Homeविविध विषयअन्यकड़ा और बड़ा फैसला: 15 कस्टम अफसर को जबरन रिटायरमेंट, अब तक 27 'दागदारों'...

कड़ा और बड़ा फैसला: 15 कस्टम अफसर को जबरन रिटायरमेंट, अब तक 27 ‘दागदारों’ पर गिरी गाज

नियम 56(जे) के अंतर्गत वित्त मंत्रालय ने जिन अधिकारियों को पदमुक्त करने के आदेश जारी किए हैं, वह प्रमुख आयुक्त, आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त और उपायुक्त रैंक के हैं।

12 ‘दागदार’ व ‘सुस्त’ वरिष्ठ अधिकारियों को समय-पूर्व रिटायरमेंट देने के बाद एक और बार अकुशलता पर चाबुक चलाते हुए मोदी सरकार ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर व कस्टम बोर्ड के 15 बड़े अधिकारियों को जबरन रिटायर कर दिया है। इन सभी अधिकारियों पर पद की नियमावली के खिलाफ काम करने का आरोप था। वित्त मंत्रालय ने इसके लिए नियम 56 का सहारा लिया है।

आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त आदि पदों के अधिकारी शामिल

ANI की खबर के मुताबिक नियम 56(जे) के अंतर्गत वित्त मंत्रालय ने जिन अधिकारियों को पदमुक्त करने के आदेश जारी किए हैं, वह प्रमुख आयुक्त, आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त और उपायुक्त रैंक के हैं। ANI ने यह खबर मन्त्रालय के अपने सूत्रों के हवाले से जारी की है।

इसके पूर्व भी आयकर विभाग के जिन 12 अफसरों को वित्त मंत्रालय ने जबरन रिटायर किया था, उन पर भी कार्रवाई इसी नियम के अंतर्गत की गई थी। ये सभी अधिकारी इनकम टैक्स विभाग में चीफ कमिश्नर, प्रिंसिपल कमिश्नर्स और कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स डिपार्टमेंट जैसे महत्वपूर्ण और बड़े पदों पर तैनात थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन अधिकारियों में से कई पर भ्रष्टाचार, बेहिसाब संपत्ति का अर्जन और यौन शोषण जैसे आरोप लगे हुए थे

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

विवादों में ‘कॉकरोचों’ का 6 जून का प्रदर्शन, दिपके ने माना- ‘नहीं ली प्रोटेस्ट की परमिशन’: समझें- SC का फैसला, 7 दिन वाला नियम...

CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन के बहाने समझिए जंतर-मंतर पर धरना देने की पूरी प्रक्रिया, दिल्ली पुलिस के नियम और सुप्रीम कोर्ट का रुख।

‘पहले मंदिर में नमाज पढ़ेंगे, फिर कहेंगे मस्जिद थी’: बुलंदशहर से भोजशाला तक, हिंदू पवित्र स्थलों पर दावों का कट्टरपंथियों का पैटर्न और लिबरल...

हिंदुओं के पवित्र स्थानों पर नमाज अदा करना भूल नहीं, सोची-समझी साजिश है। यदि कट्टरपंथियों का मन इतना ही साफ होता तो मंदिरों पर कब्जा नहीं करते।
- विज्ञापन -