कॉन्ग्रेस का ‘हिन्दू आतंकवाद’ और बेशर्म राजदीप: PM मोदी के बयान से किया खिलवाड़, लोगों ने लगाई लताड़

राजदीप द्वारा सोशल मीडिया पर लोगों को निरक्षर समझ कर ऐसी हरकतें की जाती हैं लेकिन अब जागरूक लोग उन्हें सच्चाई का एहसास कराने में देर नहीं लगाते।

राजदीप सरदेसाई ने एक बार फिर से अपना मोदी विरोधी रवैया दिखाया और वो भी झूठ के सहारे। प्रोपेगेंडा परस्त पत्रकारिता के पर्याय माने जाने वाले राजदीप ने पीएम मोदी के ‘हिन्दू आतंकवाद’ पर दिए गए बयान को ट्विटर पर न सिर्फ़ गलत तरीके से पेश किया बल्कि जनता को भी बरगलाने की कोशिश की। वैसे तो अपने अन्य वामपंथी झुकाव वाले पत्रकार साथियों की तरह राजदीप भी 2002 से ही नरेंद्र मोदी के विरोध में दुष्प्रचार चलाने में व्यस्त हैं लेकिन 2014 में मोदी के पीएम बनने के बाद उन्हें कुछ ज्यादा ही मिर्ची लगी हुई है। मोदी के शब्दों को अपने हिसाब से कुटिल ट्विस्ट देकर पेश करने वाले राजदीप के लिए यह सब नया नहीं है।

राजदीप सरदेसाई ने फैलाया झूठ

इस से पहले की हम राजदीप के करतूतों की चर्चा करें, ज़रूरी है कि हम यह जानें कि पीएम मोदी ने वास्तव में क्या कहा था? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र में एक विशाल जनसभा को सम्बोधित करते हुए कॉन्ग्रेस शासन काल में उछाले गए ‘हिन्दू आतंकवाद’ को लेकर पार्टी पर निशाना साधा। प्रधानमंत्री ने लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान वर्धा में आयोजित रैली में ये बातें कहीं। पीएम ने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा:

“वोट-बैंक की राजनीति के लिए एनसीपी और कॉन्ग्रेस किसी भी हद तक जा सकती हैं। इस देश के करोड़ों लोगों पर हिंदू आंतकवाद का दाग लगाने का प्रयास कॉन्ग्रेस ने ही किया है। सुशील कुमार शिंदे जब भारत सरकार में मंत्री थे, तो उन्होंने इसी महाराष्ट्र की धरती से हिंदू आतंकवाद की चर्चा की थी। कुछ दिन पहले कोर्ट का फैसला आया है और इस फैसले से कॉन्ग्रेस की साज़िश की सच्चाई देश के सामने आई है।”

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“कॉन्ग्रेस ने हिन्दुओं का जो अपमान किया है, कोटि-कोटि जनता को दुनिया के सामने नीचा दिखाने का जो पाप किया है, ऐसी कॉन्ग्रेस को माफ़ नहीं किया जा सकता है। आप मुझे बताइए, जब आपने हिन्दू आतंकवाद शब्द सुना तो आपको गहरी चोट पहुँची थी कि नहीं। हज़ारों साल के इतिहास में हिन्दू कभी आतंकवाद करे, ऐसी एक भी घटना नहीं है। अंग्रेजी इतिहासकारों ने भी कभी ‘हिन्दू हिंसक हो सकता है’ इस बात का जिक्र तक नहीं किया।”

राजदीप सरदेसाई ने इस सीधे बयान को ग़लत तरीके से पेश करते हुए कहा कि पीएम ‘हम बनाम वो’ की बात कर रहे हैं। ज़ाहिर है, राजदीप का कुटिल इरादा दो सम्प्रदायों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देना था। राजदीप ने अपने ट्वीट में पीएम के बयान को कुछ इस तरह पेश किया, “राहुल गाँधी ने उस क्षेत्र से चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं की जहाँ ‘हम’ बहुमत में हैं, उन्होंने उस क्षेत्र को चुना जहाँ ‘हम’ अल्पसंख्यक हैं।” जबकि पीएम ने ऐसा कुछ कहा भी नहीं था। पीएम मोदी अक्सर ‘सबका साथ, सबका विकास’ की बातें करते हैं। उन्होंने अपनी कई सभाओं में कहा है कि इस सरकार में उनका भी उतना ही हक़ है, जिन्होंने राजग को वोट नहीं दिया था।

राजदीप ने ‘हम’ को जिस तरह से कोट के अंदर लिखा, उस से साफ पता चलता है कि वो मोदी की छवि कट्टरवादी और मुस्लिम विरोधी पेश करना चाह रहे थे। लेकिन सही समय पर लोगों ने सोशल मीडिया पर उनकी इस करतूत को पकड़ा और उन्हें जमकर लताड़ लगाई। असल में पीएम ने कॉन्ग्रेस पर भारत की पाँच हज़ार वर्ष से भी पुरानी संस्कृति का अपमान करने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने कॉन्ग्रेस के इस ‘पाप’ की याद दिलाते हुए जनता से यह याद रखने को कहा कि ‘हिन्दू आतंकवाद’ जैसे शब्दों को किसने उछाला था? पीएम ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने जिसे आतंकी कहा, वो शांतिप्रिय समाज अब जाग चुका है। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का जिक्र करते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस ने पूरे विश्व को परिवार मानने वाले समाज को आतंकवादी बताया।

असल में प्रधानमंत्री मोदी ने कॉन्ग्रेस के ही दावों पर उसे घेरा। एक कॉन्ग्रेस नेता ने ही साफ़-साफ़ कहा था कि राहुल गाँधी के वायनाड से चुनाव लड़ने के पीछे वहाँ हिन्दुओं का ‘अल्पसंख्यक’ होना है। ख़ुद कॉंग्रेस के नेता ऐसे बयान दे रहे हैं। जबकि प्रधानमंत्री ने तो बस इतना पूछा कि आख़िर जब हिन्दुओं को आतंकवादी करार देने वाली कॉन्ग्रेस को अदालत से भी झटका मिल चुका है, तो ऐसे में राहुल के पास हिन्दू बहुल इलाक़े से लड़ने की हिम्मत क्यों नहीं है? राजदीप द्वारा सोशल मीडिया पर लोगों को निरक्षर समझ कर ऐसी हरकतें की जाती हैं लेकिन अब जागरूक लोग उन्हें सच्चाई का एहसास कराने में देर नहीं लगाते।

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