ममता सरकार ने जनतंत्र के साधनों पर कब्ज़ा कर लिया है: टीना बिस्वास

’’आधुनिक काल में पश्चिम बंगाल की राजनीति को जो चीज़ रुग्ण कर रही है उसका खुलासा करने के लिए मैंने उपन्यास को माध्यम बनाया है। एक वक्त था जब हम सबने बड़ी आशा लगाई थी कि यहाँ पर सरकार में होने वाला परिवर्तन दिखेगा, लेकिन दुर्भाग्य से वह आशा बेहद अल्प-जीवी साबित हुई।’’

जब सरकार जनतंत्र के साधनों पर कब़्जा करने लगे और अभिव्यक्ति की स्वतत्रंता पर लगाम कसने लगे तो यह चिंता और चेतावनी की स्थिति है और यही हालात पश्चिम बंगाल में भी है। जानी-मानी उपन्यासकार और विचारक टीना बिस्वास ने मंगलवार को कोलकाता प्रेस क्लब में अपनी तीसरी पुस्तक ’द एंटागाॅनिस्ट’ के विमोचन के अवसर पर अपनी वेदना व्यक्त की।

पुस्तक विमोचन के दौरान अपने विचार प्रकट करती टीना बिस्वास

’’आधुनिक काल में पश्चिम बंगाल की राजनीति को जो चीज़ रुग्ण कर रही है उसका खुलासा करने के लिए मैंने उपन्यास को माध्यम बनाया है। एक वक्त था जब हम सबने बड़ी आशा लगाई थी कि यहाँ पर सरकार में होने वाला परिवर्तन दिखेगा, लेकिन दुर्भाग्य से वह आशा बेहद अल्प-जीवी साबित हुई।’’ बिस्वास ने बताया कि उनका जन्म बंगाली दंपत्ति के घर में हुआ और उन्होंने आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में राजनीति, दर्शनशास्त्र एवं अर्थशास्त्र की पढ़ाई की। उनकी तीसरी किताब ’द एंटागाॅनिस्ट’ के बारे में सांसद शशि थरूर का कहना है, ’’यह एक दिलचस्प और आविष्कारशील राजनीतिक उपाख्यान है। यह सुस्पष्ट, अभिगम्य, चपल और अत्यतं मौलिक उपन्यास है।’’

एशियन रिव्यू ऑफ बुक्स ने इस पुस्तक के लिए लिखा है, ’’राजनीतिक प्रवंचना के प्रशंसक इस व्यंग्यपूर्ण कथा को सराहेंगे, जो पश्चिम बंगाल के शासक वर्गों में फैले कपटाचरण, मीडियाई जोड़तोड़ और हत्याओं के किस्से बयां करती है।’’ पुस्तक के प्रकाशक फिंगरप्रिंट के प्रतिनिधि उपन्यास के बारे में कहते हैं, ’’व्यक्ति के संग राजनीति को निर्बाध ढंग से एक करते हुए और कल्पना को वास्तविकता के साथ मिलाते हुए ’द एंटागाॅनिस्ट’ आधुनिक राजनीति के काले एवं विसंगति भरे व्यंग्य को प्रकट करती है।’’

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टीना बिस्वास बताती हैं, ’’यूनाइटेड किंग्डम में जन्म व पालन पोषण के बावजूद मेरे हृदय में बंगाली संस्कृति का विशेष स्थान है और इसीलिए इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि मेरे तीनों उपन्यासों का पश्चिम बंगाल से गहरा नाता है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जनतंत्र के मूल्याों में गहन विश्वास रखने वाले व्यक्ति के तौर पर मुझे, आजकल लगाए जाने वाले प्रतिबंधों से बहुत दुख होता है- चाहे वह सिनेमा पर रोक हो या फिर असहमति की आवाज़ को दबाना। सार्वजनिक स्वतंत्रता के क्षेत्र में सरकार के दमन के विरुद्ध मैंने अपनी लेखनी से सदैव आवाज़ बुलंद की है।’’ द गार्जियन द्वारा टीना बिस्वास को ’स्वाभाविक लेखक’ करार दिया गया है। विख्यात राजनीतिक टिप्पणीकार व लेखक मैथ्यू डी’ऐनकाॅना ने घोषित किया है कि ’द एंटागाॅनिस्ट’ ’’एक शानदार सामाजिक व्यंग्य है। इसकी गति, दनदनाते संवाद और मेधावी अवलोकन ईवलिन वाॅ के जादुई लेखन का एहसास कराते हैं।’’

अपने उपन्यास का प्रचार करने के लिए टीना कोलकाता और दिल्ली की यात्रा कर रही हैं। बिस्वास ने पश्चिम बंगाल में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दमन और बिगड़ते राजनीतिक हालात के संदर्भ में कहा, “मैं समझती हूँ कि जो सही है, उसके लिए खड़े होना मेरा कर्तव्य है और इस हेतु लिखने से बेहतर तरीका और भला क्या हो सकता है।’’ टीना बिस्वास ने एक दिन पहले सोमवार को ऐमिटी यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों के साथ संवाद भी किया था।

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