BSP नेता मोहम्मद इकबाल की 111 फर्जी कंपनियों पर ED का शिकंजा, ₹10,000 करोड़ की हेर-फेर

इकबाल की इन फर्जी कंपनियों के निदेशक और अधिकारी उसके नौकर, रसोइया और ड्राइवर हैं। अभी तक की जाँच में 111 में से 84 कंपनियों के पते भी फर्जी पाए गए हैं।

बसपा नेता और सहारनपुर के खनन माफिया मोहम्मद इकबाल के ख़िलाफ़ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए ) के तहत केस दर्ज किया है। इस केस में इकबाल पर 111 से ज्यादा फर्जी कंपनियों के जरिए करोड़ों रुपए के ब्लैक मनी को व्हाइट मनी में बदलने का आरोप है।

गौरतलब है इससे पहले भी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ईडी मोहम्मद इकबाल के ख़िलाफ़ जाँच कर रही थी। लेकिन ये नया मामला सीरियस फ्रॉड इंवेस्टीगेशन यूनिट द्वारा मोहम्मद इकबाल की शेल कंपनियों की जाँच के बाद अदालत में दाखिल की गई चार्जशीट के आधार पर किया गया है। इस मामले में ईडी जल्द ही फर्जी कंपनियों की जाँच शुरू करेगी।

मीडिया खबरों के मुताबिक मोहम्मद इकबाल द्वारा इन फर्जी कंपनियों के जरिए अवैध खनन और कई अन्य जरियों से कमाए गए लगभग 10,000 करोड़ रुपए के काले धन को सफ़ेद करने की कोशिश की गई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इकबाल की पूर्व मंत्री और एनआरएचएम घोटाले के आरोपित बाबू सिंह कुशवाहा के साथ साठगाँठ थी।

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इकबाल की इन फर्जी कंपनियों के निदेशक और अधिकारी उसके नौकर, रसोइया और ड्राइवर हैं। अभी तक की जाँच में 111 में से 84 कंपनियों के पते भी फर्जी पाए गए हैं। बता दें कि ईडी ने इकबाल के अपनी ही यूनिवर्सिटी को दिए गए संदिग्ध डोनेशन और 11 शुगर मिल खरीदने की जाँच भी शुरू की तो बाकी एजेंसियों ने भी अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया। सहारनपुर जिला प्रशासन भी अवैध खनन के कई मामलों में इकबाल और उनके परिजनों के ख़िलाफ़ कई बार एक्शन ले चुका है।

इकबाल के ख़िलाफ यह मामला 2015-16 से चल रहा है। करीब दस साल पहले फलों की दुकान लगाने वाले मोहम्मद इकबाल अब अरबों की संपत्ति के मालिक हैं। इकबाल के ख़िलाफ़ सहारनपुर के ही एक कारोबारी रणवीर सिंह ने सबसे पहले शिकायत दर्ज करवाई थी, जिसमें जिक्र था कि आखिर फल की दुकान चलाने वाला इकबाल रातोंरात इतनी संपत्ति का और सहारनपुर की सैंकड़ों एकड़ में फैली ग्लोकल यूनिवर्सिटी का मालिक कैसे बना?

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