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12 लाख नए रोजगार, ₹11 लाख करोड़ के मोबाइल फोन का उत्पादन: मोदी सरकार की PLI स्कीम का कमाल

सैमसंग और एप्पल सहित 22 बड़ी कंपनियाँ अगले 5 साल में 11 लाख करोड़ रुपए के मोबाइल फोन्स का उत्पादन करेंगी। इनमें विदेशी के साथ-साथ भारतीय कंपनियाँ भी शामिल हैं। सरकार ने इसके लिए 41,000 करोड़ रुपए का...

केंद्रीय आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया है कि भारत में मोबाइल फोन्स के उत्पादन में बड़ी वृद्धि होने वाली है। सैमसंग और एप्पल सहित 22 बड़ी कंपनियाँ अगले 5 साल में 11 लाख करोड़ रुपए के मोबाइल फोन्स का उत्पादन करेंगी। इनमें विदेशी के साथ-साथ भारतीय कंपनियाँ भी शामिल हैं। सरकार ने इसके लिए 41,000 करोड़ रुपए का प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव (PLI: production-linked incentive) की व्यवस्था की है।

सबसे बड़ी बात ये है कि मोबाइल फोन्स कंपनियों के सक्रियता बढ़ाने और सरकारी प्रयासों के बाद देश में 12 लाख रोजगार सिर्फ़ इसी सेक्टर में पैदा होने वाले हैं। इनमें से 3 लाख प्रत्यक्ष रोजगार के मौके हैं जबकि 9 लाख अप्रत्यक्ष रूप से होंगे। मोबाइल फोन्स के मामले में वैल्यू अडिशन बढ़ कर 15-20% की मौजूद स्थिति से छलाँग लगा कर सीधा 35-40% पर चल जाएगा। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेन्टस के मामले मे ये आँकड़ा 45-50% होगा।

भारत 7 लाख करोड़ रुपए के मोबाइल फोन्स का निर्यात भी करेगा। इसके लिए जिन भी कंपनियों ने अप्लाई किया है, उन्हें भारत सरकार की तरफ से केन्द्रीय टेलीकॉम मंत्री रविशंकर प्रसाद ने धन्यवाद दिया। ताइवान, दक्षिण कोरिया, जर्मि और ऑस्ट्रिया सहित कई देशों के 22 मोबाइल फोन्स कंपनियों ने PLI स्कीम के तहत आने का फैसला लिया है। विदेशी कंपनियों में Samsung, Foxconn Hon Hai, Rising Star, Wistron और Pegatron शामिल हैं।

इसके तहत शर्त ये थी कि ये विदेशी कंपनियाँ 15,000 या उससे अधिक के मूल्य के मोबाइल फोन्स का उत्पादन करेगी। वहीं भारतीय कंपनियों के लिए ऐसा कोई भी प्राइस लिमिट नहीं रखा गया है। दुनिया भर में फिलहाल एप्पल 37% और सैमसंग 22% सेल्स की हिस्सेदारी रखता है। भारत सरकार की इच्छा है कि इन कंपनियों के उत्पादन भारत में बढ़े, जिससे यहाँ रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

उक्त प्रोपॉजल के बाद ये कंपनियाँ भारत में हजारों करोड़ रुपए का निवेश करेगी। इनमें चीन की एक भी कंपनी शामिल नहीं है। हालाँकि, उन सभी कंपनियों को भारत की सिक्योरिटी क्लियरेन्स के नियमों का पालन करना पड़ेगा। 2025 तक भारत में मोबाइल फोन्स की माँग कई गुना बढ़ने वाली है, ऐसे में आत्मनिर्भर भारत के तहत पहले से ही देश को पर्डक्शन हब बनाने की तैयारी चल रही है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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