Monday, August 2, 2021
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‘अंजनाद्रि की पहाड़ियों में ही हुआ था हनुमान जी का जन्म’: TTD ने 4 महीने की रिसर्च के बाद रिपोर्ट में किया दावा

कर्नाटक का हम्पी, झारखंड के गुमला का अंजन गाँव, हरियाणा का कैथल या फिर गुजरात का नवसारी और नासिक के त्रयम्बकेश्वर के अंजनेरी में हनुमान जी का जन्मस्थल होने की बात भी TTD ने नकार दी।

आंध्र प्रदेश की ‘तिरुपति तिरुमला देवस्थानम (TTD)’ बोर्ड ने घोषणा की है कि भगवान हनुमान का जन्म आकाशगंगा जलप्रपात के नजदीक जपाली तीर्थम में हुआ था। नेशनल संस्कृत यूनिवर्सिटी के कुलपति वी मुरलीधर शर्मा, जिन्हें TTD ने उस विशेषज्ञ समिति का हिस्सा बनाया था, जिसे साबित करना था कि तिरुमला सप्त पहाड़ियों में स्थित अंजनाद्रि पहाड़ी ही हनुमान जी का जन्मस्थल है। उन्होंने बुधवार (अप्रैल 21, 2021) को एक कार्यक्रम में ये घोषणा की।

TTD ने कहा कि 4 महीनों के गहन रिसर्च के बाद पता चला है कि तिरुमला की पहाड़ियों में ही हनुमान जी का जन्म हुआ था। शर्मा ने कहा कि पौराणिक संकलन, साहित्यिक और एपिग्रफिक सबूतों के अलावा भौगोलिक साक्ष्य भी कहते हैं कि भगवान हनुमान का जन्म आंध्र प्रदेश में हुआ था। उन्होंने कहा कि वेंकटाचलम को अंजनाद्रि सहित 19 नामों से जाना जाता है और त्रेता युग में अंजनाद्रि में हनुमान का जन्म हुआ था।

बता दें कि वेंकटाचल माहात्म्य और स्कन्द पुराण में बताया गया है कि अंजना देवी ने महंत ऋषि के पास जाकर पुत्र प्राप्ति का रास्ता बताने के लिए आग्रह किया था। फिर उन्हें वेंकटाचलम पर तपस्या करने को कहा गया। कई वर्षों के तप के बाद उन्हें जिस पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई, वो हनुमान हुए। प्रोफेसर शर्मा ने भी इसी कहानी को दोहराते हुए सबूत दिखाया। उन्होंने कहा कि वराह पुराण और ब्रह्माण्ड पुराण में भी बाल हनुमान द्वारा सूर्य को निगलने की कथा आती है।

प्रोफेसर शर्मा ने कहा, “वेंकटगिरी से ही हनुमान ने सूर्य की तरफ छलाँग लगाई थी। जब ब्रह्मा और इंद्र ने उन पर वज्र से प्रहार किया, वो नीचे गिर पड़े और अंजना देवी अपने पुत्र के लिए रोने लगीं। तत्पश्चात देवताओं ने वहाँ आकर हनुमान को कई वरदान दिए और कहा कि ये पर्वत अब से अंजनाद्रि नाम से जाना जाएगा। 12 पुराणों से हमनें सबूत इकट्ठा किए हैं। कम्ब रामायण और अन्नमाचार्य संकीर्तन भी यही बताते हैं।”

बकौल TTD, तिरुमला मंदिर में 12वीं और 13वीं शताब्दी के अभिलेख भी मिले हैं, जो इसी ओर इशारा करते हैं। बोर्ड ने बताया कि कांचीपुरम के वरदराज स्वामी मंदिर, जहाँ ‘सवाल-ए-जवाब’ दस्तावेजों की शक्ल में 1801-02 में पहले कलक्टर जी स्ट्रटों के समय से ही चीजें मेंटेन की जा रही हैं, जिसका वीएन श्रीनिवास राव ने 1950 में अनुवाद किया था, वो भी इसकी पुष्टि करते हैं। साथ ही भौगोलिक विवरण भी दिए है।

इसके अनुसार, जब मातंग ऋषि से अंजना देवी ने पूछा कि वेंकटाचलम कहाँ है, तो उन्होंने बताया कि ये स्वर्णमुखी नदी से उत्तर की तरफ अहोबिलम से 12 योजन की दूरी पर स्थित है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक का हम्पी तो किष्किंधा है और वहाँ हनुमान का जन्म नहीं हुआ था। झारखंड के गुमला का अंजन गाँव, हरियाणा का कैथल या फिर गुजरात का नवसारी और नासिक के त्रयम्बकेश्वर के अंजनेरी के हनुमान का जन्मस्थल होने की बात भी उन्होंने नकार दी।

तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित भी इस कार्यक्रम में शामिल थे और उन्होंने खुद को बड़ा हनुमान भक्त बताते हुए TTD के रिसर्च की सराहना की। TTD के एग्जीक्यूटिव अधिकारी केएस जवाहर ने कहा कि 22 पेज की रिपोर्ट इस सम्बन्ध में तैयार की गई है। इसे बोर्ड की वेबसाइट पर भी डाला जाएगा। उन्होंने कहा कि कर्नाटक, हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड के दावों में दम नहीं है क्योंकि वो स्थानीय किस्सों पर आधारित हैं, सबूतों पर नहीं।

वहीं VHP की कर्नाटक शाखा ने कहा है कि TTD को समय लेकर इस सम्बन्ध में और रिसर्च करनी चाहिए। कुछ पुरातात्विक और इतिहास विशेषज्ञों ने भी TTD के दावे को नकारा है। अब तक कर्नाटक के बल्लारी के पास स्थित हम्पी को ही प्राचीन वानर साम्राज्य माना जाता रहा है। TTD का कहना है कि उसके पास अपने दावे के वैज्ञानिक सबूत भी हैं और खगोलीय गणना कर के ही चीजें सार्वजनिक की गई हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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