Thursday, December 3, 2020
Home विविध विषय धर्म और संस्कृति नवरात्रि: स्त्री शक्ति की सृजनशीलता; सत्व, तमस, रजस गुणों पर नियंत्रण का उत्सव

नवरात्रि: स्त्री शक्ति की सृजनशीलता; सत्व, तमस, रजस गुणों पर नियंत्रण का उत्सव

नवरात्रि का उत्सव ईश्वर के स्त्री रूप को समर्पित है। दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती स्त्री-शक्ति यानी स्त्रैण के तीन आयामों की प्रतीक हैं। वे धरती, सूर्य और चंद्रमा या तमस (जड़ता), रजस (सक्रियता या जोश) और सत्व (परे जाना, ज्ञान, शुद्धता) की प्रतीक हैं।

नवरात्रि अर्थात स्त्री शक्ति की सृजनशीलता का पर्व, पारम्परिक रूप से देवी की पूजा करने वाली संस्कृतियाँ इस बात से पूरी तरह अवगत थीं कि अस्तित्व में बहुत कुछ ऐसा है, जिसे कभी समझा नहीं जा सकता। आप उसका आनंद उठा सकते हैं, उसकी सुंदरता का उत्सव मना सकते हैं, मगर कभी उसे समझ नहीं सकते। कहा जाता है कि जीवन एक रहस्य है, ये रहस्य इसलिए भी है कि हमें परिणाम तो दिखता है लेकिन कारण लुप्त है। शायद जीवन हमेशा रहस्य ही रहे, जब तक हम खुद इस खोज के साधक न हो। सनातन सदैव धर्म और अध्यात्म की इसी सतत खोज की परम्परा का वाहक है।

या देवी सर्वभूतेषु…. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: … सनातन परम्परा जिनकी रगों में बहता है, ऐसे आदि गुणों के वाहक हिन्दुओं का नववर्ष विक्रम संवत 2076 चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा शनिवार 6 अप्रैल 2019 से वासंती नवरात्र के साथ शुरू हो चुका है। चैत्र नवरात्रि, चैत्र शुक्ल पक्ष प्रथमा से प्रारंभ और रामनवमी को इसका समापन होता है। इस वर्ष चैत्र नवरात्र, 6 अप्रैल से शुरू होकर समापन 14 अप्रैल को है। यह त्योहार हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बहुत लोकप्रिय है। महाराष्ट्र राज्य में यह “गुड़ी पड़वा” के साथ शुरू होती है, जबकि आंध्र प्रदेश जैसे दक्षिणी राज्यों में, यह उत्सव “उगादी” से शुरू होता है।

एक वर्ष में चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ महीनों में चार बार नवरात्र आते हैं, लेकिन चैत्र और आश्विन माह की शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक चलने वाले नवरात्र ही ज्यादा लोकप्रिय हैं। यह समय, आदि देवी माँ भगवती की आराधना और स्त्री शक्ति की सृजनशीलता का उत्सव मनाने के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। नवरात्र वह समय है, जब दोनों ऋतुओं का मिलन होता है। इस संधि काल मे ब्रह्मांड से असीम शक्तियाँ सतत ऊर्जा के रूप में मानवता का कल्याण करती हैं। बात करें धर्म ग्रंथों, पुराणों की तो उसमें चैत्र नवरात्र का समय सृजन और स्त्री शक्ति के उत्सव का समय है। इसका एक कारण यह भी है कि प्रकृति में इस समय हर तरफ नए जीवन और एक नई उम्मीद का बीज अंकुरित होने लगता है। ब्रह्माण्डीय ऊर्जा से जनमानस में भी एक नई उर्जा का संचार हो रहा होता है। लहलहाती फसलों से उम्मीदें जुड़ी होती हैं।

नवरात्रि क्या है? मनाने का सबसे अच्छा तरीका क्या है? क्यों है ये आदि सनातन परम्परा का वाहक? कुछ तो होगा इस उत्सव धर्मिता के पीछे का रहस्य? आइए इन सब पर बातें करते हैं। पहली बात सनातन परम्परा में जीवन का रहस्य यही है कि गंभीर न होते हुए भी पूरी तरह शामिल होना, जीवन के हर क्षण का उत्सव मनाना।

नवरात्रि का उत्सव ईश्वर के स्त्री रूप को समर्पित है। दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती स्त्री-शक्ति यानी स्त्रैण के तीन आयामों की प्रतीक हैं। वे धरती, सूर्य और चंद्रमा या तमस (जड़ता), रजस (सक्रियता या जोश) और सत्व (परे जाना, ज्ञान, शुद्धता) की प्रतीक हैं।

तमस का अर्थ है जड़ता। रजस का मतलब है सक्रियता और जोश। सत्व एक तरह से सीमाओं को तोडक़र विलीन होना है, पिघलकर समा जाना है। इन तीन खगोलीय पिंडों से हमारे शरीर की रचना का बहुत गहरा संबंध है- पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा। इन तीन गुणों को इन तीन पिंडों से भी जोड़ कर देखा जाता है। धरती माँ को तमस माना गया है, सूर्य रजस है और चंद्रमा सत्व। नवरात्रि के पहले तीन दिन तमस से जुड़े होते हैं। इसके बाद के दिन रजस से, और नवरात्रि के अंतिम दिन सत्व से जुड़े होते हैं।

जो लोग शक्ति, अमरता, क्षमता या सृजन की इच्छा रखते हैं, वे स्त्रैण के उन रूपों की आराधना करते हैं, जिन्हें तमस कहा जाता है, जैसे काली या धरती माँ अर्थात सृजन का आदिस्रोत प्रकृति। सद्गुरु कहते हैं, जो लोग धन-दौलत, जोश, उत्साह, जीवन और भौतिक दुनिया की तमाम दूसरी सौगातों की इच्छा करते हैं, वे स्वाभाविक रूप से स्त्रैण के उस रूप की ओर आकर्षित होते हैं, जिसे लक्ष्मी या सूर्य के रूप में जाना जाता है। जो लोग ज्ञान, बोध चाहते हैं और नश्वर शरीर की सीमाओं के पार जाना चाहते हैं, वे स्त्रैण के सत्व रूप की आराधना करते हैं। सरस्वती या चंद्रमा उस शक्ति के प्रतीक हैं।

तमस धरती की प्रकृति है जो सबको जन्म देने वाली है। हम जो समय गर्भ में बिताते हैं, वह समय तामसी प्रकृति का होता है। उस समय हम लगभग निष्क्रिय स्थिति में होते हुए भी विकसित हो रहे होते हैं। इसलिए तमस धरती और मनुष्यता के जन्म की प्रकृति है। हम सब सृजन के इस आयाम का अनुभव कर सकते हैं। हमारा पूरा जीवन इस पृथ्वी की देन है। सनातन में पृथ्वी के इस आयाम से एकाकार होने को महत्वपूर्ण साधना के रूप में विकसित किया गया है। वैसे भी हम सब पृथ्वी के एक अंश हैं। प्रकृति जब चाहती है, एक शरीर के रूप में अपने गर्भ में सृजन कर हमें नया जीवन दे देती है और जब वह चाहती है, उस शरीर को वापस खाक कर अपने भीतर समा लेती है।

सद्गुरु कहते हैं, नवरात्री के अवसर पर इन तीनों आयामों में आप खुद को जिस तरह से शामिल करेंगे, वह आपके जीवन को एक नई दिशा देगा। अगर आप खुद को तमस की ओर ले जाते हैं, तो आप एक तरीके से शक्तिशाली होंगे। अगर आप रजस पर ध्यान देते हैं, तो आप दूसरी तरह से शक्तिशाली होंगे। लेकिन अगर आप सत्व की ओर जाते हैं, तो आप बिल्कुल अलग रूप में शक्तिशाली होंगे। लेकिन यदि आप इन सब के परे चले जाते हैं, तो बात शक्ति की नहीं रह जाएगी, फिर आप मोक्ष की ओर बढ़ेंगे।

कहते हैं, जो पूर्ण जड़ता है, वह एक सक्रिय रजस बन सकता है। रजस पुन: जड़ता बन जाता है। यह परे भी जा सकता है और वापस उसी तमस की ओर भी जा सकता है। दुर्गा से लक्ष्मी, लक्ष्मी से दुर्गा, सरस्वती कभी नहीं हो पाई। इसका मतलब है कि हम जीवन और मृत्यु के चक्र में फँसे हैं। उनसे परे जाना अभी बाकी है।

यह सिर्फ प्रतीकात्मक ही नहीं है, बल्कि ऊर्जा के स्तर पर भी सत्य है। इंसान के रूप में में हम धरती से निकलते हैं और सक्रिय होते हैं। कुछ समय बाद, हम फिर से जड़ता की स्थिति में चले जाते हैं। सिर्फ व्यक्ति के रूप में हमारे साथ ऐसा नहीं होता, बल्कि तारामंडलों और पूरे ब्रह्मांड के साथ ऐसा हो रहा है। ब्रह्मांड जड़ता की स्थिति से निकल कर सक्रिय होता है और फिर जड़ता की अवस्था में चला जाता है। ध्यान रहे, बस हमारे अंदर इस चक्र को तोड़ने की क्षमता है। इंसान के जीवन और खुशहाली के लिए देवी के पहले दो आयामों की जरूरत होती है। तीसरा परे जाने की इच्छा है। कहते हैं, अगर आपको सरस्वती को अपने भीतर उतारना है, तो आपको प्रयास करना होगा। वरना आप उन तक कभी नहीं पहुँच सकते।

सनातन परम्परा में ही स्त्री शक्ति को सर्वाधिक महत्त्व हासिल है। स्त्री शक्ति की पूजा धरती पर पूजा का सबसे प्राचीन रूप है। स्त्री सृजन का पर्याय है। सिर्फ भारत में ही नहीं, अपितु यूरोप, अरेबिया और अफ्रीका के बड़े हिस्सों में भी कभी स्त्री शक्ति की पूजा होती थी। वहाँ देवियाँ होती थीं। दुर्भाग्यवश, पश्चिम में मूर्तिपूजा और एक से ज्यादा देवों की पूजा के सभी नामोनिशान मिटाने के लिए देवी मंदिरों को मिट्टी में मिला दिया गया। दुनिया के बाकी हिस्सों में भी यही हुआ।

धर्म न्यायालयों और धर्मयुद्धों का मुख्य मकसद मूर्ति पूजा की संस्कृति को मिटाना था। मूर्तिपूजा का मतलब देवी पूजा ही था। जो लोग देवी पूजा करते थे, उन्हें कुछ हद तक तंत्र-मंत्र विद्या में महारत हासिल थी। कामरूप कामाख्या मंदिर आज भी अपने तंत्र साधना के लिए ही विख्यात है। चूँकि, वे तंत्र-मंत्र जानते थे, इसलिए स्वाभाविक था कि आम लोग उनके तरीके समझ नहीं पाते थे। कहते हैं, उन संस्कृतियों में हमेशा से यह समझ थी कि अस्तित्व में ऐसा बहुत कुछ है, जिसे साधारण लोग आसानी से नहीं समझ सकते और इसमें कोई बुराई नहीं है। कोई भी उसे समझे बिना भी उसके लाभ उठा सकते हैं, जो हर किसी चीज के लिए हमेशा से सच रहा है।

मगर जब एकेश्वरवादी मज़हब यहुदी, इसाई और इस्लाम अपना दायरा फैलाने लगे, तो उन्होंने इसे एक संगठित तरीके से उखाड़ना शुरू कर दिया। उन्होंने सभी देवी मंदिरों को तोड़ कर मिट्टी में मिला दिया।

दुनिया में हर कहीं पूजा का सबसे बुनियादी रूप देवी पूजा या कहें स्त्री शक्ति की पूजा ही रही है। भारत इकलौती ऐसी संस्कृति है जिसने अब भी उसे संभाल कर रखा है। सनातन परम्परा ने स्त्री शक्ति की पूजा को जारी रखा है। इसी संस्कृति ने हमें अपनी जरूरतों के मुताबिक अपनी देवियाँ खुद गढ़ने की आजादी भी दी। प्राण प्रतिष्ठा के विज्ञान ने हर गाँव को अपनी विशिष्ट स्थानीय जरूरतों के अनुसार अपना मंदिर बनाने में समर्थ बनाया। अगम शास्त्र में इसकी पूरी विधि है। धर्म को ज़्यादा संजीदगी से सहेजा है तो वह भारत का दक्षिण का हिस्सा है। दक्षिण भारत के हर गाँव में आपको आज भी अम्मन (अम्मा) या देवी के मंदिर मिल जाएँगे। इसके अलावा शिव की नगरी काशी, विंध्याचल से लेकर शायद ही भारत का ऐसा कोई क्षेत्र हो जहाँ देवी आराध्य न हो।

बेशक, आजकल पुरुष शक्ति समाज में सिर्फ इसलिए महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि हमने अपने जीवन में गुजर-बसर की प्रक्रिया को सबसे अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। आज सौंदर्य या नृत्य-संगीत, प्रेम, दिव्यता या ध्यान की बजाय अर्थशास्त्र हमारे जीवन की प्रेरक शक्ति बन गया है। जब अर्थशास्त्र हावी हो जाता है और जीवन के गूढ़ तथा सूक्ष्म पहलुओं को अनदेखा कर दिया जाता है, तो पौरुष कुदरती तौर पर प्रभावी हो जाता है। अगर स्त्री शक्ति नष्ट हो गई, तो जीवन की सभी करुणामयी, सौम्य, सहज और पोषणकारी प्रवृत्तियाँ लुप्त हो जाएँगी। (हालाँकि, स्त्रीत्व को इन चार शब्दों में समेटा नहीं जा सकता।) जीवन की अग्नि हमेशा के लिए नष्ट हो जाएगी। यह बहुत बड़ा नुकसान है, जिसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा।

आज जब हम अपनी परम्परा और संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं तो ऐसे समय में उसके संरक्षण और संवहन की जिम्मेदारी उन सब पर है जिनकी रगों में आज भी सनातन संस्कृति बह रही है। आज जब हम आधुनिक वामपंथी शिक्षा की वजह से नकार की जड़ता के शिकार हो चुके हैं। इसी शिक्षा का एक दुर्भाग्यपूर्ण नतीजा यह भी है कि हम अपनी तर्कशक्ति पर खरा न उतरने वाली हर चीज को नष्ट कर देना चाहते हैं। जबकि हमारी तर्क की सीमा सनातन की सीमा नहीं बल्कि हमारी खुद के अज्ञान की सीमा है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

रवि अग्रहरि
अपने बारे में का बताएँ गुरु, बस बनारसी हूँ, इसी में महादेव की कृपा है! बाकी राजनीति, कला, इतिहास, संस्कृति, फ़िल्म, मनोविज्ञान से लेकर ज्ञान-विज्ञान की किसी भी नामचीन परम्परा का विशेषज्ञ नहीं हूँ!

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

एक ही परिवार के 3 भाइयों का शव बरामद, आँखें निकली हुईं: हत्या का आरोप लगा परिजनों ने मिर्जापुर में किया चक्का जाम

पुलिस अधीक्षक का कहना है कि लेहड़िया बंधी के पानी में तीन लड़कों का शव बरामद हुआ है। हत्या की आशंका जताई गई है, पोस्टमॉर्टम के लिए...

कैसा दिखता है वैज्ञानिक कृषि वाला खेत: अजीत भारती का वीडियो | Raj Narayan’s farm and training centre, Keshabe

इस दौरान हमने जानने की कोशिश की कि ये किस तरह से कृषि, गौपालन आदि करते हैं और इसे समाज में भी ले जाने की कोशिश करते हैं।

चिंतित मत होइए, यहाँ से कुछ ले नहीं जा रहे, नया फिल्म सिटी बना रहे हैं: CM योगी का संजय राउत को करारा जवाब

सीएम योगी ने कहा कि मुंबई फिल्म उद्योग वहीं बना रहेगा और एक नई फिल्म सिटी को उत्तर प्रदेश में नए परिवेश में नई आवश्यकताओं के अनुसार विकसित किया जाएगा।

‘अब्बा कहीं जाते थे तो मैं बीमार हो जाती थी’ से ‘अब्बा घरेलू हिंसा करते हैं’: शेहला रशीद की आपबीती

शेहला का एक पुराने ट्वीट का स्क्रीनशॉट वायरल हो रहा है। इसमें शेहला ने लिखा है कि बचपन में जब कभी उनके अब्बा कहीं बाहर जाते थे तो वह बीमार हो जाती थी।

‘अवार्ड वापसी’ की घरवापसी: किसानों के प्रदर्शन के बीच पंजाब के पूर्व खिलाड़ियों ने पुरस्कार लौटने की दी धमकी

पद्म श्री और अर्जुन अवार्डी पहलवान करतार सिंह, अर्जुन अवार्डी बास्केटबॉल खिलाड़ी सज्जन सिंह चीमा और अर्जुन अवार्डी हॉकी खिलाड़ी राजबीर कौर उन लोगों में से हैं जो अपने पुरस्कार वापस करना चाहते हैं।

‘किसी भी केंद्रीय मंत्री को महाराष्ट्र में घुसने नहीं देंगे’: उद्धव के पार्टनर ने दी धमकी, ‘किसान आंदोलन’ का किया समर्थन

उन्होंने आरोप लगाया कि सुधार के नाम पर केंद्र कॉर्पोरेट और बड़े औद्योगिक संस्थानों को शक्तियाँ देना चाहती है।

प्रचलित ख़बरें

‘गुजराती कसम खा कर पलट जाते हैं, औरंगजेब की तरह BJP नेताओं की कब्रों पर थूकेंगे लोग’: क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता की धमकी

जब उनसे पूछा गया कि इस 'किसान आंदोलन' में इंदिरा गाँधी की हत्या को याद कराते हुए पीएम मोदी को भी धमकी दी गई है, तो उन्होंने कहा कि जिसने जो बोया है, वो वही काटेगा।

‘दिल्ली और जालंधर किसके साथ गई थी?’ – सवाल सुनते ही लाइव शो से भागी शेहला रशीद, कहा – ‘मेरा अब्बा लालची है’

'ABP न्यूज़' पर शेहला रशीद अपने पिता अब्दुल शोरा के आरोपों पर सफाई देने आईं, लेकिन कठिन सवालों का जवाब देने के बजाए फोन रख कर भाग खड़ी हुईं।

‘हिंदू लड़की को गर्भवती करने से 10 बार मदीना जाने का सवाब मिलता है’: कुणाल बन ताहिर ने की शादी, फिर लात मार गर्भ...

“मुझे तुमसे शादी नहीं करनी थी। मेरा मजहब लव जिहाद में विश्वास रखता है, शादी में नहीं। एक हिंदू को गर्भवती करने से हमें दस बार मदीना शरीफ जाने का सवाब मिलता है।”

‘जो ट्विटर पर आलोचना करेंगे, उन सब पर कार्रवाई करोगे?’ बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र की उद्धव सरकार पर दागा सवाल

बॉम्बे हाई कोर्ट ने ट्विटर यूजर सुनैना होली की गिरफ़्तारी के मामले में सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार से कड़े सवाल पूछे हैं।

दुर्घटना में घायल पिता के लिए ‘नजदीकी’ अखिलेश यादव से मदद की गुहार… लेकिन आगे आई योगी सरकार

उत्तर प्रदेश में दुर्घटनाग्रस्त एक व्यक्ति की बेटी ने मदद के लिए गुहार तो लगाई अखिलेश यादव से, लेकिन मदद के लिए योगी सरकार आगे आई।

‘शिहाब ने मेरे शौहर को मुझसे दूर किया, अश्लील संदेश भेजे, जान से मारने की धमकी दी’: कर्नाटक में असिया बनी शांति की पीड़ा

आसिया का कहना है कि उसके पति को कहीं छुपा दिया गया है और उसका मोबाइल बंद कर दिया गया है। जब वह अपने पति के परिवार के घर गई, तो उसे शिहाब ने हत्या की धमकी दी थी।

एक ही परिवार के 3 भाइयों का शव बरामद, आँखें निकली हुईं: हत्या का आरोप लगा परिजनों ने मिर्जापुर में किया चक्का जाम

पुलिस अधीक्षक का कहना है कि लेहड़िया बंधी के पानी में तीन लड़कों का शव बरामद हुआ है। हत्या की आशंका जताई गई है, पोस्टमॉर्टम के लिए...

गौभक्त और आर्य समाजी धर्मपाल गुलाटी का निधन: विभाजन के बाद तांगा चलाने को मजबूर, मेहनत से खड़ा किया MDH

मसालों की कंपनी महाशय दी हट्टी (MDH) के मालिक धर्मपाल गुलाटी का निधन हो गया है। धर्मपाल गुलाटी 98 वर्ष के थे। पद्म भूषण से सम्मानित...
00:30:45

कैसा दिखता है वैज्ञानिक कृषि वाला खेत: अजीत भारती का वीडियो | Raj Narayan’s farm and training centre, Keshabe

इस दौरान हमने जानने की कोशिश की कि ये किस तरह से कृषि, गौपालन आदि करते हैं और इसे समाज में भी ले जाने की कोशिश करते हैं।

चिंतित मत होइए, यहाँ से कुछ ले नहीं जा रहे, नया फिल्म सिटी बना रहे हैं: CM योगी का संजय राउत को करारा जवाब

सीएम योगी ने कहा कि मुंबई फिल्म उद्योग वहीं बना रहेगा और एक नई फिल्म सिटी को उत्तर प्रदेश में नए परिवेश में नई आवश्यकताओं के अनुसार विकसित किया जाएगा।

NGT ने क्रिसमस और न्यू ईयर पर दी पटाखे चलाने की छूट, दिवाली में लागू था पूर्ण प्रतिबंध

एनजीटी ने कहा है कि क्रिसमस और न्यू ईयर के मद्देनजर देश के उन इलाकों में जहाँ एयर क्वालिटी मॉडरेट स्तर पर है, वहाँ पटाखे रात को 11:55 बजे से 12.30 तक यानी 35 मिनट के लिए चलाने की अनुमित होगी।

बब्बू और छब्बू मियाँ: दर्जी और पेंटर भाई कैसे बन गए भूमाफिया?

खजराना थाना क्षेत्र में बब्बू और छब्बू ने अवैध रूप से तीन आलीशान मकान बना लिया था। जिसको नगर निगम और पुलिस ने पहले नोटिस जारी करके खाली करवाया। फिर जेसीबी और पोकलेन की मदद से जमीदोंज कर दिया।

‘अब्बा कहीं जाते थे तो मैं बीमार हो जाती थी’ से ‘अब्बा घरेलू हिंसा करते हैं’: शेहला रशीद की आपबीती

शेहला का एक पुराने ट्वीट का स्क्रीनशॉट वायरल हो रहा है। इसमें शेहला ने लिखा है कि बचपन में जब कभी उनके अब्बा कहीं बाहर जाते थे तो वह बीमार हो जाती थी।

‘अवार्ड वापसी’ की घरवापसी: किसानों के प्रदर्शन के बीच पंजाब के पूर्व खिलाड़ियों ने पुरस्कार लौटने की दी धमकी

पद्म श्री और अर्जुन अवार्डी पहलवान करतार सिंह, अर्जुन अवार्डी बास्केटबॉल खिलाड़ी सज्जन सिंह चीमा और अर्जुन अवार्डी हॉकी खिलाड़ी राजबीर कौर उन लोगों में से हैं जो अपने पुरस्कार वापस करना चाहते हैं।

‘जो इस्लाम में प्रतिबंधित, जिन्ना ने वह सब कुछ किया’: उनके नाम पर बनी शराब की बोतल गिन्ना वायरल, लोगों ने जमकर लिए मजे

लेबल पर लिखा गया है कि एमए जिन्ना को कभी भी यह मंजूर नहीं होगा जबकि उन्होंने पूल बिलियर्ड्स, सिगार, पोर्क सॉसेज के साथ-साथ बढ़िया स्कॉच व्हिस्की और शराब का आनंद लिया।

‘शिहाब ने मेरे शौहर को मुझसे दूर किया, अश्लील संदेश भेजे, जान से मारने की धमकी दी’: कर्नाटक में असिया बनी शांति की पीड़ा

आसिया का कहना है कि उसके पति को कहीं छुपा दिया गया है और उसका मोबाइल बंद कर दिया गया है। जब वह अपने पति के परिवार के घर गई, तो उसे शिहाब ने हत्या की धमकी दी थी।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,510FollowersFollow
359,000SubscribersSubscribe