दुनिया की पहली पीड़िता, जिसे अपने साथ हुए छेड़छाड़ और व्यभिचार का खुद ही पता नहीं

"2014 में मुझसे बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की गई थी। अरे! इतनी छेड़छाड़ के बाद भी मैं अभी तक जिंदा हूँ और तबसे मैंने बीस से अधिक राज्यों में लोकतंत्र को पल्लवित किया है।"

तीन बड़े राज्यों के चुनाव के बाद ईवीएम नीरो वंशी बजाते हुए सो रही थी कि अचानक से किसी ने उसे बीच नींद से उठाया और कहा कि देख तेरे नाम की प्रेस कॉन्फ्रेंस हो रही है। ईवीएम ने उस शख्स जो चुप कराते हुए कहा कि अरे! इसमें कौन सी नई बात है, जैसे सूरज का पूर्व से उगना प्रकृति का नियम है और रवीश कुमार का हरेक मुद्दे पर प्रतिसंघी होना शाश्वत सत्य है, वैसे ही मेरे खिलाफ़ ज़हर उगलना भी मतिछिन्नो का प्रिय शग़ल है।

इस बार ईवीएम एकदम भावुक हो गईं थी। उसने आगे लंबा एकालाप लेते हुए कहा कि मैं दुनिया की पहली पीड़िता हूँ, जिसे अपने साथ हुए छेड़छाड़ और व्यभिचार का खुद ही पता नहीं है। मुझे तो डर लगता है कि कहीं किसी दिन कोई मेरा हितैषी आईपीसी की धारा 354 के तहत कोर्ट में मुकदमा न दर्ज करवा दें। आए दिन के इन विपक्षी प्रपंचों से मेरा बाहर निकलना मुहाल हो गया है। बाहर निकलते ही सब ये पूछने लगते है कि तू ठीक तो है न, कहीं लगी तो नहीं! मेरा वश चले तो इज्ज़त के इन ठेकेदारों को तिहाड़ भेज दूँ।

हल्की सी सांस लेते हुए ईवीएम ने आगे भी बोलना जारी रखा। सैय्यद शुजा नाम का मुआ न जाने किस दाढ़ीजार की दाढ़ी से फुदकते हुए बाहर निकल आया और आते ही बोला कि 2014 में मुझसे बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की गई थी। अरे! इतनी छेड़छाड़ के बाद भी मैं अभी तक जिंदा हूँ और तबसे मैंने बीस से अधिक राज्यों में लोकतंत्र को पल्लवित किया है। मन तो करता है कि इस सैय्यद शुजा के शूजा घोंपा दूँ मग़र अपनी मर्यादा के हाथों बंधी हूँ।

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तीन राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव जीतने के बाद भी विपक्षी कॉन्ग्रेस ने हमें नैतिकता-शुचिता का प्रमाणपत्र न दिया। अरे! माँ सीता ने भी एक ही बार अग्निपरीक्षा दी थी, हमने तो पंजाब से लेकर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान चार-चार जगहों पर अग्निपरीक्षा दी है। सिब्बल जी को चाँदनी चौक ने धोबी पछाड़ दे दिया तो वो अब चार साल बाद हमको दोषी ठहरा रहे हैं। जिस प्रेस कॉन्फ्रेंस से विदेशी पत्रकारों के समूह ने स्वयं को अलग कर दिया, उस सभा के सैय्यद साथी बनकर वकील बाबू आपने देश की लोकतांत्रिक प्रणाली और चुनाव व्यवस्था का सरेआम मज़ाक बनाया है। फिलहाल सुनिए लोपक और रौनक का इस विषय पर क्या कहना है!

कहने को तो बहुत कुछ था ईवीएम के पास मग़र अब वो मारे भावुकता के बोलने में सक्षम न थी और फ़िर अभी तो उन्हें आगे भी पराजितों के समूह द्वारा स्वयं से छेड़छाड़ किए जाने का दंश झेलना है। सो उसने फिलहाल के लिए आराम करना ही उचित समझा।

यह व्यंग्य लोपक पर ‘देख तमाशा ईवीएम का!‘ नामक शीर्षक से प्रकाशित हुआ था। सहमति के साथ यहाँ प्रकाशित किया जा रहा है, ताकि ऑपइंडिया के पाठक भी हँसते रहें, मज़े लेते रहें :)

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