कलिकाल के संजय हैं दिव्यदृष्टिधारी जनेऊधारी शिवभक्त रामभक्त दत्तात्रेय गोत्री राहुल गाँधी

कुल मिलाकर राहुल गाँधी का अब एक सपना ही बाकी रह गया है, जो उन्होंने बचपन में देखा था, "मैं दत्तात्रेय गोत्रीय, गाँधी पुत्र राहुल, एक दिन देश का प्रधानमंत्री बनूँगा।"

कॉन्ग्रेस पार्टी की एकमात्र उम्मीद अपने राजनीतिक करियर में एक के बाद एक लगभग पिछत्तिस चुनाव हारने से इतने दुखी हुए हैं कि आए दिन वो कोई नया दिवास्वप्न देखने लगे हैं। लेटेस्ट दिवास्वप्न जो उन्होंने इस क्रम में देखा है, वो ये है कि गोवा के सीएम मनोहर पर्रिकर ने उनसे बताया था कि राफेल डील बदलते समय पीएम नरेंद्र मोदी ने मनोहर पर्रिकर से नहीं पूछा था।

शायद ऐसे स्वप्न देखकर वो अब ये सुबूत देना चाह रहे हैं कि जनेऊ धारण करते ही वो अब महाभारत और उसके पात्रों में विश्वास करते हैं और इनमें सबसे ज्यादा प्रभावित वो संजय के किरदार से हुए हैं, वही संजय जो अपनी दिव्यदृष्टि से धृतराष्ट्र को युद्धभूमि का हाल सुनते थे।

राहुल गाँधी ने शायद अब अपना एक ध्येय बना लिया है कि चाहे तथ्य कुछ भी कहें, लेकिन उन्होंने जो स्वप्न देखा है वही उनके तथ्य का पुख्ता सुबूत है। ऐसा करने में उन्होंने उस मीडिया गिरोह को भी पीछे छोड़ दिया है, जो ‘साँय -साँय’ वाली रहस्य और रोमाँच से भरी कहानियाँ अपनी ‘विशेष चर्चा’ में चलाने में माहिर हैं।

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अलीगढ़ के ‘पिलर लंबर बारा’ पर बैठे हमारे एक ‘गुप्त सूत्र’ की रिसर्च की मानें तो ऐसे हादसे राहुल गाँधी के साथ ख़ासकर तब से होने लगे हैं, जब से उन्होंने यज्ञोपवीत धारण किया है। हमारे इस गुप्त सूत्र को शक है कि राहुल गाँधी को शायद जनेऊ ‘सूट’ नहीं  कर रहा है। और इसी वजह से वो आए दिन अनाप-शनाप सपने देखने लगे हैं।

इससे पहले राहुल गाँधी को स्वप्न आया था कि वो कैलाश मानसरोवर यात्रा पे 13 घंटे लगातार पैदल चलकर जा रहे हैं। हैरानी की बात ये है कि अपनी इस युवावस्था में ढलते-उजड़ते राजनैतिक करियर को सँभालने के लिए जब राहुल गाँधी को एक व्यक्तिगत राजनीतिक सलाहकार और तेज-तर्रार किसी PR दलों की सहायता लेनी चाहिए थी, वो फोटोशॉप करने वाले युवाओं की मदद ले रहे हैं।

अपनी कैलाश मानसरोवर यात्रा से काला चश्मा और कूल वाली टोपी के साथ स्वप्नद्रष्टा राहुल गाँधी द्वारा जारी तस्वीरें , तस्वीर में कहीं से लाठी की छाया लाकर लगाने वाले को मिलेगा ‘गुप्त सूत्र’ बाबा का ऑटोग्राफ़

बाज़ार में इसके पहले भी इस प्रकार के ‘स्वप्न-राहुलदोष’ के मामले चर्चा में आ चुके हैं, जब पहले अपनी चौड़ाई दिखाने के लिए राहुल गाँधी ने कहा था कि हाँ, वो चीन के साथ विवाद के बावजूद चीन के अधिकारियों से मिलने गए थे। लेकिन यह मामला जैसे ही ‘राष्ट्रवादी’ रंग में आया और सुरक्षा कारणों से यह मुलाकात एकदम बेवकूफ़ाना और राहुल गाँधी के स्तर की बताई गई, तब राहुल गाँधी एकता मंच यह कहता पाया गया कि नहीं, उन्होंने चीन में किसी से कोई मुलाकात नहीं की थी और अगर की भी होगी तो यह राजनयिकों से होने वाली मुलाकात का हिस्सा मात्र था, जो की विपक्ष का नेता होने के नाते वह कर सकते हैं।

विपक्ष का नेता? जी हाँ, यानी एक और स्वप्न, जब आपकी पार्टी के पास पिछले 4 सालों से विपक्ष लायक सीटें भी नहीं हैं, तो फिर आप किस विपक्ष के नेता हैं? मने भाई साब, विपक्ष की ये किस लाइन में आ गए आप?

यह राहुल गाँधी स्वप्नों का आदि हो चुका है और अब ये विपक्ष का ‘तंत्र-साधक’ नेता स्वप्न के दूसरे ही स्तर पर पहुँच चुका है। इस स्तर में होता यह है कि इंसान अपनी खुद की मुलाकातों के स्वप्न के अलावा ये भी दिव्यदृष्टि से जान लेता है कि दूसरे लोग किस-किस से मिल रहे हैं। इसका सबसे जबरदस्त उदाहरण है, जब कलिकाल के इस संजय ने अरुण जेटली की विजय माल्या से वो मुलाकात देख डाली, जिसमें अरुण जेटली माल्या की अटैची और बिस्तरबंद लेकर उन्हें एयरपोर्ट छोड़ने जा रहे थे।

अंधभक्त और गोदी मीडिया कभी भी नहीं मानेगा कि महाठगबंधन अपनी जगह पर है, लेकिन मोदी जी को अगर असल मायनों में कोई चुनौती दे रहा है, तो वो सिर्फ और सिर्फ राहुल गाँधी हैं। इसके लिए उनके पास कारण भी हैं। मामला चाहे राफ़ेल का हो या फिर कोई और, तमाम सरकारी स्पष्टीकरणों के बाद भी जिस चौड़ाई और हठ से वो अपने बयानों पर अड़े रहते हैं, वो वाकई देखने लायक और लाजवाब है।

गंदे नाले से बॉल निकाल लाने के लिए गली क्रिकेट में बड़े लड़के अक्सर उम्र में छोटे बच्चों को भी टीम में रख लेते हैं, लेकिन जब वो बैटिंग करने की हठ करता है तो घरवालों के मनाने से भी नहीं मानता है। इसी बच्चे से फिर अगर आप कह दें कि बॉउंड्री के उस पार की ही ‘सिक्स’ मानी जाएगी, लेकिन वो बच्चा तो बालहठ में बल्ले पर लगी ‘टुक्क’ को ही सिक्स मानता है, क्योंकि एक बार रूमी ने कहा था, ‘हिज़ लाइफ़ हिज़ रूल्ज़।’

तो मित्रो! इस तरह से राहुल गाँधी की दिव्यदृष्टि एक के बाद एक सपने देखने में अब तक लगातार कामयाब रही है। जैसे उनका एक सपना था कि राफेल डील की फ़ाइलें पर्रिकर के बेडरूम में थीं। दूसरा सपना था, मनोहर पर्रिकर ने कहा था कि उन्हें राफेल के बारे मे कोई जानकारी नही है।

इस तरह से कुल मिलाकर राहुल गाँधी का अब एक सपना ही बाकी रह गया है, जो उन्होंने बचपन में देखा था, “मैं दत्तात्रेय गोत्री, गाँधी पुत्र राहुल, एक दिन देश का प्रधानमंत्री बनूँगा।”

उम्मीद है कि राहुल गाँधी के सपनों को जल्द ही उड़ान मिले और वो इस ‘स्वप्न-काण्ड’ के प्रथम अध्याय से जागकर कुछ कर गुज़रें।

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