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काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से 40 प्राचीन मंदिरों को मिलेगा भव्य स्वरुप, आस्था और आधुनिकता का अनूठा संगम

ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया से क्षेत्र में 40 मंदिरों की खोज हुई है, जो अब तक इसी क्षेत्र के कई इमारतों और संरचनाओं के अंदर कैद थे। पीएम मोदी ने कहा है कि इन प्राचीन मंदिरों को जनता के दर्शन के लिए संरक्षित किया जाएगा।

दुनिया के सबसे प्राचीन शहरों में से एक काशी अर्थात वाराणसी विश्व पटल पर अपने पुराने गौरव के साथ सभी का स्वागत करने के लिए तैयार है क्योंकि काशी विश्वनाथ मंदिर गलियारे का निर्माण कार्य प्रगति पर है। 39,000 वर्ग मीटर के क्षेत्र में विस्तृत 700 करोड़ रुपए के निवेश से निर्मित विश्वनाथ मंदिर गलियारा 12 ज्योतिर्लिंग मंदिरों में से एक प्राचीन मंदिर को वाराणसी के प्रसिद्ध घाटों से जोड़ेगा।

पीएम मोदी ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना का 8 मार्च, 2019 को खुद शिलान्यास किया था। 1780 ई के बाद, वाराणसी शहर सबसे बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। इससे पहले इंदौर की मराठा रानी अहिल्याबाई होल्कर ने मंदिर और आस-पास के इलाकों का जीर्णोद्धार किया था। इसके बाद 1853 ई. में, सिख महाराजा रणजीत सिंह ने काशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर को सोने से मढ़वाया था और अब पीएम मोदी के नेतृत्व में, शहर का भव्यतम निर्माण कार्य काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के रूप में परिवर्तन की आधुनिक लहर से गुजर रहा है।

चूँकि, गलियारे के निर्माण की प्रक्रिया प्रगति पर है, इसलिए घाटों और मंदिरों की ओर जाने वाली संकरी गलियों से सटी हुई इमारतों को ध्वस्त कर दिया गया है। ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया से क्षेत्र में 40 मंदिरों की खोज हुई है, जो अब तक इसी क्षेत्र के कई इमारतों और संरचनाओं के अंदर कैद थे। पीएम मोदी ने कहा है कि इन प्राचीन मंदिरों को जनता के दर्शन के लिए संरक्षित किया जाएगा।

एक ऐसे शहर की सांस्कृतिक विरासत को  संरक्षित करने के लिए जो प्राचीन काल से ही हिंदू धर्म, आस्था और हिंदू पौराणिक कथाओं का प्रमुख केंद्र रहा है। सरकार के लिए यह सब इतना आसान नहीं था। काशी विश्वनाथ मंदिर के आसपास की अनावश्यक संरचनाओं को नष्ट करने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति का होना अनिवार्य था, और ऐसा करने के लिए महादेव की नगरी में स्वयं भगवान शिव की तरह विध्वंसक रूप अख्तियार किए बिना संभव नहीं था। कॉरिडोर परियोजना के सीईओ ने दावा किया है कि सभी कानूनी अधिकार धारकों को उचित मुआवजा दिया गया है।

कई निवासी 40 मंदिरों के पुनः प्राचीन स्वरुप के अस्तित्व में आने से गदगद थे जो न जाने कब से क्षेत्र में फैली हुई आवासीय और व्यावसायिक संरचनाओं के नीचे छिप गए थे। उनमें से अधिकांश ने काशी विश्वनाथ मंदिर के गलियारे को मंजूरी पर ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए कहा कि गलियारे के निर्माण से न सिर्फ पर्यटन में इजाफा होगा बल्कि और अधिक पर्यटकों के काशी आगमन से शहर के आधुनिकीकरण का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

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रवि अग्रहरि
रवि अग्रहरि
अपने बारे में का बताएँ गुरु, बस बनारसी हूँ, इसी में महादेव की कृपा है! बाकी राजनीति, कला, इतिहास, संस्कृति, फ़िल्म, मनोविज्ञान से लेकर ज्ञान-विज्ञान की किसी भी नामचीन परम्परा का विशेषज्ञ नहीं हूँ!

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