Thursday, April 2, 2026
Homeफ़ैक्ट चेकसोशल मीडिया फ़ैक्ट चेकक्या कैडबरी चॉकलेट में होता है बीफ? जिलेटिन पाए जाने को लेकर सोशल मीडिया...

क्या कैडबरी चॉकलेट में होता है बीफ? जिलेटिन पाए जाने को लेकर सोशल मीडिया पर बड़ा दावा, कंपनी ने बताया भ्रामक: फैक्ट चेक

एक वेबसाइट से लिया गया स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जमकर शेयर​ किया जा रहा है। इसमें कहा गया है कि यदि किसी उत्पाद में जिलेटिन नामक घटक होता है, तो इसका मतलब है कि यह गोमांस का प्रयोग करके बनाया गया है।

सोशल मीडिया पर एक मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि कैडबरी चॉकलेट में बीफ होता है। एक वेबसाइट से लिया गया स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जमकर शेयर​ किया जा रहा है। इसमें कहा गया है कि यदि किसी उत्पाद में जिलेटिन नामक घटक होता है, तो इसका मतलब है कि यह गोमांस का प्रयोग करके बनाया गया है।

कई लोगों ने इस स्क्रीनशॉट को यह दावा करने के लिए साझा किया कि भारत में बेचे जाने वाले कैडबरी उत्पादों में बीफ होता है। लेकिन कंपनी का कहना है कि यह पूरी तरह से भ्रामक है, क्योंकि ये उत्पाद भारत से संबंधित नहीं है। कंपनी ने बताया कि भारत में बेचे जाने वाले उसके उत्पादों में बीफ या किसी भी प्रकार के अन्य मांस का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

कई लोगों ने इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण के लिए कंपनी के आधिकारिक हैंडल को टैग भी किया। वहीं, कंपनी ने उन्हें जवाब देते हुए बताया कि उनके द्वारा साझा किया गया स्क्रीनशॉट भारत में निर्मित मोंडेलेज उत्पादों (Mondelez products) से संबंधित नहीं है। मोंडेलेज इंटरनेशनल अमेरिकी कंपनी है, जो अब ब्रिटिश कंपनी कैडबरी की मालिक है। कंपनी ने जोर देते हुए आगे कहा, ”चॉकलेट के रैपर पर हरे रंग का सर्कल दर्शाता है कि भारत में निर्मित और बेचे जाने वाले सभी उत्पाद 100% शाकाहारी हैं।”

कंपनी ने इस तरह के भ्रामक व झूठे दावे करने वाले ट्विटर यूजर्स को करारा जवाब दिया है। कंपनी ने लोगों से अपने उत्पादों को आगे साझा करने से पहले उनसे संबंधित तथ्यों को सत्यापित करने का भी अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि आप भली-भाँति जानते हैं कि इस तरह के नकारात्मक और भ्रामक पोस्ट हमारे सम्मानित और बड़े ब्रांड के प्रति उपभोक्ताओं का विश्वास ​कम कर सकते हैं।

हालाँकि, स्क्रीनशॉट वास्तव में कैडबरी वेबसाइट का ही है, लेकिन कंपनी सही कह रही है कि यह भारत में बेचे जाने वाले उत्पादों से संबंधित नहीं है। स्क्रीनशॉट में साइट का URL है, Cadbury.com.au है, जिसका अर्थ है कि यह कंपनी की ऑस्ट्रेलिया इकाई की वेबसाइट है। ध्यान दें कि .au ऑस्ट्रेलिया के लिए कंट्री कोड टॉप-लेवल डोमेन है।

वायरल मैसेज में शेयर किया गया वेबपेज वेबसाइट के हलाल सेक्शन में उपलब्ध है, जिसका मतलब है कि यह ऑस्ट्रेलिया में बिकने वाले उत्पादों की बात कर रहा है। दरअसल, यह पहली बार नहीं है, जब कन्फेक्शनरी कंपनी (confectionary company) को अपने उत्पादों के बारे में इस तरह की भ्रामक अफवाहों के लिए जवाब देना पड़ा है। लोग समय-समय पर आरोप लगाते रहते हैं कि इसकी लोकप्रिय चॉकलेट में बीफ होता है। हालाँकि, इसके उत्पादों की पैकेजिंग में एक हरे रंग का बिंदु होता है, जिसका अर्थ है कि इसमें किसी भी मांसाहारी चीज का उपयोग नहीं किया गया है। वे इसे बनाने में केवल पौधों और दूध से बनी सामग्री का ही इस्तेमाल करते हैं।

उदाहरण के लिए, डेयरी मिल्क को और अधिक स्वादिष्ट बनाने के लिए चीनी के अलावा इसमें दूध के ठोस रूप जैसे कोको बटर, पायसीकारी (Emulsifiers) को भी मिलाया गया है। इसलिए यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि भारत में कैडबरी के उत्पादों में जिलेटिन शामिल नहीं किया गया है। वायरल खबर में ऑस्ट्रेलिया में कैडबरी की जानकारी का इस्तेमाल कर यह दावा किया गया कि यह भारत से संबंधित है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘इस्लाम की रोशनी’ पर ज्ञान देने से नहीं चला ओझा ‘सर’ का काम, अब देश में क्रांति के नाम पर कर रहे ‘मारने-काटने’ की...

अवध ओझा सर ने US-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग का हवाला देते हुए भारत में 'मार-काट' होने की भविष्यवाणी कर दी। और बोला कि ऐसे में वह खुद चीन भाग जाएँगे।

देश का नागरिक बनाकर दिया सम्मान, जमीन पर भी दिलाया अधिकार: UP में 6 दशक बाद 2500+ बांग्लादेशी हिंदू परिवारों का इंतजार खत्म, पढ़िए...

योगी सरकार का बांग्लादेशी हिंदू शरणार्थियों के कल्याण के लिए कार्य करना महज राजनीतिक काम नहीं बल्कि हजारों परिवारों की जमीन और पहचान से जुड़ा एक ऐतिहासिक और कानूनी प्रयास दिखाता है।
- विज्ञापन -