Homeविविध विषयअन्यनाम, फोन नंबर, ईमेल... Dark Web पर बिक रहा: लिंक्डइन का 70 करोड़ यूजर्स...

नाम, फोन नंबर, ईमेल… Dark Web पर बिक रहा: लिंक्डइन का 70 करोड़ यूजर्स का डाटा लीक होने से इनकार

इससे पहले इसी साल अप्रैल में लिंक्डइन के 500 मिलियन यूजर्स का डेटा लीक होने की खबर आई थी। इसमें यूजर्स के मोबाइल नंबर, नाम, पता, आईडी और ई-मेल एड्रेस से लेकर सोशल मीडिया अकाउंट तक की जानकारी थी।

पेशेवर नेटवर्किंग वेबसाइट लिंक्डइन (LinkedIn) के करीब 700 मिलियन यानी 70 करोड़ यूजर्स का डेटा हैकर्स ने कथित तौर पर लीक कर दिया है। डार्क वेब स्पेस में यह डाटा बिक्री के लिए उपलब्ध है। यह डाटा लिंक्डइन के सारे यूजर्स का करीब 92 फीसदी है। हालाँकि, लिंक्डइन ने इससे इनकार किया है। डाटा लीक करने वाले हैकरों के बारे में भी अभी तक कुछ भी नहीं पता चल सका है।

लीक हुए डेटा में यूजर्स के नाम, फोन नंबर, मेल आईडी, संस्थान सहित कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, लिंक्डइन यूजर्स का डाटा लीक हुआ है। हैकर्स ने इसे डार्क वेब स्पेस में बेचने के लिए डाल दिया है। इसमें से एक मिलियन डाटा को हैकर्स ने डार्क वेब के पब्लिक डोमेन में डाला है।

रेड फोरम ने कंपनी के प्रवक्ता के हवाले से कहा, “हम मामले की जाँच कर रहे हैं और हमारी शुरुआती जाँच में पता चला है कि डेटासेट में लिंक्डइन (LinkedIn) से स्क्रैप की गई जानकारी के साथ-साथ दूसरे सोर्सेज से भी जानकारियों को लिया गया है। यह लिंक्डइन का डेटा लीक नहीं था और हमारी जाँच से पता चला है कि लिंक्डइन (LinkedIn) के किसी भी मेंबर का डेटा लीक नहीं हुआ है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं कि हमारे सदस्यों की गोपनीयता सुरक्षित रहे।”

कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर पोस्ट किए गए एक नोट में कहा, “हमारी टीमों ने कथित लिंक्डइन डेटा के एक सेट की जाँच की है, जिसे बिक्री के लिए पोस्ट किया गया है। हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि यह डेटा लीक नहीं है।”

इससे पहले इसी साल अप्रैल में लिंक्डइन (LinkedIn) के 500 मिलियन यूजर्स का डेटा लीक होने की खबर आई थी। इसमें यूजर्स के मोबाइल नंबर, नाम, पता, आईडी और ई-मेल एड्रेस से लेकर सोशल मीडिया अकाउंट तक की जानकारी थी। इसे भी हैकर्स ने डार्क वेब पर सेल के लिए डाल दिया था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

27 साल जेल, टूटा परिवार और अब रिहाई की उम्मीद: दारा सिंह केस के अनसुने पहलू

दारा सिंह, ईसाई मिशनरियों के रैकेट का अंत करने की लड़ाई लड़ रहे थे। वहीं दूसरी तरफ ग्राहम स्टेंस जनजातीयों के ब्रेनवॉश में जुटा था।

सोनम वांगचुक का अनशन हेडलाइन, ग्रामीणों का सत्याग्रह फुटनोट क्यों बन जाता है?

सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल पर शोर। लेकिन मध्य प्रदेश के जल सत्याग्रह पर खामोशी। आखिर कौन तय करता है? क्या सरकार हर आमरण अनशन के आगे झुकने को बाध्य है?
- विज्ञापन -