Wednesday, April 21, 2021
Home विविध विषय अन्य ...उस मुगल 'बादशाह' की कब्र खोजेगा ASI, जिसने किया था गीता और 52 उपनिषदों...

…उस मुगल ‘बादशाह’ की कब्र खोजेगा ASI, जिसने किया था गीता और 52 उपनिषदों का अनुवाद

दारा शिकोह को एक "उदार मुस्लिम" के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने हिंदू और इस्लामी परंपराओं के बीच समानताएँ खोजने की कोशिश की। उन्होंने भागवत गीता के साथ-साथ 52 उपनिषदों का अनुवाद फारसी में किया था।

इतिहास के पन्नों में कई राज दफन हैं। इनमें कुछ मौखिक तो कुछ लिखित हैं, जिन्हें बाद में शब्दों की शक्ल दी गई। अब इन्हीं शब्दों की परतों को खोलने का कार्य भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) करने जा रहा है, जिसमें उन्हें हुमायूँ मकबरे के भीतर दाराशिकोह की कब्र को खोजने का उत्तरदायित्व दिया गया है।

लिखित इतिहास के अनुसार दाराशिकोह की कब्र हुमायूँ मकबरे के भीतर है। ASI के सामने सबसे बड़ी परेशानी यहाँ दाराशिकोह की कब्र को खोजने की है क्योंकि अधिकतर कब्रों पर नाम नहीं लिखे हुए हैं। हुमायूँ मकबरे के पूरे परिसर में करीब 140 कब्रें हैं, जिनमें कुछ कब्रों पर नाम है तो ज्यादातर कब्र बेनाम हैं।

संस्कृति व पर्यटन मंत्रालय के आदेश पर ASI द्वारा 7 सदस्यीय टीम गठित की गई है, जो 3 महीने के भीतर दाराशिकोह की कब्र को ढूँढकर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। इस टीम का नेतृत्व टीजे अलोन करेंगे, जो ASI में स्मारक निदेशक हैं। इस टीम में वरिष्ठ पुरातत्वविद् आरएस बिष्ट, सईद जमाल हसन, केएन दीक्षित, बीआर मणि, केके मुहम्मद, सतीश चंद्र और बीएम पांडे शामिल हैं। इसके लिए तीन महीने का समय दिया गया है।

वहीं इस बारे में पूछे जाने पर संस्कृति व पर्यटन मंत्री प्रह्लाद पटेल ने कहा, “निष्कर्षों तक पहुँचने के लिए तीन महीने के समय को बढ़ाया भी जा सकता है। क्योंकि इसे ढूँढने में उस समय की वास्तुकला से लेकर लिखित इतिहास व अन्य जानकारियों को ध्यान में रखना होगा। पैनल उस समय के लिखित इतिहास, साक्ष्य या फिर कोई अन्य जानकारी, जिसे सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है, का उपयोग करके निष्कर्ष पर पहुँचेगा।”

बता दें कि दाराशिकोह, शाहजहाँ व मुमताज के बड़े बेटे एवं औरंगजेब के बड़े भाई थे। कई भाषाओं के विद्वान दाराशिकोह को मारकर 1659 में औरंगजेब गद्दी पर बैठा था। दारा शिकोह को एक “उदार मुस्लिम” के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने हिंदू और इस्लामी परंपराओं के बीच समानताएँ खोजने की कोशिश की। उन्होंने भागवत गीता के साथ-साथ 52 उपनिषदों का अनुवाद फारसी में किया था।

पैनल में शामिल पुरातत्वविदों में से एक, केके मुहम्मद ने दारा शिकोह को उस समय के सबसे महान मुक्त विचारकों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि दारा शिकोह ने उपनिषदों के महत्व को समझा और उसका अनुवाद किया। उपनिषद उस समय केवल कुछ उच्च जाति के हिंदुओं के लिए जाना जाता था। दारा शिकोह के उस फारसी अनुवाद ने आज के बहुत से मुक्त विचारकों को प्रेरित किया, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा भी शामिल हैं।

वहीं कुछ इतिहासकारों का कहना है कि अगर औरंगजेब की जगह दारा शिकोह मुगल सिंहासन पर बैठता तो इससे सांप्रदायिक हिंसा में खोए हजारों लोगों की जान बच सकती थी। अविक चंदा अपनी किताब- ‘दारा शिकोह, द मैन हू वुड बी किंग’ में लिखते हैं, “दारा शुकोह औरंगज़ेब का धुर विरोधी था। वह काफी सामंजस्यवादी, गर्मजोशी और उदार था, लेकिन इसके साथ ही वह लड़ाई के क्षेत्र में एक उदासीन प्रशासक होने के साथ ही अप्रभावी भी था।”

बता दें कि हाल ही में दिल्ली के एक सम्मेलन में वक्ताओं ने दारा शिकोह को ‘असली हिंदुस्तानी’ कहा था। इसमें RSS के पदाधिकारी भी शामिल थे। पिछले साल अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में दारा शिकोह के नाम पर एक रिसर्च चेयर स्थापित की गई।

दिल्ली विश्वविद्यालय में मध्ययुगीन इतिहास के प्रोफेसर सुनील कुमार ने दारा शिकोह के कब्र की खोज पर सवाल उठाते हुए कहा, “जब भी आप आधुनिक राजनीतिक उद्देश्यों के लिए अतीत का उपयोग करते हैं, तो आप हमेशा इसे ट्विस्ट कर देंगे क्योंकि अतीत आधुनिकता में उपयुक्त नहीं बैठ सकता। आप इसे अपने वर्तमान इरादों के लिए इसमें जोड़-तोड़ करते हैं। अगर औरंगजेब की जगह वह शहंशाह होता, तो क्या अलग भारत होता? ये धारणाएँ मुगल इतिहास की मिसप्लेस्ड अंडरस्टैंडिंग की वजह से आ रही हैं। उन्हें एक अच्छा मुस्लिम बनाया गया है लेकिन उनकी कब्र की खोज क्यों हो रही है?”

शाहजहाँनामा के अनुसार, औरंगजेब ने दारा शिकोह को पराजित करने के बाद, उन्हें जंजीरों में बाँधकर दिल्ली लाया गया था। उनका सिर काट दिया गया और आगरा किले में भेज दिया गया, जबकि उनके धड़ को हुमायूँ के मकबरे के परिसर में दफना दिया गया।

केके मुहम्मद ने कहा, “कोई नहीं जानता कि वास्तव में दारा शिकोह को कहाँ दफनाया गया था। हम सभी जानते हैं कि यह हुमायूँ के मकबरे के परिसर में एक छोटी सी कब्र है। अधिकांश लोग वहाँ एक विशेष छोटी सी कब्र की ओर इशारा करते हैं। इटालियन यात्री निकोलो मनुची ने ट्रेवल्स ऑफ मनुसी में उस दिन का एक ग्राफिक विवरण दिया है, जो कि इसके प्रत्यक्षदर्शी हैं। यही इस थेसिस का आधार है।”

पैनल के सदस्य बीआर मणि ने कहा, “परिसर में मौजूद कब्रों में से एक पारंपरिक रूप से दारा शिकोह का कहा जाता है। यह हुमायूँ के मकबरे परिसर के पश्चिमी तरफ स्थित है। हम इस बारे में पीढ़ियों से क्षेत्र में रहने वाले लोगों के साथ-साथ वरिष्ठ ASI अधिकारियों से सुनते आ रहे हैं, लेकिन फिर भी कोई सबूत नहीं है।”

AMU के प्रोफेसर शिरीन मूसवी ने कहा, “1857 तक परिवार के सभी सदस्यों को उसी परिसर में दफनाया गया था। इतिहासकार जदुनाथ सरकार, सभी अधिकारियों के साथ-साथ यूरोपियन और फारसी भी इसी तरफ इशारा करते हैं कि दारा शिकोह को हुमायूँ के मकबरे में दफन किया गया था।”

ASI की सबसे बड़ी समस्या यह है कि परिसर की अधिकांश कब्रों का कोई नाम नहीं है। ASI के एक पूर्व निदेशक और पैनल के सदस्य हसन ने कहा, “शाहजहाँनामा में मुहम्मद सालेह कम्बोह ने दारा शिकोह के अंतिम दिनों के बारे में कम से कम दो पेजों में लिखा है कि कैसे उनकी बेरहमी से हत्या की गई थी और फिर परिसर में कहीं दफना दिया गया था।”

केके मुहम्मद ने कहा कि निश्चितता के साथ तो नहीं कहा जा सकता है, मगर संभावना जरूर है। वहीं प्रोफेसर मूसवी को डर है कि कहीं यह खोज कभी खत्म न होने वाला न हो जाए, क्योंकि किसी ने भी कब्र की जगह का उल्लेख नहीं किया है। वहाँ पर कोई भी कब्र चिह्नित या अंकित नहीं है। दारा शिकोह की कब्र को पहचानने का कोई तरीका नहीं है।

इतिहास में गुम हैं मुगलों को 17 बार हराने वाले अहोम योद्धा: देश भूल गया ब्रह्मपुत्र के इन बेटों को

‘मुगलों ने हिंदुस्तान को लूटा ही नहीं, माल बाहर भी भेजा, ये रहा सबूत’

छत्रपति शिवाजी की बहू महारानी ताराबाई की समाधी का बुरा हाल, मुगलों के ख़िलाफ़ राष्ट्रहित में लड़ी थीं

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

देश के 3 सबसे बड़े डॉक्टर की 35 बातें: कोरोना में Remdesivir रामबाण नहीं, अस्पताल एक विकल्प… एकमात्र नहीं

देश में कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है। 2.95 लाख नए मामले सामने आने के बाद देश में कुल संक्रमितों की संख्या बढ़ कर...

‘गैर मुस्लिम नहीं कर सकते अल्लाह शब्द का इस्तेमाल, किसी अन्य ईश्वर से तुलना गुनाह’: इस्लामी संस्था ने कहा- फतवे के हिसाब से चलें

मलेशिया की एक इस्लामी संस्था ने कहा है कि 'अल्लाह' एक बेहद ही पवित्र शब्द है और इसका इस्तेमाल सिर्फ इस्लाम के लिए और मुस्लिमों द्वारा ही होना चाहिए।

आज वैक्सीन का शोर, फरवरी में था बेकारः कोरोना टीके पर छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेसी सरकार ने ही रचा प्रोपेगेंडा

आज छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री इस बात से नाखुश हैं कि पीएम ने राज्यों को कोरोना वैक्सीन देने की बात नहीं की। लेकिन, फरवरी में वही इसके असर पर सवाल उठा रहे थे।

पंजाब के 1650 गाँव से आएँगे 20000 ‘किसान’, दिल्ली पहुँच करेंगे प्रदर्शनः कोरोना की लहर के बीच एक और तमाशा

संयुक्त किसान मोर्चा ने 'फिर दिल्ली चलो' का नारा दिया है। किसान नेताओं ने कहा कि इस बार अधिकतर प्रदर्शनकारी महिलाएँ होंगी।

हम 1 साल में कितने तैयार हुए? सरकारों की नाकामी के बाद आखिर किस अवतार की बाट जोह रहे हम?

मुफ्त वाई-फाई, मुफ्त बिजली, मुफ्त पानी से आगे लोगों को सोचने लायक ही नहीं छोड़ती समाजवाद। सरकार के भरोसे हाथ बाँध कर...

मधुबनी: धरोहर नाथ मंदिर में सोए दो साधुओं का गला कुदाल से काटा, ‘लव जिहाद’ का विरोध करने वाले महंत के आश्रम पर हमला

बिहार के मधुबनी जिला स्थित खिरहर गाँव में 2 साधुओं की गला काट हत्या कर दी गई है। इससे पहले पास के ही बिसौली कुटी के महंत के आश्रम पर रात के वक्त हमला हुआ था।

प्रचलित ख़बरें

रेप में नाकाम रहने पर शकील ने बेटी को कर दिया गंजा, जैसे ही बीवी पढ़ने लगती नमाज शुरू कर देता था गंदी हरकतें

मेरठ पुलिस ने शकील को गिरफ्तार किया है। उस पर अपनी ही बेटी ने रेप करने की कोशिश का आरोप लगाया है।

मधुबनी: धरोहर नाथ मंदिर में सोए दो साधुओं का गला कुदाल से काटा, ‘लव जिहाद’ का विरोध करने वाले महंत के आश्रम पर हमला

बिहार के मधुबनी जिला स्थित खिरहर गाँव में 2 साधुओं की गला काट हत्या कर दी गई है। इससे पहले पास के ही बिसौली कुटी के महंत के आश्रम पर रात के वक्त हमला हुआ था।

रेमडेसिविर खेप को लेकर महाराष्ट्र के FDA मंत्री ने किया उद्धव सरकार को शर्मिंदा, कहा- ‘हमने दी थी बीजेपी को परमीशन’

महाविकास अघाड़ी को और शर्मिंदा करते हुए राजेंद्र शिंगणे ने पुष्टि की कि ये इंजेक्शन किसी अन्य उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। उन्हें भाजपा नेताओं ने भी इसके बारे में आश्वासन दिया था।

‘सुअर के बच्चे BJP, सुअर के बच्चे CISF’: TMC नेता फिरहाद हाकिम ने समर्थकों को हिंसा के लिए उकसाया, Video वायरल

TMC नेता फिरहाद हाकिम का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है। इसमें वह बीजेपी और केंद्रीय सुरक्षा बलों को 'सुअर' बता रहे हैं।

हाँ, हम मंदिर के लिए लड़े… क्योंकि वहाँ लाउडस्पीकर से ऐलान कर भीड़ नहीं बुलाई जाती, पेट्रोल बम नहीं बाँधे जाते

हिंदुओं को तीन बातें याद रखनी चाहिए, और जो भी ये मंदिर-अस्पताल की घटिया बाइनरी दे, उसके मुँह पर मार फेंकनी चाहिए।

रवीश और बरखा की लाश पत्रकारिताः निशाने पर धर्म और श्मशान, ‘सर तन से जुदा’ रैलियाँ और कब्रिस्तान नदारद

अचानक लग रहा है जैसे पत्रकारों को लाश से प्यार हो गया है। बरखा दत्त श्मशान में बैठकर रिपोर्टिंग कर रही हैं। रवीश कुमार लखनऊ को लाशनऊ बता रहे हैं।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

293,781FansLike
82,726FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe