Friday, July 10, 2020
Home विविध विषय भारत की बात शिवाजी की तलवार का इंग्लैंड कनेक्शन: सिर्फ 2000 सैनिकों से साम्राज्य खड़ा करने की...

शिवाजी की तलवार का इंग्लैंड कनेक्शन: सिर्फ 2000 सैनिकों से साम्राज्य खड़ा करने की कहानी

जब शिवाजी महाराज ने बतौर शासक अपना जीवन शुरू किया, तब उनके पिता ने उनके लिए सिर्फ़ 2000 सैनिक छोड़े थे। उन्होंने इस संख्या को बढ़ाकर 10,000 कर डाला। वे कभी अपने सैनिकों को शहीद होने के लिए नहीं उकसाते थे। बल्कि...

ये भी पढ़ें

निडर, पराक्रमी, कुशल, प्रबुद्ध, न्यायप्रिय कुछ ऐसे विशेषण हैं जिनका सीधा पर्याय आज भी बच्चे-बच्चे के लिए सिर्फ़ छत्रपति शिवाजी महाराज हैं। आज शिवाजी महाराज की जयन्ती के अवसर पर उनके साहस की गाथाओं को पूरा देश याद कर रहा है। महाराष्ट्र सरकार के मुताबिक सन् 1630 में 19 फरवरी को ही छत्रपति शिवाजी का जन्म शिवनेर दुर्ग में हुआ था। कई कलाओं में माहिर छत्रपति शिवाजी ने एक कुशल राजा बनने की दिशा में राजनीति एवं युद्ध की शिक्षा ली थी। उन्होंने अपने जीवन में कई ऐसे कारनामे किए थे, जिन्हें सुनकर ही पता लगता है कि रणभूमि में तो क्या आम जीवन में भी कभी उन्होंने अपने आदर्शों से समझौता नहीं किया। उनमें एक शेर का व्यक्तित्व बचपन से झलकता था।

बाल्यावस्था- जिस अवस्था में बच्चे अपने माँ-बाप के दिखाए रास्ते पर समाज में उठना बैठना-अभिवादन करने के तौर तरीके सीख रहे होते हैं, उस बाल्यावस्था में शिवाजी से जुड़ा एक किस्सा बहुत मशहूर है। कहा जाता है कि शिवाजी के पिता शाहजी अक्सर युद्ध लड़ने के लिए घर से दूर रहते थे। इसलिए उन्हें शिवाजी के निडर और पराक्रमी होने का आभास नहीं था। इसी अनभिज्ञता के साथ एक बार वे शिवाजी को बीजापुर के सुल्तान के दरबार में ले गए।

Image result for शिवाजी

वहाँ शाहजी ने तीन बार झुक कर सुल्तान को सलाम किया और शिवाजी से भी ऐसा ही करने को कहा। लेकिन, शिवाजी अपने पिता को देखने के बावजूद अपना सिर ऊपर उठाए सीधे खड़े रहे और उसी सिर को उठाए-उठाए वो वापस अपने दरबार में चले गए। इस घटना के दौरान ऐसा नहीं था कि शिवाजी अपने पिता की बात का अनादर कर रहे थे। बल्कि उन्हें तो केवल एक विदेशी शासक के सामने सिर झुकाना नागवार था। इस वाकये को देखने के बाद शाहजी को भी अंदाजा हो गया था कि उनका बालक अन्य बालकों की तरह एक तय लीक पर चलने वाला बच्चा नहीं है।

छत्रपति शिवाजी की कुशलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब उन्होंने बतौर शासक अपना जीवन शुरू किया, तब उनके पिता ने उनके लिए सिर्फ़ 2000 सैनिक छोड़े थे। लेकिन, कुछ ही समय में उन्होंने इस संख्या को बढ़ाकर 10,000 कर डाला। उन्हें मालूम था कि एक राजा के लिए उसकी सेना कितनी महत्वपूर्ण होती है। वे कभी अपने सैनिकों को शहीद होने के लिए नहीं उकसाते थे। बल्कि उनकी तो अपनी सेना को सलाह होती थी कि हमेशा संगठित होकर सुरक्षित कदम उठाना चाहिए। जिससे सामने वाला परास्त भी हो जाए और खुद पर आँच भी न आए।

Image result for शिवाजी और उनकी प्रजा

स्वराज का झंडा बुलंद कर इतिहास में मराठाओं के नाम एक पूरा युग स्वर्णिम अक्षरों से लिखवाने वाले शिवाजी महाराज अन्य राजाओं की तरह अपनी सेना को निजी हथियार देकर नहीं रखा करते थे। उन्हें जितना ख्याल अपनी सेना का था, उससे ज्यादा सजग वे अपनी प्रजा के प्रति थे। उनका सोचना था कि सेना को निजी हथियार नहीं दिए जाएँगे, तो बेवजह आम प्रजा को नुकसान नहीं पहुँचेगा। उनका कहना था कि दुश्मन राज से लूटा गया सारा सामान मराठा खजाने में जमा होगा। उनके निर्देश थे, कभी किसी धार्मिक स्थल और उससे जुड़ी सामग्री को कभी नुकसान नहीं पहुँचाया जाएगा।

छत्रपति शिवाजी बचपन से न्यायप्रिय, धर्मनिरपेक्ष और दयालु थे। बताया जाता है मात्र 14 साल की उम्र से वे ऐसे फैसले लिया करते थे कि बच्चे से लेकर बुजुर्ग व्यक्ति तक उनकी छत्रछाया में खुद को सुरक्षित महसूस करते थे। उन्हें लेकर किस्सा मशहूर है कि एक बार शिवाजी के समक्ष उनके सैनिक किसी गाँव के मुखिया को पकड़ कर लाए। मुखिया बड़ी और घनी-घनी मूछों वाला बड़ा ही रसूखदार व्यक्ति था। लेकिन इस बार उस पर एक विधवा की इज्जत लूटने का आरोप साबित हो चुका था। हालाँकि, इस वाकये के दौरान शिवाजी मात्र 14 साल के थे। मगर उनके मन में महिलाओं के प्रति असीम सम्मान था। उन्होंने तत्काल अपना निर्णय सुनाया और कहा- “इसके दोनों हाथ और पैर काट दो” ऐसे जघन्य अपराध के लिए इससे कम कोई सजा नहीं हो सकती। क्या आज किसी 14 साल के बच्चे से ऐसे विवेक और बुद्धि की अपेक्षा की जा सकती है? शिवाजी के राज में महिलाओं को बंदी बनाने की अनुमति नहीं थी और जो महिलाओं का अपमान करता था उसके लिए मुखिया की तरह कड़ा दंड तय था।

Image result for शिवाजी

हिंदू हृदय सम्राट कहे जाने वाले महाराज शिवाजी को इतिहास के पन्नों में धर्मनिरपेक्ष शासक कहा जाता है। लेकिन फिर भी उनके बारे में ये तथ्य मशहूर है कि महाराश शिवाजी हमेशा उन लोगों की मदद करते थे, जो हिंदू धर्म अपनाने के इच्छुक होते थे। यहाँ तक उन्होंने अपनी बेटी की शादी भी एक ऐसे शख्स से करवाई थी, जिसने हिंदू धर्म अपनाया। वे मुगल शासकों से युद्ध केवल हिंदुत्व की रक्षा करने के लिए करते थे। उन्होंने कभी मुस्लिमों से नफरत नहीं की। लेकिन जब बात हिंदुत्व पर आई तो उन्होंने किसी से समझौता भी नहीं किया। उनकी सेना में कई मुसलमान सैनिक थे।

आदिल शाह और औरंगजेब से जुड़ा किस्सा

शिवाजी की पैतृक जायदाद बीजापुर के सुल्तान द्वारा शासित दक्कन में थी। बीजापुर के सुल्तान आदिल शाह ने बहुत से दुर्गों से अपनी सेना हटाकर उन्हें स्थानीय शासकों के हाथों सौंप दिया था। 16 वर्ष की आयु तक पहुँचते-पहुँचते शिवाजी को यकीन हो गया था कि हिन्दुओं की मुक्ति के लिए उन्हें संघर्ष करना होगा। शिवाजी ने अपने विश्वासपात्रों को इकट्ठा कर अपनी ताकत बढ़ानी शुरू कर दी। जब आदिलशाह बीमार पड़ा तो बीजापुर में अराजकता फैल गई। शिवाजी ने इस मौके लाभ उठाकर बीजापुर में प्रवेश करने का फैसला लिया। छोटी सी उम्र में ही उन्होंने टोरना किले का कब्जा हासिल कर लिया था।

1659 में आदिलशाह ने अपने सेनापति को शिवाजी को मारने के लिए भेजा। दोनों के बीच प्रतापगढ़ किले पर युद्ध हुआ। इस युद्ध में शिवाजी की विजय हुई। उनकी बढ़ती ताकत को भाँपते हुए मुगल सम्राट औरंगजेब ने जय सिंह और दिलीप खान को शिवाजी को रोकने के लिए भेजा और उनसे एक समझौते पर हस्ताक्षर करने को कहा। समझौते के मुताबिक उन्हें मुगल शासक को 24 किले देने थे। यहाँ बता दें कि कोंढाणा का किला भी इन्हीं किलों में से एक था, जिसकी टीस में सिंहगढ़ का युद्ध शिवाजी की ओर से उनके सेनापति तानाजी ने लड़ा।

Image result for शिवाजी

इस 24 किलों वाले समझौते के बाद शिवाजी एक बार आगरा के दरबार में औरंगज़ेब से मिलने के लिए गए। वह 9 मई, 1666 को अपने पुत्र संभाजी एवं 4000 मराठा सैनिकों के साथ मुग़ल दरबार में उपस्थित हुए, परन्तु औरंगज़ेब ने उन्हें वहाँ उचित सम्मान न दिया। जिस पर शिवाजी ने भरे हुए दरबार में औरंगज़ेब को विश्वासघाती कह डाला। इसके बाद औरंगजेब ने उन्हें एवं उनके पुत्र को ‘जयपुर भवन’ में क़ैद कर दिया। लेकिन 13 अगस्त, 1666 को फलों की टोकरी में छिपकर शिवाजी वहाँ से भाग निकले और रायगढ़ पहुँचे। सन 1674 तक शिवाजी ने उन सारे प्रदेशों पर अधिकार कर लिया था, जो पुरन्दर की संधि के अन्तर्गत उन्हें मुग़लों को देने पड़े थे।

देखते ही देखते उन्होंने मराठाओं की एक विशाल सेना तैयार कर ली थी। जो स्वराज्य के लिए जान देने को तैयार थे। उन्हीं के शासन काल में गुरिल्ला युद्ध के प्रयोग का भी प्रचलन शुरू हुआ। उन्होंने नौसेना भी तैयार की थी। अप्रैल 1680 को बीमार होने पर उनकी मृत्यु हो गई थी।

Image result for शिवाजी

आज उनकी हर तस्वीर में उनके हाथ में उनकी तलवार देखने को मिलती है। कहा जाता है कि उनकी तलवार पर 10 हीरे जड़े हुए थे। जो इस वक्त लंदन में हैं। शिवाजी महाराज की तलवार प्रिंस ऑफ वेल्स एडवर्ड सप्तम को नवंबर 1875 में उनकी भारत यात्रा के दौरान कोल्हापुर के महाराज ने उपहार स्वरूप भेंट की थी। लेकिन कभी भी इस तलवार को वापस लाने के कोशिश नहीं की गई।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ख़ास ख़बरें

एनकाउंटर में मारा गया गैंगस्टर विकास दुबे: STF की गाड़ी पलटने के बाद दुबे ने की थी पिस्टल छीनकर भागने की कोशिश, देखें वीडियो

गाड़ी पलटने के बाद विकास दुबे ने घायल यूपी एसटीएफ के पुलिसकर्मियों की पिस्टल छीन कर भागने की कोशिश की। जवाबी फायरिंग में गोली लगने से बुरी तरह घायल विकास दुबे की मौत हो गई।

MLA कृष्णा पूनिया को जेड सिक्योरिटी: खाकी को दबाने का आरोप, अब 2 SI सहित 35 पुलिसकर्मी करेंगे सुरक्षा

राजस्थान के सबसे जांबाज पुलिसकर्मी विष्णुदत्त विश्नोई के सुसाइड को लेकर आरोपों में घिरीं कृष्णा पूनिया को गहलोत सरकार ने जेड सिक्योरिटी प्रदान की है।

गुजरात ने दिखाई आत्मनिर्भर भारत की राह: अजंता घड़ी वाला मोरबी चीनी टॉय मार्केट की लेगा जगह

मोरबी सेरेमिक टाइल्स का हब है। अब यहॉं की फर्मों ने बाजार में चीनी खिलौनों की जगह लेने का बीड़ा उठाया है।

जिस्म दो, मजदूरी लो: आज तक ने चित्रकूट की खदानों में यौन शोषण की रिपोर्ट के नाम पर किया गुमराह?

आज तक का दावा था कि चित्रकूट के खदानों में नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण हो रहा है। 'पीड़िता' ने कहा है कि उसे सवाल ही समझ में नहीं आए थे।

सीएम की सुपारी लेने वाला श्रीप्रकाश शुक्ला, पुलिसकर्मियों को मारने वाला विकास दुबे: यूपी के क्रिमिनल कैसे-कैसे

विकास दुबे और श्रीप्रकाश शुक्ला दोनों ही अपराधियों में कई बातें एक जैसी हैं, दोनों के जीवन का शुरूआती जीवन हो या अंत, एनकाउंटर के अलावा ऐसी तमाम बातें हैं जब दोनों एक जैसे ही नज़र आते हैं।

प्रिय राजदीप, पप्पू का नाम सुना है, वो नेपाल भाग गया था, जानते हो उसके साथ क्या हुआ?

विकास दुबे पर कॉन्स्पिरेसी थ्योरी के सरताजों को पप्पू देव के बारे में जानना चाहिए, क्योंकि उनके सूत्र भी उनकी तरह का ही चश्मा पहनते हैं।

प्रचलित ख़बरें

क्या है सुकन्या देवी रेप केस जिसमें राहुल गाँधी थे आरोपित, कोर्ट ने कर दिया था खारिज

राजीव गाँधी फाउंडेशन पर जाँच को लेकर कल एक टीवी डिबेट में बीजेपी के संबित पात्रा और कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता गौरव बल्लभ के बीच बहस आगे बढ़ते-बढ़ते एक पुराने रेप के मामले पर अटक गई जिसमें राहुल गाँधी को आरोपित बनाया गया था।

शोएब अख्तर के ओवर में काँपते थे सचिन, अफरीदी ने बिना रिकॉर्ड देखे किया दावा

सचिन ने ऐसे 19 मैच खेले, जिसमें शोएब पाकिस्तानी टीम का हिस्सा थे। इसमें सचिन ने 90.18 के स्ट्राइक और 45.47 की औसत से 864 रन बनाए।

‘गुप्त सूत्रों’ से विकास दुबे का एनकाउंटर: राजदीप खोजी पत्रकारों के सरदार, गैंग की 2 चेली का भी कमाल

विकास दुबे जब फरार था, तभी 'खोजी बुद्धिजीवी' अपने काम में जुट गए। ऐसे पत्रकारों में प्रमुख नाम थे राजदीप सरदेसाई, स्वाति चतुर्वेदी और...

रवीश कुमार जैसे गैर-मुस्लिम, चाहे वो कितना भी हमारे पक्ष में बोलें, नरक ही जाएँगे: जाकिर नाइक

बकौल ज़ाकिर नाइक, रवीश कुमार हों या 'मुस्लिमों का पक्ष लेने वाले' अन्य नॉन-मुस्लिम... उन सभी के लिए नरक की सज़ा की ही व्यवस्था है।

हमने कंगना को मौका नहीं दिया होता तो? पूजा भट्ट ने कहा- हमने उतनों को लॉन्च किया, जितनों को पूरी इंडस्ट्री ने नहीं की

पूजा भट्ट ने दावा किया कि वो एक ऐसे 'परिवार' से आती हैं, जिसने उतने प्रतिभाशाली अभिनेताओं, संगीतकारों और टेक्नीशियनों को लॉन्च किया है, जितनों को पूरी फिल्म इंडस्ट्री ने मिल कर भी नहीं किया होगा।

बेटों ने अपनाया ईसाई धर्म तो पिता ने संपत्ति से बेदखल कर थाने में दर्ज कराया मुकदमा, कहा- नहीं देंगे फूटी कौड़ी

पिता का आरोप है कि भूसुर गाँव के एक व्यक्ति द्वारा हमारे बटों को प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। इसलिए हमने निर्णय लिया है कि यदि हमारे बेटे ने धर्म परिवर्तन किया तो उन्हें पैतृक संपत्ति से बेदखल कर दिया जाएगा।

एनकाउंटर में मारा गया गैंगस्टर विकास दुबे: STF की गाड़ी पलटने के बाद दुबे ने की थी पिस्टल छीनकर भागने की कोशिश, देखें वीडियो

गाड़ी पलटने के बाद विकास दुबे ने घायल यूपी एसटीएफ के पुलिसकर्मियों की पिस्टल छीन कर भागने की कोशिश की। जवाबी फायरिंग में गोली लगने से बुरी तरह घायल विकास दुबे की मौत हो गई।

Covid-19: भारत में 24 घंटे में सामने आए 24879 नए मामले, अब तक 21129 की मौत

भारत में कोरोना संक्रमण के अब तक 7,67,296 मामले सामने आ चुके हैं। बीते 24 घंटे में 24,879 नए मामले सामने आए हैं और 487 लोगों की मौत हुई है।

MLA कृष्णा पूनिया को जेड सिक्योरिटी: खाकी को दबाने का आरोप, अब 2 SI सहित 35 पुलिसकर्मी करेंगे सुरक्षा

राजस्थान के सबसे जांबाज पुलिसकर्मी विष्णुदत्त विश्नोई के सुसाइड को लेकर आरोपों में घिरीं कृष्णा पूनिया को गहलोत सरकार ने जेड सिक्योरिटी प्रदान की है।

गुजरात ने दिखाई आत्मनिर्भर भारत की राह: अजंता घड़ी वाला मोरबी चीनी टॉय मार्केट की लेगा जगह

मोरबी सेरेमिक टाइल्स का हब है। अब यहॉं की फर्मों ने बाजार में चीनी खिलौनों की जगह लेने का बीड़ा उठाया है।

जिस्म दो, मजदूरी लो: आज तक ने चित्रकूट की खदानों में यौन शोषण की रिपोर्ट के नाम पर किया गुमराह?

आज तक का दावा था कि चित्रकूट के खदानों में नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण हो रहा है। 'पीड़िता' ने कहा है कि उसे सवाल ही समझ में नहीं आए थे।

गैंगस्टर व‍िकास दुबे की पत्‍नी और बेटे को लखनऊ में एसटीएफ ने किया गिरफ्तार, नौकर को भी दौड़ाकर पकड़ा

गैंगस्टर विकास दुबे की आज सुबह उज्‍जैन में गिरफ़्तारी के बाद अब शाम को उसकी पत्‍नी और बेटे को भी एसटीएफ ने गिरफ्तार कर ल‍िया है।

पश्चिम बंगाल: भ्रष्टाचार पर ममता सरकार की पोल खोलने वाले पत्रकार शफीकुल इस्लाम समेत 3 गिरफ्तार

आरामबाग टीवी राज्य सरकार के निशाने पर पहले से था। क्योंकि, चैनल ने ममता बनर्जी सरकार द्वारा कई सभाओं को दिए डोनेशन पर सवाल उठाए थे।

कौन है मनोज यादव, सपा से क्या है रिश्ता: विकास दुबे की गिरफ्तारी के बाद उज्जैन से मिली यूपी नंबर वाली कार

विकास दुबे की गिरफ्तारी के बाद उज्जैन में यूपी नंबर की कार मिली जो मनोज यादव के नाम से रजिस्टर्ड है। उसका संबंध सपा से बताया जा रहा।

‘तेरी माँ रं*’: कैनी सेबेस्टियन की गालीबाजी पर फूटा गुस्सा, कॉमेडियन ने स्क्रीनशॉट को बताया फेक

कैनी सेबेस्टियन पर महिलाओं को लेकर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप है। हालॉंकि इससे जुड़े स्क्रीनशॉट को उसने फेक बताया है।

सीएम की सुपारी लेने वाला श्रीप्रकाश शुक्ला, पुलिसकर्मियों को मारने वाला विकास दुबे: यूपी के क्रिमिनल कैसे-कैसे

विकास दुबे और श्रीप्रकाश शुक्ला दोनों ही अपराधियों में कई बातें एक जैसी हैं, दोनों के जीवन का शुरूआती जीवन हो या अंत, एनकाउंटर के अलावा ऐसी तमाम बातें हैं जब दोनों एक जैसे ही नज़र आते हैं।

हमसे जुड़ें

237,080FansLike
63,322FollowersFollow
272,000SubscribersSubscribe