Siddharth Varadarajan

एक अन्य स्व-घोषित ‘पत्रकार ’और इस्लामवादी –आरफ़ा खानम शेरवानी, ‘द वायर’ के अपने संपादक के नक्शेकदम पर चलते हुए, उसी भ्रामक वीडियो को यह दावा करने के लिए पोस्ट कर दिया कि किसान बिल समर्थक कृषि बिल विरोधियों पर हमला कर रहे हैं।

हिंदू और भाजपा विरोधी के रूप में पहचानी जाने वाली आरफा खानम शेरवानी ने एंटी-सीएए और कृषि विरोधी बिल विरोधों के बीच एक समानता बताते हुए संकेत दिया कि कृषि बिल समर्थकों ने कृषि बिल विरोधियों पर उसी तरह से हमला किया, जैसा उन्होंने सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों के साथ किया। शेरवानी ने पूछा कि क्या लोगों को ‘गरीब-विरोधी और जन-विरोधी कानूनों के पारित होने’ के खिलाफ विरोध करने की अनुमति नहीं है।

Image Source: Arfa Khanum Sherwani

फर्जी-न्यूज़ पेडलर और अदालत के अवमानना मामले में दोषी प्रशांत भूषण ने भी भाजपा-विरोधी एजेंडा फैलाने के लिए एक बार फिर से बेशर्मी के साथ सोशल मीडिया पर आए और दावा किया कि विरोध कर रहे तथाकथित ‘किसानों’ को कुछ लोगों ने पीटा, जिन्हें उन्होंने स्थानीय पुलिस की मौजूदगी में ‘मोदी भक्तों’ और ‘गुंडों’ की संज्ञा दी।

Image Source: Prashant Bhushan

हालाँकि, बीजेपी सरकार पर हमला करने और बिहार विधानसभा चुनावों से पहले अपने भाजपा-विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाने की जल्दी में, वरदराजन और भूषण जैसे वामपंथी ‘कार्यकर्ताओं’ ने सावधानीपूर्वक एडिटेड वीडियो का सहारा लिया, जिसमें बीजेपी कार्यकर्ताओं को हमलावर के रूप में दिखाया गया था और विपक्षी पार्टी के कार्यकर्ता को पीड़ित के रूप में।

फैक्ट-चेक

ऑपइंडिया ने पटना बिहार में पप्पू यादव द्वारा आयोजित किसान बिल के विरोध प्रदर्शन का ओरिजिनल वीडियो हासिल किया, जहाँ पर कथित तौर पर यह घटना हुई थी। इसमें देखा जा सकता है कि विपक्षी पार्टी के नेताओं-कार्यकर्ताओं का समूह पटना के वीरचंद पटेल मार्ग स्थित भाजपा कार्यालय के भीतर घुसने की कोशिश कर रहा था।

गुस्साए कृषि बिल विरोधियों को भाजपा कार्यालय के गेट पर नारे लगाते हुए देखा जा सकता है। जबकि बिहार पुलिस JAP के सदस्यों को वहाँ से हटा रही है, जिन्होंने कथित रूप से पटना में भाजपा कार्यालय पर हमला किया था।

पार्टी कार्यालय पर हमला के बाद कृषि बिल विरोधियों से खुद को बचाव करने के लिए बीजेपी कार्यकर्ता सड़क पर निकल आए। बचाव के क्रम में ही वो JAP की गाड़ी पर चढ़ गए, इस दौरान JAP के सदस्यों के साथ भिड़ंत हो गई।

यह भी देखा जा सकता है कि विपक्षी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पटना की सड़कों पर ट्रैफिक जाम कर दिया था। कुछ भाजपा कार्यकर्ता, जो पार्टी कार्यालय के खिलाफ JAP हमले का बचाव कर रहे थे, उन्हें भी ‘नरेंद्र मोदी जिंदाबाद’, ‘भाजपा जिंदाबाद’ कहते सुना गया।

इस घटना के दोनों पक्षों की रिपोर्ट करने के बजाय, सिद्धार्थ वरदराजन और आरफा शेरवानी जैसे तथाकथित ‘निष्पक्ष’ पत्रकारों ने जानबूझकर भाजपा कार्यकर्ताओं पर प्रारंभिक हमले को नजरअंदाज कर दिया और इस घटना के बारे में आधे सच को आगे फैलाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने कृषि बिल विरोधी प्रदर्शनकारियों पर हमला किया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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