Homeविविध विषयअन्यखतरनाक चक्रवात से जूझकर भारतीय नौसेना ने बचाई 192+ लोगों की जान, हजारों को...

खतरनाक चक्रवात से जूझकर भारतीय नौसेना ने बचाई 192+ लोगों की जान, हजारों को पहुँचाई राहत सामग्री

इस चक्रवात में अधिकांश मौतें बीरा शहर में हुई हैं। यहाँ बिजली लाइनों के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद बंदरगाह हब और सोफाला प्रांत की लाइटें लगभग कट गई हैं। हवाई अड्डों को भी बंद कर दिया गया है।

भारतीय नौसेना के जवान केवल भारतीय सीमा की ही सुरक्षा के लिए तट पर नहीं रहते हैं बल्कि भारत से कई किलोमीटर दूर देशों में भी अपने पराक्रम का परचम लहराते हैं। इसका हालिया उदाहरण इस समय मोजाम्बिक में देखने को मिल रहा है। यहाँ पर भारतीय नौसेना के जवान खतरनाक चक्रवात का सामना कर रहे लोगों के लिए किसी मसीहे की तरह बनकर पहुँचे हैं।

विदेश मंत्रालय ने खुद अपने एक बयान में इस बात की जानकारी दी है कि मोजाम्बिक में राहत अभियान के चलते अब तक भारतीय सेना के लोगों ने वहाँ के 192 लोगों की जान को सुरक्षित बचा लिया है और अपने चिकित्सकीय शिविरों में ले जाकर 1,381 लोगों को स्वास्थ्य संबंधी सहायता दी है।

विदेश मंत्रालय ने बताया कि मोजाम्बिक के आग्रह पर भारत ने तत्काल कार्रवाई की और नौसेना की तीन पोतों (आईएनएस सुजाता, आईएनएस सारथी और आईएनएस शारदुल) को बीरा बंदरगाह भेज दिया। मंत्रालय द्वारा जारी बयान में बताया गया कि अब तक नौसेना के जवानों द्वारा 192 से अधिक लोगों को बचाया जा चुका है। साथ ही 1381 लोगों को मेडिकल मदद भी मुहैया कराई जा चुकी है।

इसके साथ ही देश की नौसेना ने भयानक चक्रवात से 36 भारतीयों को भी राहत दी है। इस चक्रवात में अधिकांश मौतें बीरा शहर में हुई हैं। यहाँ बिजली लाइनों के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद बंदरगाह हब और सोफाला प्रांत की लाइटें लगभग कट गई हैं। हवाई अड्डों को भी बंद कर दिया गया है।

बता दें पिछले शुक्रवार (मार्च 15, 2019) को मध्य मोजाम्बिक के तट से चक्रवात टकराने के कारण वहाँ तेज हवाएँ चलने लगीं थीं और भारी बारिश भी शुरू हो गई थी। इस प्राकृतिक आपदा ने देश से एक हिस्से को बुरी तरह से झकझोर कर रख दिया और कई हजार किमी तक का क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आ गया। अब तक इस चक्रवात से मरने वालों की संख्या लगभग 676 हो चुकी है। इसके अलावा मोजाम्बिक के क़रीब 90000 लोगों को आश्रय स्थलों में ले जाया गया है, जबकि हजारों अन्य बाढ़ के पानी में फँसे हुए हैं। बता दें कि भारत समेत यहाँ अन्य देशों ने भी राहत पहुँचाने का प्रयास किया है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘काफ़िर’ अब समंदर पार नहीं है.. कैसे 11वीं सदी का क्रूसेड बना नए पेंटागन की विचारधारा? डोनाल्ड ट्रंप और अमरीकी कल्चर वॉर

1095 में पोप अर्बन द्वितीय ने यरूशलम के लिए जिस धर्मयुद्ध का ऐलान किया था, आज डोनाल्ड ट्रंप के नए अमेरिका के पीछे वही विचार काम कर रहा है। ट्रंप के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और उनकी किताब 'The War on Warriors' से समझिए कि कैसे 1000 साल पुराना 'Deus Vult' का सिद्धांत आज अमरीकी राजनीति और कल्चर वॉर को चला रहा है।

‘मेविस्तान’ बनाने का सपना, अलवर-भरतपुर में हिंसा और फिर गाँधी-नेहरू का हस्तक्षेप: जानिए मेवात के उस इतिहास की पूरी कहानी, जिसने बदल दिया इलाके...

मेविस्तान की माँग, 1933 का गोविंदगढ़ संघर्ष, 1947 का अलवर-भरतपुर घटनाक्रम और गाँधी-नेहरू के हस्तक्षेप से जुड़ी मेवात की पूरी कहानी जानिए।
- विज्ञापन -