भगवंत मान ने ‘जनहित’ में दारू छोड़ी, सड़जी खुश हुए; अन्य AAP नेताओं ने लिए चुनावी रेज़ोल्यूशन

मनीष सिसौदिया ने तय किया है कि AAP सरकार के जाते-जाते बारहवीं के विज्ञान के सिलेबस में एक चैप्टर सड़जी के नाम पर कर के रहेंगे। उनके इस निर्णय का मायावती ने स्वागत किया है।

भारत में कई राजनीतिक पार्टियाँ हैं और उन सबकी अलग-अलग विषेशताएँ हैं। भाजपा अपने IT सेल के लिए विख्यात है तो कॉन्ग्रेस अपने अल्पसंख्यक विंग के लिए। लेकिन देश में एक ऐसी पार्टी भी है जिसके पास उसकी अपनी कॉमेडी विंग है। वो पार्टी है- आम आदमी पार्टी। हमारी चुनौती है आपको, एक भी ऐसा राजनीतिक दल दिखा दें जिसके पास कॉमेडी और फ़िल्म समीक्षा के लिए अलग से एक ख़ास सेल हो। AAP इस मामले में भारत ही नहीं, दुनिया के सारे राजनीतिक दलों से काफ़ी आगे है।

इसी क्रम में पंजाब के लोगों को भी आख़िरकार आम आदमी पार्टी को वोट देने की एक बड़ी वज़ह मिल ही गई। राज्य में AAP के सांसद भगवंत मान ने जनता के हित में दारू छोड़ने की घोषणा कर दी है। जी हाँ, जनता के हित में। यह पंजाब ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़ी वज़ह है AAP को वोट करने की। और पार्टी के सुप्रीमो सह फ़िल्म समीक्षा विंग के अध्यक्ष अरविन्द केजरीवाल ने इसे ‘एक बड़ा त्याग’ बताया है। यहाँ बताना ज़रूरी है कि केजरीवाल कभी-कभार दिल्ली के मुख्यमंत्री के तौर पर भी काम कर लेते हैं।

भगवंत मान ने AAP के बाकी नेताओं के सामने एक ऐसी चुनौती पेश की है जिस से सब अचरज में हैं। अब ख़ुद पार्टी के मुखिया ने उनके दारू छोड़ने को बलिदान बता दिया है तो बाकी के नेता भी केजरीवाल को खुश करने के चक्कर में लगे हैं। यही नहीं, वो भी कुछ ऐसा बलिदान देना चाहते हैं जिस से ‘सड़जी’ की प्रशंसा पा सकें। तो आइए जानते हैं कि भगवंत मान के दारू छोड़ने से प्रेरित AAP के अन्य नेताओं ने किस चीज का बलिदान दिया।

सोमनाथ भारती

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सोमनाथ भारती AAP के नेता हैं। उनके पड़ोसियों का कहना है कि उनका पालतू कुत्ता AAP का सदस्य नहीं था। यहाँ तक कि कई बार केजरीवाल ने भी उसे पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने का अनुरोध किया था लेकिन वो बेचारा जानवर केजरीवाल को जानता था, समझता था- उसने जीवनपर्यन्त AAP की प्राथमिक सदस्यता नहीं ली। केजरीवाल ने उसे अपनी पार्टी के एनिमल सेल का अध्यक्ष बनाने का भी ऑफर दिया लेकिन वो टस से मस न हुआ।

चाहे कितनी भी इच्छाशक्ति हो पर जब कोई जीव AAP नेताओं की संगत में रहे जिनके एक तिहाई से भी ज़्यादा विधायकों पर आपराधिक मामले चल रहे हैं, तो खुद को कब तक रोक पाएगा? उसकी भी मति भटक गई और उसके बाद हुआ कुछ यूँ कि वो बेचारा भी ‘वांटेड’ हो गया।

सोमनाथ भारती ने भी चुनाव के मौके पर अपना रेज़ोल्यूशन तय करते हुए कहा है कि अब वो अपनी पत्नी पर कुत्ते नहीं छोड़ेंगे और उन्हें पीटेंगे भी नहीं। अपनी पत्नी को कुत्ते से कटवाने वाले सोमनाथ के इस बयान पर अभी दिल्ली के मालिक की तरफ से कोई प्रतिक्रिया तो नहीं आई है। लेकिन हाँ, शशि थरूर ने एक प्रेस विज्ञप्ति ज़ारी कर उनकी तारीफ़ की है, जिसे समझने के लिए ऑक्सफ़ोर्ड से विशेषज्ञ बुलाए गए हैं।

अमानतुल्लाह ख़ान

दिल्ली से विधायक हैं। सड़जी के काफ़ी क़रीबी माने जाते हैं। जब भगवंत मान के दारू छोड़ने को केजरीवाल ने बलिदान बताया तब से ये भी इस सोच में डूबे हैं कि सड़जी का ध्यान आकर्षित करने के लिए क्या किया जाए? वैसे भी बेचारे एक बार पार्टी से निकाले ही जा चुके हैं, अपनी जगह पक्की करने के लिए कुछ न कुछ तो करना ही होगा उन्हें। ये केजरीवाल के इतने क़रीबी हैं कि अगर मालिक इन्हे किसी को प्यार से समझाने भेजते हैं तो ये दो-चार झापड़ लगा कर ही वापस आते हैं।

नाराज़ केजरीवाल ने इन्हे कितनी बार सिखाया कि थप्पड़ मारना नहीं चाहिए बल्कि उनकी तरह थप्पड़ खाना चाहिए लेकिन खान साहब मानते ही नहीं। थप्पड़ खाने का ये फ़ायदा है कि आप बाद में मोदी पर सारे इल्ज़ाम थोप कर खुद को हल्का कर सकते हो लेकिन थप्पड़ मारने में वो मजा कहाँ। एक बार अरविन्द केजरीवाल ने अमानतुल्लाह को दिल्ली के मुख्य सचिव को समझाने भेजा था। उसके कुछ दिनों बाद केजरीवाल को अमानतुल्लाह की ज़मानत कराने जाना पड़ा था।

जब दिल्ली सिग्नेचर ब्रिज के उद्घाटन के दौरान मनोज तिवारी मंच पर पहुँचे तब भी केजरीवाल ने अमानतुल्लाह को ही तिवारी को समझाने-बुझाने भेजा था लेकिन वो खान ने मनोज तिवारी को मंच से ऐसा ढकेला कि एक पल के लिए कश्मीर के पत्थरबाज़ भी उनकी दाद दें।

ताज़ा ख़बरों के अनुसार अमानतुल्लाह ख़ान ने ये तय किया है कि अब वो किसी की पिटाई नहीं करेंगे और अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को देखते ही ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष के साथ शंख बजा कर स्वागत करेंगे। केजरीवाल ने तो इस पर अभी चुप्पी साध रखी है लेकिन स्वामी ओम ने ख़ान से खुश होकर उन्हें अपने घर डिनर पर बुलाया है।

जीतेन्द्र सिंह तोमर

फ़िलहाल AAP के सदस्य नहीं हैं लेकिन केजरीवाल मंत्रिमंडल का हिस्सा रह चुके हैं। कहा जाता है कि केजरीवाल को मोदी की डिग्री माँगने की सलाह इन्होने ही दी थी। वो तो अलग बात है कि बाद में इनकी खुद की ही डिग्री जाली निकली। ये इतनी फ़ेक थी कि कोर्ट में इस बात को साबित करने के लिए पुलिस को 50,000 पेज के डाक्यूमेंट्स पेश करने पड़े थे।

केजरीवाल ने उन्हें क़ानून मंत्रालय दिया था लेकिन बेचारे आज खुद क़ानून के शिकंजे में बैठे हैं। अगले चुनावों को लेकर उन्होंने भी एक रेज़ोल्यूशन तैयार किया है। उन्होंने कहा है कि वो इस बार ऐसी डिग्री बनाएँगे कि दिल्ली पुलिस को चार्जशीट प्रिंट करने में ही 10 साल लग जाएँ। ताज़ा सूचना के अनुसार तेजस्वी यादव ने उन्हें अपनी पार्टी में शामिल होने का न्योता दे दिया है।

मनीष सिसौदिया

अगर केजरीवाल अकबर हैं तो मनीष उनके टोडरमल। केजरीवाल जितनी भी वीडियो बनाते हैं उसमे मनीष उनके बगल में बैठे नज़र आते हैं। वो अलग बात है कि उस दौरान उन्हें बोलने कुछ नहीं दिया जाता। केजरीवाल बोलते हैं और मनीष एक्सप्रेशंस देते हैं। ये ठीक उसी तरह है जैसे फ्लाइट के टेक ऑफ़ के दौरान एक एयर हॉस्टेस बोलती हैं और बाकी बस इशारे करती है। यहाँ भी कुछ ऐसा ही केस है।

फिर भी सिसौदिया ने चुनावी रेज़ोल्यूशन निश्चित कर लिया है। उन्होंने तय किया है कि AAP सरकार के जाते-जाते बारहवीं के विज्ञान के सिलेबस में एक चैप्टर सड़जी के नाम पर कर के रहेंगे। उनके इस निर्णय का मायावती ने स्वागत किया है। कहा तो ये भी जा रहा है कि सिसौदिया एक वेबसाइट भी बनाने जा रहे हैं जो बॉक्स ऑफिस इंडिया और IMDB को सीधी टक्कर देगी। उस वेबसाइट पर केजरीवाल के फ़िल्म रिव्यूज प्रकाशित किए जाएँगे।

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