Wednesday, November 25, 2020
Home विविध विषय भारत की बात हिन्दुओं के खिलाफ सशस्त्र जिहाद की घोषणा करने वाले अलगाववाद के जनक सर सैयद...

हिन्दुओं के खिलाफ सशस्त्र जिहाद की घोषणा करने वाले अलगाववाद के जनक सर सैयद अहमद खान थे असली ‘वीर’

भाजपा सरकार के दौरान इतिहास लगातार चर्चा का विषय रहा है, यह आवश्यक भी है। क्योंकि, जब-जब सावरकर के वीर होने या न होने पर बहस होगी, तब-तब अंग्रेज़ों को अल्लाह का बंदा बताने वाले सर सैयद अहमद खान आकर बताएँगे कि वीर कौन हो सकता है।

हर देश अपने इतिहास पर, चाहे वो बुरा हो या फिर गौरवशाली, गर्व करता है। क्योंकि यह आवश्यक नहीं है कि हमारे लिए जो स्वर्णिम हो वह पाकिस्तान के लिए भी स्वर्णिम हो या फिर ब्रिटिशर्स भी उसे स्वर्णिम इतिहास की तरह ही याद रखें।

फिर भी, जितना विरोधाभास अपने इतिहास को लेकर हमारे देश में रहा है शायद ही किसी अन्य देश को इस तरह से जूझना पड़ा हो। बात चाहे वीर सावरकर की हो, जिन्ना की हो या फिर अलीगढ़ आंदोलन वाले सैयद अहमद खान की, हर किसी ने यहाँ इतिहास को अलग नजरिया दिया है।

इसमें सबसे बड़ा हास्यास्पद विरोधाभास यह भी है कि स्वयं को गाँधीवादी कहने वाले लोग आश्चर्यजनकरूप से द्विराष्ट्र सिद्धांत देने वाले और अलगावाद के जनक सैयद अहमद खान की भी भक्ति में लीन देखे जाते हैं। जबकि, हकीकत यह है कि आप या तो गाँधीवादी हो सकते हैं या फिर कश्मीर से बंगाल तक हिंदुओं के खिलाफ सशस्त्र जिहाद की घोषणा करने वाले सैयद अहमद खान के समर्थक।

यह हमारे पड़ोसी मुल्क का दुर्भाग्य ही हो सकता है कि उसे अपने क्रांतिकारियों और आजादी के नायकों को सिर्फ चंद नामों में समेटना पड़ा। 8वीं शताब्दी का लुटेरा मुहम्मद बिन कासिम पड़ोसी मुल्क के लिए मसीहा हो सकता है तो वहीं, हम इस नाम को इतिहास के काले अध्यायों में रखते हैं। पाकिस्तान जिन तीन नामों को अपना मसीहा मानता है उनमें जिन्ना, इकबाल और सर सैय्यद अहमद खान सबसे ऊपर हैं।

ये वही सैयद अहमद खान हैं, जिन्हें अंग्रेजों ने उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए ‘सर’ की उपाधि से नवाजा था। वही सैयद अहमद खान, जिन्होंने माना था कि अंग्रेजों को अल्लाह ने उन पर हुकूमत करने के लिए भेजा है और यदि कोई ‘मोहम्मदन’ या फिर इस्लाम किसी का करीबी हो सकता है तो वो सिर्फ और सिर्फ ईसाई धर्म है। इस्लाम के महान विचारक सैयद अहमद खान ने 1857 की क्रांति को अंग्रेजों के सामने ‘हरामजदगी’ बताया था। क्रांति के दौरान अंग्रेजों की नजर में मजहब विशेष के लिए ‘दया’ पैदा करने के लिए उन्होंने राय दी थी कि अंग्रेजों को अपने राजकाज में मुस्लिमों की भर्ती करनी चाहिए जिससे इस तरह की ‘हरामजदगी’ फिर न हों।

साभार विकिपीडिया

इस देश में विरोधी विचारधारा को हमेशा ही आश्चर्यजनक रूप से सम्मान की नजर से देखा जाता है। यही सम्मान एक समय ईस्ट इण्डिया कम्पनी के व्हाइटमैन बर्डेन के सिद्धान्त को भी दिया गया था। यही सम्मान पाखंडी, धूर्त कम्युनिस्टों ने भी खूब कमाया है। सवाल यह है कि यदि सर सैयद अहमद खान को भारत में एक नायक के रूप में पेश किया जा सकता है तो फिर मोहम्मद इकबाल और मोहम्मद अली जिन्ना को भी सम्मान देने में हमें झिझक नहीं होनी चाहिए।

मुझे अक्सर आश्चर्य होता है कि देश के इतिहास पर चर्चा करते समय प्रगतिशील विचारक और लेफ्ट लिबरल वर्ग सर सैयद अहमद खान को इतने चुपचाप तरीके से क्यों स्मरण करता है। आखिर विचारकों को सैयद अहमद खान के नाम को खुलकर आगे करने में भय क्यों होता है? साथ ही यह भी देखा गया है कि दक्षिणपंथियों ने कभी भी सैयद अहमद खान के ‘सिद्दांतों’ पर चर्चा नहीं की। जबकि, सैयद अहमद खान के भ्रामक और मिथकीय महिमामंडन की पृष्ठभूमि में वास्तविकता की खोज हमेशा आवश्यक थी।

हम सावरकर को वीर साबित करते रह गए जबकि सर सैयद अहमद खान समय से काफी पहले दो राष्ट्र सिद्धांत के भड़काऊ ऐतिहासिक भाषणों में पहले ही बता चुके थे कि इस देश में ‘वीर’ सिर्फ वो बहादुर पठान बंधू थे, जो सर सैयद अहमद खान की नजर में हिंदुओं से कम भले ही थे लेकिन दुर्बल नहीं थे।

मार्च 14, 1888 को मेरठ में दिए गए भाषण में सैयद अहमद खान ने कहा था- “हमारे पठान बंधु पर्वतों और पहाड़ों से निकलकर सरहद से लेकर बंगाल तक खून की नदियाँ बहा देंगे। अंग्रेज़ों के जाने के बाद यहाँ कौन विजयी होगा, यह अल्लाह की इच्छा पर निर्भर है। लेकिन जब तक एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र को जीतकर आज्ञाकारी नहीं बनाएगा तब तक इस देश में शांति स्थापित नहीं हो सकती।”

इतिहास बेवजह ‘वीर’ और क्रन्तिकारी शब्द पर चर्चा करता रहा, जबकि सर सैयद अहमद खान उसी वक़्त साबित कर चुके थे। उनके विचारों को आज अगर कोई जिन्दा रख पाया है तो वो AIMIM नेता अकबरुद्दीन ओवैसी है, जो सैयद अहमद खान के मेरठ में दिए गए भाषण की याद दिलाता है कि 15 मिनट के लिए अगर पुलिस हटा दी जाए तो देश को पता चल जाएगा कि ‘वीर’ कौन है। सावरकर की प्रतिमा पर स्याही फेंकने वाले लोग अपने ‘वीरों’ को कब का चुन चुके हैं।

सावरकर की प्रतिमा को लगाने-हटाने, उस पर स्याही फेंकने पर यह देश बेवजह अपना समय और संसाधन व्यर्थ करता है। सर सैयद अहमद खान के योगदान और उनके महान भाषणों को याद करने भर से ही तय हो जाता है कि इस देश को किन लोगों पर गर्व होना चाहिए।

अपने प्रेरणास्रोतों और आदर्शों के कारण अक्सर विवादों में रहने वाले अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थापना इन्हीं सर सैयद अहमद खान ने वर्ष 1875 में ‘मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज’ के नाम से की थी, आगे चलकर यही संस्‍था वर्ष 1920 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में बदल गई और आज तक कायम है।

अगस्त 31, 1941 को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रों को संबोधित करते हुए मुस्लिम लीग के नेता लियाकत अली खान ने कहा था- “हम मुस्लिम राष्ट्र की स्वतंत्रता की लड़ाई जीतने के लिए आपको उपयोगी गोला-बारूद के रूप में देख रहे हैं।” विभाजन के बाद वही लियाकत अली खान पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री बने थे।

मौलाना आज़ाद ने एक बार अपने भाषण में सर सैयद अहमद खान के राजनीतिक विचारों को हिंदुस्तान के लिए सबसे बड़ी ग़लती बताया था। उन्होंने कहा था कि शिक्षा और सामाजिक कार्यों की आड़ में सैयद अहमद खान ने जो राजनैतिक एजेंडा चलाया, उसके लिए वे उन्हें कभी माफ़ नहीं कर पाएँगे। मौलाना आजाद का विचार था कि सैयद अहमद खान के विचारों ने भारतीय मुसलामानों के एक धड़े को ग़लत दिशा में सोचने पर उकसा दिया और जिसका परिणाम बँटवारा था।

मोहम्मद अली जिन्ना ने जब आजादी के समय दो राष्ट्र सिद्धांत की दलील दी थी, तब भी यही कहा था कि हिंदू और मुस्लिम न पहले साथ रहे हैं और न आगे रह पाएँगे, सो सम्प्रदाय के उत्थान की आड़ में जिस अलीगढ़ मूवमेंट के ज़रिए सर सैयद अहमद खान को पहचान मिली थी, वहीं से इंडियन मुस्लिम लीग का जन्म हुआ था और इसके आगे बाकी सब इतिहास है।

बाद में जिन्ना की इच्छा के अनुसार जो हुआ, उसका पितृत्व सर सैयद का है। पाकिस्तान शासन द्वारा प्रकाशित आज़ादी के आंदोलन के इतिहास में मोइनुल हक कहते हैं- “सच में, हिंद पाकिस्तान में मुस्लिम राष्ट्र स्थापित करने वाले संस्थापकों में से थे वे। उनके द्वारा ही डाली गई नींव पर कायदे आज़म ने इमारत बना कर पूरी की।”

सर सैयद अहमद खान से लेकर वीर सावरकर तक सोशल मीडिया के नायक

आजकल सोशल मीडिया पर वीर सावरकर को अंग्रेजों का करीबी बताकर हर तरह से उनकी छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जाता है। लेकिन क्या वही लोग ये सच्चाई सुन पाने में समर्थ हैं कि 1857 की क्रान्ति के समय सैयद अहमद खान की क्या भूमिका थी? खान बहादुर के नाम से मशहूर सैयद अहमद समय के साथ ‘सर’ होते गए। दूसरे मजहब के प्रति ब्रिटिश आक्रोश को कम करने और ब्रिटिश सरकार व समुदाय विशेष के बीच सहयोग का पुल बनाने के लिए उन्होंने योजनाबद्ध प्रयास आरंभ किया।

ब्रिटिश आक्रोश को कम करने के लिए सैयद अहमद खान ने वर्ष 1858 में ‘रिसाला अस बाब-ए-बगावत ए हिंद’ (भारतीय विद्रोह की कारण मीमांसा) शीर्षक पुस्तिका लिखी, जिसमें उन्होंने प्रमाणित करने की कोशिश की कि इस क्रांति के लिए मुसलामन नहीं, बल्कि हिंदू जिम्मेदार थे।

सैयद अहमद खान का ‘सर’ से न्यायाधीश तक का सफर

उनकी वफादारी से खुश होकर ही ब्रिटिश हुकूमत ने उन्हें वर्ष 1898 में नाइटहुड भी दी। ब्रिटिशर्स का विश्वास जीतकर सैयद अहमद खान वर्ष 1867 में एक न्यायालय के न्यायाधीश भी बने और वर्ष 1876 में सेवानिवृत्त हुए। अप्रैल, 1869 में सैयद अहमद खान अपने बेटे के साथ इंग्लैंड गए, जहाँ 6 अगस्त को उन्हें ‘ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ इंडिया’ से सम्मानित किया गया। वर्ष 1887 में उन्हें लॉर्ड डफरिन द्वारा सिविल सेवा आयोग के सदस्य के रूप में भी नामित किया गया। इसके अगले वर्ष उन्होंने अंग्रेजों के साथ राजनीतिक सहयोग को बढ़ावा देने और अंग्रेजी शासन में मुस्लिम भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अलीगढ़ में ‘संयुक्त देशभक्त संघ’ की स्थापना की।

‘मुस्लिम का दैवीय कर्तव्य है कि वे कॉन्ग्रेस से दूर रहें’

वर्ष 1885 में जब भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस की स्थापना के साथ देश औपनिवेशिक सरकार के बहिष्कार के लिए एकजुट हो रहा था, तब उन्होंने हिंदू बनाम मुस्लिम, हिंदी बनाम उर्दू, संस्कृत बनाम फारसी का मुद्दा उठाकर मुस्लिमों की मजहबी भावनाओं का दोहन किया और अपनी जहरीली विचारधारा के विष को खूब भुनाया था। उन्होंने यह विचार स्थापित किया कि मुस्लिम का दैवीय कर्तव्य है कि वे कॉन्ग्रेस से दूर रहें। इसके लिए उन्होंने ईसाईयों को इस्लाम का सबसे करीबी मित्र तक साबित करने के प्रयास किए थे।

अपने इस अभियान में वह काफी हद तक सफल भी हुए। स्वतन्त्रता आंदोलन में समय के साथ देश के बहुत कम मुस्लिम ही महात्मा गाँधी के अखंड भारत के सिद्धांत के साथ खड़े नजर आए। शेष मुस्लिम समाज की सहानुभूति पाकिस्तान के साथ होती गई, जिसके लिए बेशक सैयद अहमद खान की विषाक्त विचारधारा ही जिम्मेदार थी।

मेरठ में दिया गया ‘ऐतिहासिक सेक्युलर’ भाषण

मार्च 14, 1888 को मेरठ में दिए गए सैयद अहमद खान के भाषण ने भारत में मजहब आधारित विभाजन के वैचारिक दर्शन का शिलान्यास कर दिया था। उनका यह भाषण बेहद भड़काऊ था। इसमें वे हिंदुओं और मुस्लिमों को दो राष्ट्र (कौम) मानने लगे थे। उन्होंने यह बहस छेड़ दी थी कि अंग्रेज़ों के जाने के बाद सत्ता किसके हाथ में आएगी और उनका दृढ़ विश्वास था कि हिंदू-मुस्लिम मिलकर इस देश पर शासन नहीं कर सकते।

अलगाववाद के पिता सैयद अहमद को लगता था कि केवल गृहयुद्ध से ही इसका फैसला हो सकता है। विभाजन के समय हुए भीषण रक्तपात और नरसंहार की नींव सर सैयद बहुत पहले ही रख चुके थे। उन्होंने मुस्लिम हितों का स्वतंत्र और अलग तरीके से विचार करना शुरू किया। इस तरह हिंदुओं और मुस्लिमों में एक भेद निर्माण किया जिसका नतीजा इतिहास तो भुगत ही चुका है लेकिन वर्तमान और भविष्य भी इससे प्रभावित होते रहेंगे। उनका सिद्धांत द्विराष्ट्र से भी ज्यादा भयानक था क्योंकि वो चाहते थे कि एक देश दूसरे को जीतकर अपनी सत्ता विकसित करे।

वर्ष 1888 को मेरठ में दिए अपने भाषण (Allahabad: The Pioneer Press, 1888 में प्रकाशित) में उन्होंने कहा था- “सबसे पहला सवाल यह है कि इस देश की सत्ता किसके हाथ में आने वाली है? मान लीजिए, अंग्रेज अपनी सेना, तोपें, हथियार और बाकी सब लेकर देश छोड़कर चले गए तो इस देश का शासक कौन होगा? उस स्थिति में यह संभव है क्या कि हिंदू और मुस्लिम कौमें एक ही सिंहासन पर बैठें? निश्चित ही नहीं। उसके लिए ज़रूरी होगा कि दोनों एक दूसरे को जीतें, एक दूसरे को हराएँ। दोनों सत्ता में समान भागीदार बनेंगे, यह सिद्धांत व्यवहार में नहीं लाया जा सकेगा।”

हिंदुओं के खिलाफ सशस्त्र जिहाद की घोषणा

उन्होंने आगे कहा- “इसी समय आपको इस बात पर ध्यान में देना चाहिए कि मुस्लिम हिंदुओं से कम भले हों मगर वे दुर्बल हैं, ऐसा मत समझिए। उनमें अपने स्थान को टिकाए रखने का सामर्थ्य है। लेकिन समझिए कि नहीं है तो हमारे पठान बंधू पर्वतों और पहाड़ों से निकलकर सरहद से लेकर बंगाल तक खून की नदियाँ बहा देंगे। अंग्रेज़ों के जाने के बाद यहाँ कौन विजयी होगा, यह अल्लाह की इच्छा पर निर्भर है। लेकिन जब तक एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र को जीतकर आज्ञाकारी नहीं बनाएगा तब तक इस देश में शांति स्थापित नहीं हो सकती।”

‘अल्लाह ने अंग्रेज़ों को हमारे शासक के रूप में नियुक्त किया हुआ है’

फिर समुदाय विशेष के कट्टरपंथियों को भड़काते हुए उन्होंने कहा-

“जैसे अंग्रेज़ों ने यह देश जीता वैसे ही हमने भी इसे अपने अधीन रखकर गुलाम बनाया हुआ था। वैसा ही अंग्रेज़ों ने हमारे बारे में किया हुआ है। …अल्लाह ने अंग्रेज़ों को हमारे शासक के रूप में नियुक्त किया हुआ है। …उनके राज्य को मज़बूत बनाने के लिए जो करना आवश्यक है उसे ईमानदारी से कीजिए। …आप यह समझ सकते हैं मगर जिन्होंने इस देश पर कभी शासन किया ही नहीं, जिन्होंने कोई विजय हासिल की ही नहीं, उन्हें (हिंदुओं को) यह बात समझ में नहीं आएगी। मैं आपको याद दिलाना चाहता हूँ कि आपने बहुत से देशों पर राज्य किया है। आपको पता है राज कैसे किया जाता है। आपने 700 साल भारत पर राज किया है। अनेक सदियाँ कई देशों को अपने आधीन रखा है। मैं आगे कहना चाहता हूँ कि भविष्य में भी हमें किताबी लोगों की शासित प्रजा बनने के बजाय (अनेकेश्वरवादी) हिंदुओं की प्रजा नहीं बनना है।”

भारत ने अपने बुरे और अच्छे के प्रतीकों का बंटवारा आजादी के समय कर लिया था। फिर भी कुछ महान भूलें विचारधारा के इस महान विभाजन के साथ न्याय नहीं कर सकीं। भाजपा सरकार के दौरान इतिहास लगातार चर्चा का विषय रहा है, यह आवश्यक भी है। क्योंकि जब जब सावरकर के वीर होने या न होने पर बहस होगी, तब तब सर सैयद अहमद खान आकर बताएँगे कि वीर कौन हो सकता है।

किसी भी चर्चा से ऊपर सबसे दुखद पहलू यह भी है कि मुस्लिम समाज में सर सैयद अहमद खान जैसे बहुत ही कम लोग, भले ही बहुत देर से शिक्षा और पुनर्जागरण के नाम पर जाने गए, लेकिन वह भी कट्टर और मज़हबी जिहाद की हर सम्भव योजना पर यकीन करते रहे।

सर सैय्यद अहमद खान भारत के महानतम मुस्लिम सुधारकों में से एक माने गए हैं और उन्होंने भी मजहबी और सांप्रदायिक उद्देश्यों की ही वकालत की। सदियों की कट्टरता, जुर्म और बर्बरता के इतिहास के बाद मुस्लिम समाज को एक ऐसा चेहरा मिला था, जो उनकी शिक्षा और सामाजिक हितों की वकालत चुन सकता था, लेकिन दुर्भाग्य यह रहा कि उसके जीवन का दर्शन भी कट्टरता तक सीमित हो गया।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

आशीष नौटियाल
पहाड़ी By Birth, PUN-डित By choice

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

दीप्रिंट वालो! ‘लव जिहाद’ हिन्दू राष्ट्र का आधार नहीं, हिन्दू बच्चियों को धोखेबाज मुस्लिमों से बचाने का प्रयास है

लव जिहाद कोई काल्पनिक राक्षस नहीं है। ये वीभत्स हकीकत है। मेरठ में हुआ प्रिया का केस शायद जैनब ने पढ़ा ही नहीं या निकिता के साथ जो तौसीफ ने किया उससे वो आजतक अंजान हैं।

UP कैबिनेट में पास हुआ ‘लव जिहाद अध्यादेश’: अब नाम छिपाकर शादी करने पर मिलेगी 10 साल की सजा

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 'लव जिहाद' को लेकर एक बड़े फैसले में अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। 'लव जिहाद' के लगातार सामने आ रहे मामलों को देखते हुए यूपी कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया।

नड्डा 100 दिन के दौरे पर, गाँधी परिवार छुट्टी पर: बाद में मत रोना कि EVM हैक हो गया…

कोरोना काल में भाजपा के अधिकतर कार्यकर्ताओं को सेवा कार्य में लगाया गया था। अब संगठन मजबूत किया जा रहा। गाँधी परिवार आराम फरमा रहा, रिसॉर्ट्स में।

43 चायनीज Apps को किया गया बैन: चीन पर चोट, कुल 267 पर चला डिप्लोमैटिक डंडा

भारत सरकार ने 43 मोबाइल ऐप्स पर पाबंदी लगा दी है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के तहत सरकार ने 43 मोबाइल ऐप पर...

अर्णब की गिरफ्तारी से पहले अन्वय नाइक मामला: क्यों उठते हैं माँ-बेटी की मंशा पर सवाल? कब-कब क्या हुआ, जानिए सब कुछ

ऑपइंडिया ने इस मामले में दोनों पक्षों के बीच साझा किए गए पत्रों को एक्सेस किया और यह जाना कि यह मामला उतना सुलझा नहीं है जितना लग रहा है। पढ़िए क्या है पूरा मामला?

वैक्सीन को लेकर जल्द शुरू होगा बड़ा टीकाकरण अभियान, प्रखंड स्तर तक पर भी टास्क फोर्स का हो गठन: PM मोदी

पीएम मोदी ने बताया कि देश में इतना बड़ा टीकाकरण अभियान ठीक से हो, सिस्टेमेटिक और सही प्रकार से चलने वाला हो, ये केंद्र और राज्य सरकार सभी की जिम्मेदारी है।

प्रचलित ख़बरें

‘मेरे पास वकील रखने के लिए रुपए नहीं हैं’: सुप्रीम कोर्ट में पूर्व सैन्य अधिकारी की पत्नी से हरीश साल्वे ने कहा- ‘मैं हूँ...

साल्वे ने अर्णब गोस्वामी का केस लड़ने के लिए रिपब्लिक न्यूज नेटवर्क से 1 रुपया भी नहीं लिया। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में उन्होंने कुलभूषण जाधव का केस भी मात्र 1 रुपए में लड़ा था।

बहन से छेड़खानी करता था ड्राइवर मुश्ताक, भाई गोलू और गुड्डू ने कुल्हाड़ी से काट डाला: खुद को किया पुलिस के हवाले

गोलू और गुड्डू शाम के वक्त मुश्ताक के घर पहुँच गए। दोनों ने मुश्ताक को उसके घर से घसीट कर बाहर निकाला और जम कर पीटा, फिर उन्होंने...

रहीम ने अर्जुन बनकर हिंदू विधवा से बनाए 5 दिन शारीरिक संबंध, बाद में कहा- ‘इस्लाम कबूलो तब करूँगा शादी’

जब शादी की कोई बात किए बिना अर्जुन (रहीम) महिला के घर से जाने लगा तो पीड़िता ने दबाव बनाया। इसके बाद रहीम ने अपनी सच्चाई बता...

इतिहास में गुम हैं मुगलों को 17 बार हराने वाले अहोम योद्धा: देश भूल गया ब्रह्मपुत्र के इन बेटों को

राजपूतों और मराठों की तरह कोई और भी था, जिसने मुगलों को न सिर्फ़ नाकों चने चबवाए बल्कि उन्हें खदेड़ कर भगाया। असम के उन योद्धाओं को राष्ट्रीय पहचान नहीं मिल पाई, जिन्होंने जलयुद्ध का ऐसा नमूना पेश किया कि औरंगज़ेब तक हिल उठा। आइए, चलते हैं पूर्व में।

कंगना को मुँह तोड़ने की धमकी देने वाले शिवसेना MLA के 10 ठिकानों पर ED की छापेमारी: वित्तीय अनियमितता का आरोप

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक के आवास और दफ्तर पर छापेमारी की। यह छापेमारी सरनाईक के मुंबई और ठाणे के 10 ठिकानों पर की गई।

‘मुस्लिमों ने छठ में व्रती महिलाओं का कपड़े बदलते वीडियो बनाया, घाट पर मल-मूत्र त्यागा, सब तोड़ डाला’ – कटिहार की घटना

बिहार का कटिहार मुस्लिम बहुत सीमांचल का हिस्सा है, जिसकी सीमाएँ पश्चिम बंगाल से लगती हैं। वहाँ के छठ घाट को तहस-नहस कर दिया गया।
- विज्ञापन -

‘दिल्ली दंगे में उमर खालिद, शरजील इमाम और फैजान के खिलाफ पर्याप्त सबूत’: कोर्ट में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल

दिल्ली की अदालत ने दिल्ली पुलिस के उत्तर पूर्वी दिल्ली हिंसा मामले में नए सप्लीमेंट्री चार्जशीट को स्वीकार करते हुए कहा कि आरोपित उमर खालिद, शरजील इमाम और फैजान खान के खिलाफ यूएपीए के प्रावधानों के तहत अपराध करने के पर्याप्त सबूत हैं।

दीप्रिंट वालो! ‘लव जिहाद’ हिन्दू राष्ट्र का आधार नहीं, हिन्दू बच्चियों को धोखेबाज मुस्लिमों से बचाने का प्रयास है

लव जिहाद कोई काल्पनिक राक्षस नहीं है। ये वीभत्स हकीकत है। मेरठ में हुआ प्रिया का केस शायद जैनब ने पढ़ा ही नहीं या निकिता के साथ जो तौसीफ ने किया उससे वो आजतक अंजान हैं।

UP कैबिनेट में पास हुआ ‘लव जिहाद अध्यादेश’: अब नाम छिपाकर शादी करने पर मिलेगी 10 साल की सजा

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 'लव जिहाद' को लेकर एक बड़े फैसले में अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। 'लव जिहाद' के लगातार सामने आ रहे मामलों को देखते हुए यूपी कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कंगना और रंगोली की गिरफ्तारी पर लगाई रोक, जस्टिस शिंदे ने मुंबई पुलिस को फटकारा

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने अभिनेत्री कंगना रनौत और उनकी बहन रंगोली चंदेल को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दे दी है, लेकिन राजद्रोह के मामले में दोनों को 8 जनवरी को मुंबई पुलिस के सामने पेश होना होगा।

नड्डा 100 दिन के दौरे पर, गाँधी परिवार छुट्टी पर: बाद में मत रोना कि EVM हैक हो गया…

कोरोना काल में भाजपा के अधिकतर कार्यकर्ताओं को सेवा कार्य में लगाया गया था। अब संगठन मजबूत किया जा रहा। गाँधी परिवार आराम फरमा रहा, रिसॉर्ट्स में।

43 चायनीज Apps को किया गया बैन: चीन पर चोट, कुल 267 पर चला डिप्लोमैटिक डंडा

भारत सरकार ने 43 मोबाइल ऐप्स पर पाबंदी लगा दी है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के तहत सरकार ने 43 मोबाइल ऐप पर...

अर्णब की गिरफ्तारी से पहले अन्वय नाइक मामला: क्यों उठते हैं माँ-बेटी की मंशा पर सवाल? कब-कब क्या हुआ, जानिए सब कुछ

ऑपइंडिया ने इस मामले में दोनों पक्षों के बीच साझा किए गए पत्रों को एक्सेस किया और यह जाना कि यह मामला उतना सुलझा नहीं है जितना लग रहा है। पढ़िए क्या है पूरा मामला?

शाहिद जेल से बाहर आते ही ’15 साल’ की लड़की को फिर से ले भागा, अलग-अलग धर्म के कारण मामला संवेदनशील

उम्र पर तकनीकी झोल के कारण न तो फिर से पाक्सो एक्ट की धाराएँ लगाई गईं और न ही अभी तक शाहिद या भगाई गई लड़की का ही कुछ पता चला...

वैक्सीन को लेकर जल्द शुरू होगा बड़ा टीकाकरण अभियान, प्रखंड स्तर तक पर भी टास्क फोर्स का हो गठन: PM मोदी

पीएम मोदी ने बताया कि देश में इतना बड़ा टीकाकरण अभियान ठीक से हो, सिस्टेमेटिक और सही प्रकार से चलने वाला हो, ये केंद्र और राज्य सरकार सभी की जिम्मेदारी है।

कंगना को मुँह तोड़ने की धमकी देने वाले शिवसेना MLA के 10 ठिकानों पर ED की छापेमारी: वित्तीय अनियमितता का आरोप

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक के आवास और दफ्तर पर छापेमारी की। यह छापेमारी सरनाईक के मुंबई और ठाणे के 10 ठिकानों पर की गई।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,361FollowersFollow
357,000SubscribersSubscribe