Wednesday, May 22, 2024
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तेज रफ्तार ट्रैक्टर से मरा ‘किसान’, राजदीप ने कहा- पुलिस की गोली से हुई मौत, फिर ट्वीट किया डिलीट

सोशल मीडिया पर लोग 'ट्विटर' से सवाल कर रहे हैं कि क्या फेक न्यूज़ फ़ैलाने और राजधानी में दंगे भड़काने का प्रयास कर रहे राजदीप सरदेसाई का अकाउंट प्रतिबंधित किया जाएगा या नहीं?

गणतंत्र दिवस की सुबह से ही किसानों का प्रदर्शन उग्र होता जा रहा है। इस बीच, दिल्ली के DDU मार्ग पर एक व्यक्ति की ट्रैक्टर पलटने के कारण मौत हो गई। आईटीओ के पास पूरे चौक पर सैकड़ों की संख्या में किसान ट्रैक्टर लेकर खड़े रहे। जिसे लेकर समाचार चैनल ‘इंडिया टुडे’ के पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने एक और फेक न्यूज़ फैला दी और पोल खुलने पर अपना ट्वीट चुपके से डिलीट भी कर दिया।

दरअसल, राजदीप सरदेसाई ने तिरंगे में लिपटी मृतक की लाश की तस्वीर अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर करते हुए लिखा कि इसकी मौत पुलिस की गोली से हुई है। राजदीप ने ट्विटर पर लिखा, “पुलिस फायरिंग में आईटीओ पर 45 साल के नवनीत की मौत हो गई है। किसानों ने मुझे बताया कि उसका ‘बलिदान’ व्यर्थ नहीं जाएगा।”

लेकिन हकीकत ये है कि आज ट्रैक्टर रैली और उपद्रव के दौरान जिस व्यक्ति की मौत हुई, वह पुलिस फायरिंग में नहीं, बल्कि ट्रैक्टर पलटने से मारा गया। दरअसल, ड्राइवर ने काफी तेज रफ्तार से चल रहे ट्रैक्टर को अचानक से मोड़ दिया, जिसकी वजह से संतुलन बिगड़ गया और ट्रैक्टर पलट गया। इस दौरान किसान की मौत हो गई। सोशल मीडिया पर लोग ‘ट्विटर’ से सवाल कर रहे हैं कि क्या फेक न्यूज़ फ़ैलाने और राजधानी में दंगे भड़काने का प्रयास कर रहे राजदीप सरदेसाई का अकाउंट प्रतिबंधित किया जाएगा या नहीं?

सत्ता विरोधी षड्यंत्रों पर गिद्ध की तरह नजर रखने वाले राजदीप सरदेसाई ने आदतन इसे अपने प्रोपेगेंडा के लिए इस्तेमाल किया और इस व्यक्ति की मौत का आरोप पुलिस के सर थोप दिया। लेकिन इस खबर की वास्तविकता सामने आते ही राजदीप सरदेसाई ने बिना माफ़ी माँगे अपने ट्वीट को डिलीट कर दिया।

वहीं, राजदीप सरदेसाई की पत्नी और पत्रकार सागरिका घोष मंगलवार सुबह से ही प्रदर्शन कर रहे किसानों को भड़काने का काम कर रही हैं। गणतंत्र दिवस (रिपब्लिक डे) की सुबह ही आन्दोलन कर रहे किसानों की तारीफ करे हुए सागरिका ने एक ट्वीट किया और लिखा कि आखिरकार ‘रिपब्लिक’ में ‘पब्लिक’ वापस लौट चुकी है।

महज एक दिन पहले ही राजदीप सरदेसाई और उनकी बीवी समेत तमाम निष्पक्ष और लिबरल पत्रकारों ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की एक तस्वीर को लेकर जमकर फजीहत कमाई और फेक न्यूज़ फैलाई।

उल्लेखनीय है कि गणतंत्र दिवस पर दिल्ली पुलिस की ओर से किसानों को कुछ जगहों पर ट्रैक्टर रैली निकालने की इजाजत दी गई थी। लेकिन मंगलवार सुबह से ही दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर हजारों की संख्या में प्रदर्शन कर रहे किसानों ने ट्रैक्टरों के साथ दिल्ली में धावा बोल दिया।

प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स को तोड़ा और आईटीओ, लाल किले पर उत्पात मचाया। दिल्ली के आईटीओ पर किसानों और पुलिस के बीच जमकर संघर्ष भी हुआ है। किसानों ने दिल्ली में घुसने के लिए कुछ बैरिकेड्स तोड़ दिए थे।

केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान अपनी ट्रैक्टर परेड लेकर नई दिल्ली के लाल किले तक घुस चुके हैं और उन्होंने लाल किले पर अपना झंडा भी फहरा दिया है। प्रदर्शनकारी किसानों ने लाल किले के फाटक पर रस्सियाँ बाँधकर इसे गिराने की कोशिश भी कीं।

मंगलवार (जनवरी 26, 2021) दोपहर लाल किले पर पहुँचे किसानों को एक गुंबद के शीर्ष पर एक झंडा लगाते हुए देखा गया। वहीं, एक अन्य प्रदर्शनकारी ने उस जगह पर अपना झंडा लगा दिया, जहाँ पर प्रधानमंत्री हर वर्ष स्वतन्त्रता दिवस के मौके पर तिरंगा फहराते आए हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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