मुज़फ़्फ़रपुर शेल्टरहोम केस में मिली हड्डियों की पोटली: CBI ने जताई लड़कियों की हत्या की आशंका

आवेदन में निवेदिता ने सीबीआई पर आरोप लगाया है कि एजेंसी पीड़ितों के बयान न लेकर, ब्रजेश ठाकुर समेत अन्य आरोपितों को बचाने की कोशिश कर रही है।

बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर शेल्टरहोम केस में शुक्रवार (मई 4, 2019) को सीबीआई ने सर्वोच्च न्यायालय में 11 लड़कियों के मर्डर की आशंका जताई है। सर्वोच्च न्यायालय में दायर किए हलफनामे में सीबीआई ने कोर्ट को बताया है कि जाँच के दौरान दर्ज किए गए पीड़ितों के बयान में 11 लड़कियों के नाम सामने आए हैं, जिनकी आरोपितों ने कथित रूप से हत्या की थी। जाँच एजेंसी के मुताबिक एक आरोपित के कहने पर श्मशान के एक खास स्थान की खुदाई की गई, जहाँ से हड्डियों की पोटली बरामद की गई।

शुक्रवार को प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। सीबीआई ने कोर्ट में यह हलफनामा सामाजिक कार्यकर्ता निवेदिता झा की ऐप्लीकेशन के बाद दायर किया। इस आवेदन में निवेदिता ने सीबीआई पर आरोप लगाया है कि एजेंसी पीड़ितों के बयान न लेकर, ब्रजेश ठाकुर समेत अन्य आरोपितों को बचाने की कोशिश कर रही है।

इसके बाद पीठ ने कहा है कि इस आवेदन पर कोर्ट सीबीआई को औपचारिक नोटिस जारी करेगा, जिसका जवाब एजेंसी को 4 दिन के भीतर देना होगा। पीठ ने संक्षिप्त दलीलों को सुनने के बाद इस मामले की सुनवाई के लिए 6 मई की तारीख तय की है।

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इस पूरे मामले को लेकर लालू प्रसाद यादव के बेटे और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, “नीतीश कुमार के करीबी दुलरवा ब्रजेश ठाकुर ने सीएम के संरक्षण में 34 बच्चियों का सत्ताधारी नेताओं द्वारा सामूहिक बलात्कार उपरांत 11 बच्चियों को मारकर गाड़ दिया। हिंदू रीति से दाह संस्कार भी नहीं किया। बाकी बच्चियाँ अभी भी गायब हैं। नीतीश सरकार नंगी हो चुकी है।”

बता दें बिहार के मुजफ्फरपुर में एक एनजीओ द्वारा संचालित शेल्टर होम में कई लड़कियों का कथित रूप से बलात्कार और यौन उत्पीड़न किया गया था और टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान की रिपोर्ट के बाद यह मुद्दा उछला था। जिसके बाद इस मामले की जाँच सीबीआई को सौंपी गई थी और एजेंसी ने ब्रजेश ठाकुर सहित 21 लोगों के ख़िलाफ़ आरोपपत्र दायर किया था। 

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