Homeदेश-समाजछत्रपति शिवाजी की बहू महारानी ताराबाई की समाधी का बुरा हाल, मुगलों के ख़िलाफ़...

छत्रपति शिवाजी की बहू महारानी ताराबाई की समाधी का बुरा हाल, मुगलों के ख़िलाफ़ राष्ट्रहित में लड़ी थीं

जहाँ एक तरफ आक्रांताओं के मकबरों का खूब ख्याल रखा गया है वहीं आजादी के 72 वर्षों बाद भी हिन्दू धर्म संस्कृति के लिए लड़ने वाली ताराबाई की समाधि को कोई पूछने वाला नहीं।

छत्रपति शिवाजी महाराज की बहू और उनके बेटे राजाराम की पत्नी महारानी ताराबाई की समाधि आज जीर्णशीर्ण हालत में है। सन 1700-1707 में मुगलों के खिलाफ मराठा लड़ाई का नेतृत्व करने वाली महारानी ताराबाई मोहिते की समाधि की तरफ ध्यान लेखिका मानोशी सिन्हा ने आज एक ट्वीट के जरिये आकृष्ट किया।

उन्होंने एक और ट्वीट के जरिए यह भी सूचित किया कि अब एक संगठन सरकार के सहयोग से महारानी ताराबाई की समाधि के संरक्षण का दायित्व संभालेगी। लेखिका ने समाधि के मौजूदा हाल पर अफ़सोस जाहिर करते हुए कहा कि जहाँ एक तरफ आक्रांताओं के मकबरों का खूब ख्याल रखा गया है वहीं आजादी के 72 वर्षों बाद भी हिन्दू धर्म संस्कृति के लिए लड़ने वाली ताराबाई की समाधि को कोई पूछने वाला नहीं।

ताराबाई की लड़ाइयों और उनके महत्त्व को समझने के लिए इतिहासकार जदुनाथ सरकार की उन पर की गयी एक टिपण्णी ही पर्याप्त है। इसमें वे लिखते हैं ,”1700 -1707 के बीच महाराष्ट्र में सर्वप्रमुख प्रेरक शक्ति कोई मंत्री न होकर महारानी ताराबाई ही थीं जिन्होंने अपनी कुशल प्रशासनिक क्षमता तथा मजबूत चारित्रिक क्षमता के बल पर उस कठिन समय पर राष्ट्र की रक्षा की।”

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘श्मशान का भी व्यवसाय’… ईशा फाउंडेशन को पटना में एशिया के सबसे बड़े शवदाह गृह के संचालन की जिम्मेदारी मिलने पर हंगामा, जानें- ऑपइंडिया...

पटना के बांसघाट शवदाह गृह को लेकर उठे सवालों के बीच जानिए सरकार ने ईशा फाउंडेशन को जिम्मेदारी क्यों दी और क्या हैं सुविधाएँ।

वेनेजुएला में तबाही के बाद भारत के ‘भूदेव’ की आई याद, हिमालयी क्षेत्रों में तैनात ये सिस्टम बचा सकता है लाखों की जान: समझें...

भूकंप की जानकारी देने के लिए आईआईटी रुड़की ने एक अत्याधुनिक भूकंप अर्ली वॉर्निंग मोबाइल ऐप और सिस्टम ‘भूदेव’ तैयार किया है।
- विज्ञापन -