Monday, June 17, 2024
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मोदी राज में 4 गुना हुआ बैंकों का मुनाफा, डूब चुके ₹10 लाख करोड़ भी वसूले: जिस व्यवस्था को मनमोहन सरकार की ‘फोन बैंकिंग’ ने किया बर्बाद, उसे कर दिया आबाद

48 करोड़ से ज़्यादा लोगों को 28 लाख करोड़ रुपए के लोन बाँटे गए हैं, जिनमें से 68% लोन महिलाओं को दिए गए हैं। लॉन्च के दौरान आलोचकों द्वारा जताई गई बेबुनियाद चिंताओं के बावजूद, मुद्रा के तहत एनपीए 3% से कम है।

भारत की बैंकिंग व्यवस्था को किस तरह से मोदी सरकार न सिर्फ पटरी पर लेकर आई है, बल्कि इसे भारतीय अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तम्भ भी बनाया है – इसे लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक लेख के जरिए सारी जानकारी दी है। उन्होंने लिखा कि बैंकिंग क्षेत्र को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है, हाल ही में भारत के बैंकिंग क्षेत्र ने 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक का शुद्ध लाभ (Net Profit) दर्ज करके एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।

निर्माता सीतारमण ने समझाया कि कैसे यह 2014 से पहले की स्थिति के बिल्कुल विपरीत है जब कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार ने बैंकिंग क्षेत्र को खराब ऋणों, निहित स्वार्थों, भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के दलदल में बदल दिया था। NPA संकट के बीज तब ‘फोन बैंकिंग’ के ज़रिए बोए गए थे, जब यूपीए नेताओं और पार्टी पदाधिकारियों के दबाव में अयोग्य व्यवसायों को लोन दिए गए थे। यूपीए के शासन में बैंकों से लोन प्राप्त करना अक्सर मज़बूत व्यावसायिक प्रस्ताव के बजाय शक्तिशाली कनेक्शन पर निर्भर करता था।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने समझाया है कि कैसे उस दौरान बैंकों को इन लोन को मंज़ूरी देने से पहले उचित परिश्रम और जोखिम मूल्यांकन की उपेक्षा करने के लिए मजबूर होना पड़ा। इससे गैर-निष्पादित आस्तियों (Non-Performing Assets (NPAs)) और संस्थागत भ्रष्टाचार में भारी वृद्धि हुई। कई बैंकों ने अपने खराब ऋणों को ‘सदाबहार’ या पुनर्गठन करके रिपोर्ट करने से परहेज किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार और आरबीआई द्वारा परिसंपत्ति गुणवत्ता समीक्षा (Asset Quality Review) जैसे विभिन्न उपायों ने NPA के छिपे हुए पहाड़ों का खुलासा किया और उन्हें छिपाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली लेखांकन चालों को समाप्त कर दिया।

निर्मला सीतारमण ने लिखा, “UPA के समय में बेपरवाह और अविवेकपूर्ण तरीके से दिए गए ऋणों ने ‘Twin Balance Sheet’ की शर्मनाक विरासत पैदा की, जो हमें 2014 में विरासत में मिली। इस समस्या ने देश को विकास के लिए ज़रूरी ऋण प्रवाह से वंचित कर दिया। बैंक नए उधारकर्ताओं, खासकर MSME को ऋण देने में अनिच्छुक हो गए, जो आर्थिक विकास और रोजगार सृजन की रीढ़ हैं। ऋण वृद्धि एक दशक के निचले स्तर पर आ गई। उच्च प्रावधान के कारण बैंकों को भारी नुकसान और पूंजी का क्षरण भी झेलना पड़ा। बैंकों द्वारा 2014 से पहले दिए गए ऋणों के लिए अपने NPA का पारदर्शी रूप से खुलासा करने के बाद, वित्त वर्ष 2017-18 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सकल एनपीए 14.6% के उच्च स्तर पर पहुँच गया।”

उन्होंने जानकारी दी कि RBI के दो पूर्व गवर्नरों ने UPA शासन द्वारा छोड़ी गई व्यवस्था में गिरावट के स्तर को खुले तौर पर उजागर किया है। साथ ही याद दिलाया कि कैसे राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में भाग लेने वाले रघुराम राजन ने यूपीए काल के दौरान NPA संकट को ‘अतार्किक उत्साह की ऐतिहासिक घटना’ बताया। इसी तरह उर्जित पटेल ने कहा कि यूपीए के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का कामकाज ‘नौकरशाही की जड़ता और राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण एक स्थायी कमी’ से ग्रस्त था।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के इस लेख का लब्बोलुआब ये है कि NPA संकट ने करोड़ों महत्वाकांक्षी भारतीयों के सपनों को पूरा करने के लिए आवश्यक ऋण को रोक दिया, जो स्टार्ट-अप स्थापित करना चाहते थे और छोटे व्यवसायों का विस्तार करना चाहते थे। यूपीए ने लुटियंस दिल्ली में वंशवाद और दोस्तों का पक्ष लिया, जबकि भारतीयों के एक बड़े हिस्से को बीच में छोड़ दिया। जब मोदी सरकार ने सत्ता संभाली तो ये दोस्त अभियोजन के डर से भाग गए।

निर्मला सीतारमण ने आरोप लगाया कि जो लोग अब बैंकों के राष्ट्रीयकरण का श्रेय लेते हैं, उन्होंने देश के गरीब और मध्यम वर्ग को दशकों तक बैंकिंग से वंचित रखा, जबकि उनके नेता और सहयोगी भ्रष्टाचार की सीढ़ियाँ चढ़ते रहे। बैंकिंग क्षेत्र में सुधार का श्रेय उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत और निर्णायक नेतृत्व को दिया। उन्होंने बता कि मोदी सरकार ने व्यापक और दीर्घकालिक सुधारों के माध्यम से बैंकिंग क्षेत्र में यूपीए के पापों का प्रायश्चित किया। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ 2015 की ‘ज्ञान संगम’ बैठक ने इन महत्वपूर्ण सुधारों की शुरुआत की।

अपनी सरकार के प्रयासों को गिनाते हुए उन्होंने बताया कि सरकार ने NPA को पारदर्शी रूप से पहचानने, समाधान और वसूली, पीएसबी को पुनर्पूंजीकृत करने और सुधार की एक व्यापक 4R रणनीति को लागू किया। हमारे सुधारों ने ऋण अनुशासन, वित्तीय तनाव की पहचान और समाधान, जिम्मेदार उधार और बेहतर शासन को संबोधित किया। मोदी सरकार ने बैंकों में राजनीतिक हस्तक्षेप की जगह पेशेवर ईमानदारी और स्वतंत्रता को अपनाया। गैर-कार्यकारी अध्यक्षों और पूर्णकालिक निदेशकों के पारदर्शी चयन के लिए Banks Board Bureau (BBB) बनाया गया।

मोदी सरकार द्वारा उठाए गए अन्य क़दमों की बात करें तो मिशन इंद्रधनुष के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पुनर्पूंजीकरण के लिए 3.10 लाख करोड़ रुपए से अधिक की पूंजी डाली गई। 2015 में बड़े मूल्य के बैंक धोखाधड़ी से संबंधित समय पर पता लगाने और जाँच के लिए एक रूपरेखा जारी की गई। तेजी से वसूली के लिए Insolvency & Bankruptcy Code (IBC) लाई गई। भगोड़े आर्थिक अपराधियों की संपत्ति जब्त करने के लिए 2018 का भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम बनाया गया। इसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए SARFAESI अधिनियम में संशोधन किया गया।

इसी तरह मोदी सरकार ने पिछले 5 वर्षों के दौरान, बैंकों ने SARFAESI के माध्यम से ₹​​1.51 लाख करोड़ की वसूली की है। ऋण वसूली न्यायाधिकरण का वित्तीय क्षेत्राधिकार ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹20 लाख कर दिया गया, ताकि वह उच्च मूल्य के मामलों पर ध्यान केंद्रित कर सके, जिसके परिणामस्वरूप बैंकों के लिए अधिक वसूली हो सके। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने कठोर वसूली के लिए तनावग्रस्त परिसंपत्ति प्रबंधन वर्टिकल बनाए, प्रभावी निगरानी के लिए मंजूरी से पहले और बाद की अनुवर्ती भूमिकाओं को अलग किया। उच्च मूल्य के ऋणों में निगरानी भूमिकाओं को मंजूरी देने वाली भूमिकाओं से अलग किया गया।

इतना ही नहीं, मोदी सरकार द्वारा ₹250 करोड़ से अधिक के ऋणों की प्रभावी निगरानी के लिए विशेष निगरानी एजेंसियों को तैनात किया गया। समय पर और बेहतर वसूली सुनिश्चित करने के लिए Online end-to-end OTS (One-Time Settlement) प्लेटफॉर्म स्थापित किए गए। ₹500 करोड़ से अधिक की तनावग्रस्त परिसंपत्तियों के समाधान के लिए 2021 में NARCL की स्थापना की गई, जिससे बैंकों के लिए अधिक मूल्य की वसूली हुई। बैंकों के प्रबंधन में सुधार के लिए Enhanced Access and Service Excellence (EASE) सुधारों के विभिन्न चरण शुरू किए गए हैं।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि झूठ फैलाने की आदत रखने वाला विपक्ष गलत दावा करता है कि उद्योगपतियों को दिए गए कर्ज को ‘माफ’ (Waiver) किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वित्त और अर्थव्यवस्था के विशेषज्ञ’ होने का दावा करने के बावजूद, यह अफ़सोस की बात है कि विपक्षी नेता अभी भी राइट-ऑफ (write off) और माफ़ी (waiver) के बीच अंतर नहीं कर पा रहे हैं। RBI के दिशा-निर्देशों के अनुसार ‘राइट-ऑफ’ के बाद, बैंक सक्रिय रूप से खराब ऋणों की वसूली करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी उद्योगपति के लिए कोई ‘माफ़ी’ नहीं हुई है।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने आँकड़े गिनाते हुए बताया कि 2014 से 2023 के बीच, बैंकों ने खराब ऋणों से 10 लाख करोड़ रुपए से अधिक की वसूली की। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने लगभग 1105 बैंक धोखाधड़ी मामलों की जाँच की है, जिसके परिणामस्वरूप ₹64,920 करोड़ की अपराध आय को जब्त किया गया है। दिसंबर 2023 तक₹ 15,183 करोड़ की संपत्ति PSB को वापस कर दी गई है। खराब ऋणों की वसूली में कोई ढील नहीं बरती गई है, विशेष रूप से बड़े डिफाल्टर से, और यह प्रक्रिया जारी है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बैंकिंग क्षेत्र में एक तरह के ‘समुद्र मंथन’ के दौरान अपेक्षित चुनौतियों के साथ-साथ सकारात्मक परिणाम भी दिए। तनाव की पहचान, तनावग्रस्त खातों के समाधान, पुनर्पूंजीकरण और बैंकों में सुधारों के लिए हमारी सरकार की नीतिगत प्रतिक्रिया के कारण, 2014 के बाद से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB) की वित्तीय सेहत और मजबूती में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। हमने बैंकों को ‘एनपीए से लदे दुःस्वप्न’ से ‘जन कल्याण के स्तंभ’ में बदल दिया है। ‘Twin Balance Sheet’ Problem से अब हमारे पास ‘Twin Balance Sheet Advantage’ है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया, “वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने ₹1.41 लाख करोड़ का अब तक का सबसे अधिक कुल शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो वित्त वर्ष 2014 के ₹36,270 करोड़ से लगभग 4 गुना अधिक है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वित्त वर्ष 2023-24 में शेयरधारकों को ₹27,830 करोड़ का लाभांश घोषित किया (भारत सरकार का हिस्सा ₹18,088 करोड़); इन निधियों का उपयोग कल्याणकारी योजनाओं के लिए किया जाता है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का Net NPA मार्च 2024 में घटकर 0.76% रह गया – जो मार्च 2015 में 3.92% था, और मार्च 2018 में 7.97% था। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का Gross NPA ratio मार्च 2024 में घटकर 3.47% रह गया – जो 2015 में 4.97% था और मार्च 2018 में 14.58% था। वित्त वर्ष 2024 में बैंक ऋण वृद्धि (गैर-खाद्य) 16% रही, जो पिछले दस वर्षों में सबसे अधिक है।”

उन्होंने समझाया कि बैंकिंग क्षेत्र के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार के बिना यह संभव नहीं होता। लिक्विडिटी बढ़ी है, Provisioning Coverage Ratio (PCR) 2015 में 46.04% से बढ़कर मार्च 2024 में 92.99% हो गया है। पूंजी पर्याप्तता (Capital Adequacy) में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, CRAR मार्च 2015 में 11.45% से बढ़कर मार्च 2024 में 15.53% हो गया है। क्रेडिट जोखिम के लिए मैक्रो स्ट्रेस टेस्ट से पता चलता है कि बैंक अच्छी तरह से पूंजीकृत हैं और सभी बैंक प्रतिकूल तनाव परिदृश्यों में भी न्यूनतम पूंजी आवश्यकताओं का अनुपालन करते हैं।

निर्मला सीतारमण ने समझाया कि सुधारों के कारण, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की पूंजी (इक्विटी और बॉन्ड) जुटाने की क्षमता में सुधार हुआ है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वित्त वर्ष 2014-15 से वित्त वर्ष 2023-24 के बीच बाजार से ₹4.34 लाख करोड़ की पूंजी जुटाई है। पहले RBI के Prompt Corrective Action (PCA) ढाँचे के तहत रखे गए बैंकों ने महत्वपूर्ण सुधार दिखाया है, जिसके कारण सभी PCA प्रतिबंध हटा दिए गए हैं। कृषि ऋण वित्त वर्ष 2014-15 में 8.45 लाख करोड़ रुपये से 2.5 गुना बढ़कर वित्त वर्ष 2022-23 में 21.55 लाख करोड़ रुपए हो गया है।

कृषि क्षेत्र में किए गए कार्यों को लेकर उन्होंने कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना ने किसानों को समय पर और परेशानी मुक्त ऋण प्रदान किया है, जिसमें 7.36 करोड़ से अधिक सक्रिय KCC खाते हैं। 2020 से, जमा बीमा कवरेज सीमा 1 लाख रुपये से बढ़कर 5 लाख रुपए हो गई है। इसे आखिरी बार 1993 में 30,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपए किया गया था। सितंबर 2023 तक, 97.93% खाते और कुल कर योग्य जमा का 44.2% DICGC के तहत पूरी तरह से सुरक्षित है।

आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2013-14 के अंत में, केवल 92.94% खाते पूरी तरह से सुरक्षित थे और 31.2% कर योग्य जमा का बीमा किया गया था। एक मजबूत बैंकिंग क्षेत्र एक ऐसा जहाज है जिस पर अर्थव्यवस्थाएँ चलती हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि मोदी सरकार देश की बैंकिंग प्रणाली को मजबूत और स्थिर बनाने के लिए निर्णायक कदम उठाती रहेगी, ताकि 2047 तक विकसित भारत के विकास पथ पर बैंकों का समर्थन सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि वंशवादी दलों वाली यूपीए गठबंधन ने बैंकों का इस्तेमाल अपने ‘परिवार कल्याण’ के लिए किया गया, इसके विपरीत हमारी सरकार ने बैंकों का इस्तेमाल ‘जन कल्याण’ के लिए किया है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की मानें तो भारत में बैंकिंग के विस्तार के प्रयास दशकों तक विफल रहे, क्योंकि कॉन्ग्रेस ने बैंकों के राष्ट्रीयकरण से परे सीमित कदम उठाए, जिससे मुख्य रूप से शिक्षित और कुलीन वर्ग को लाभ हुआ। 2014 से पहले, बैंकिंग की पहुँच मुख्य रूप से शहरों तक ही सीमित थी। आजादी के 68 साल बीत जाने के बावजूद, 68% से भी कम आबादी के पास बैंक खाते हैं, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग को कर्जदारों पर निर्भर रहना पड़ता है, जो ऊँची दरें वसूलते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही थे जिन्होंने बैंकिंग सेवाओं तक व्यापक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए जन धन और मुद्रा जैसी समावेशी योजनाएँ शुरू कीं।

मोदी सरकार के अनुसार, उसने वित्तीय समावेशन सुनिश्चित करने में बैंकों को भागीदार माना है। 52 करोड़ से ज़्यादा प्रधानमंत्री जन धन योजना खाते हैं, जिनमें 2.31 लाख करोड़ रुपए से ज़्यादा जमा हैं। 55% से ज़्यादा जन धन खाते महिलाओं के हैं और 66% से ज़्यादा ग्रामीण इलाकों में हैं। कोविड के दौरान 20.64 करोड़ महिलाओं को सीधे उनके जन धन खातों में पैसे मिले। आज भारत भर में लगभग सभी नागरिकों के पास 5 किलोमीटर के दायरे में बैंकिंग टचपॉइंट्स तक पहुँच है।

वहीं JAM Trinity पीएम मोदी की ‘गरीब कल्याण’ पहल की नींव बन गई है, जो DBT को सक्षम करके और लीकेज को खत्म करके जीवन में काफी सुधार ला रही है। जन सुरक्षा योजनाओं के माध्यम से, मोदी सरकार ने गरीबों को अनिश्चितताओं से बचाने के लिए बहुत कम प्रीमियम पर किफायती बीमा उपलब्ध कराया। पीएम सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) सालाना सिर्फ ₹20 के प्रीमियम पर ₹2 लाख का दुर्घटना बीमा कवर प्रदान करती है। इसके 44 करोड़ से अधिक लाभार्थी हैं और ₹2,688 करोड़ के दावों का निपटारा किया जा चुका है।

ठीक इसी तरह पीएम जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) सालाना ₹436 के प्रीमियम पर ₹2 लाख का जीवन बीमा कवर प्रदान करती है। इसके 20 करोड़ से अधिक लाभार्थी हैं और ₹15,671 करोड़ के दावों का निपटारा किया जा चुका है। अटल पेंशन योजना (APY) असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को एक स्थिर पेंशन प्रदान करती है। इसके 6.5 करोड़ से अधिक ग्राहक हैं। उद्यमिता, स्वरोजगार और वित्तीय स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के लिए ऋण तक पहुंच आवश्यक है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार, बैंकों से औपचारिक ऋण तक पहुँच की कमी ने गरीबों और हाशिए पर पड़े लोगों को उच्च ब्याज दरों पर उधार लेने के लिए मजबूर किया, जिससे वे गरीबी और कर्ज के दुष्चक्र में फँस गए। यह प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PM Mudra Yojana) के माध्यम से था कि बैंकों ने 10 लाख रुपये तक के जमानत-मुक्त ऋण की पेशकश शुरू की। पीएम मोदी ने आश्वासन दिया कि जमानत की कमी के कारण ऋण देने से इनकार नहीं किया जाएगा, क्योंकि वे इन ऋणों के लिए गारंटर के रूप में खड़े हैं।

उन्होंने और आँकड़े बताते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PM Mudra Yojana) के तहत 48 करोड़ से ज़्यादा लोगों को 28 लाख करोड़ रुपए के लोन बाँटे गए हैं, जिनमें से 68% लोन महिलाओं को दिए गए हैं। लॉन्च के दौरान आलोचकों द्वारा जताई गई बेबुनियाद चिंताओं के बावजूद, मुद्रा के तहत एनपीए 3% से कम है, जो इस योजना की सफलता को दर्शाता है। इसी तरह, शहरी स्ट्रीट वेंडर्स को औपचारिक अर्थव्यवस्था में एकीकृत करने के लिए पीएम स्वनिधि (PM SVANidhi) की शुरुआत की गई।

78 लाख स्ट्रीट वेंडर्स (Street vendors) को 11,400 करोड़ रुपए से ज़्यादा के लोन बाँटे गए हैं, जिससे उनकी उच्च ब्याज दर वाले लोन पर निर्भरता कम हुई है। स्टैंड-अप इंडिया (Stand-up India) योजना ने एससी/एसटी व्यक्तियों और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने में मदद की है, जिसके तहत 2.28 लाख से ज़्यादा लाभार्थियों को 27,806 करोड़ रुपए के लोन बाँटे गए हैं। पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को सहायता देने के लिए पीएम विश्वकर्मा (PM Vishwakarma) योजना शुरू की गई है। यह 5% की रियायती ब्याज दर पर 2 लाख रुपये तक का क्रेडिट सपोर्ट देती है।

निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार औपचारिक बैंकिंग पहुँच का विस्तार करने के लिए समर्पित है। देशभर में कई क्रेडिट आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 8 लाख लाभार्थियों को ₹22,000 करोड़ के ऋण वितरित किए गए। मोदी सरकार ने अंत्योदय के सिद्धांत के अनुरूप ‘बैंक रहित लोगों को बैंकिंग’, ‘ वित्त रहित लोगों को वित्तपोषित’ किया है। केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार वित्तीय समावेशन को आगे बढ़ाने और वंचितों को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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