Wednesday, January 26, 2022
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400 वर्षों में पहली बार… एक साथ दिखेंगे बृहस्पति और शनि: जानिए कब और कैसे देख सकेंगे आप ये सुनहरा दृश्य!

सोमवार को हमें 'Great Conjunction' देखने को मिलेगा। बृहस्पति और शनि इतने पास आ जाएँगे कि आप दोनों में भेद पहचान ही नहीं पाएँगे।

आज सोमवार (दिसंबर 21, 2020) को आकाश में अलग ही नजारा देखने को मिलने वाला है, जब दो गृह बृहस्पति और शनि एक दूसरे के इतने करीब आ जाएँगे कि पृथ्वी पर दोनों को अलग-अलग देखना मुश्किल हो जाएगा। वो एक ही पिंड की तरह दिखेंगे। इसे ‘Great Conjunction’ कहा जाता है। ये नजारा ‘Winter Solstice’ के दौरान देखने को मिलता है, जब सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध में अपने सबसे निचले बिंदु में दिखता है।

ये तब होता है, जब वो पृथ्वी के मकर रेखा के ऊपर सबसे दूर दक्षिणी बिंदु पर दिखाई देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये उत्तरी गोलार्द्ध में रहने वाले लोगों के लिए सबसे छोटा दिन होता है, लेकिन सबसे देरी से सूर्योदय और सबसे पहले सूर्यास्त वाला दिन नहीं होता है। ये दिन इस ‘Winter Solstice’ के दो हफ्ते पहले और दो हफ्ते बाद आता है। इस समय पृथ्वी के दीर्घ वृत्ताकार (पूर्ण वृत्त नहीं) परिक्रमण के कारण सूर्य के साथ उसकी दूरी घटती रहती है।

‘Great Conjunction’: जब ‘एकाकार’ दिखेंगे बृहस्पति और शनि

सूर्य हमेशा आकाश में एक ही बिंदु में स्थित नहीं रहता है। ये गर्मियों में ऊपर और सर्दियों में नीचे होता है। सोमवार को हमें ‘Great Conjunction’ देखने को मिलेगा। बृहस्पति और शनि इतने पास आ जाएँगे कि आप दोनों में भेद पहचान ही नहीं पाएँगे। आप नंगी आँखों से भी इस खगोलीय घटना को देख सकते हैं। लेकिन, ये आपके क्षेत्र में मौसम पर भी निर्भर करेगा। 2000 में भी ऐसा हुआ था, लेकिन तब दोनों ग्रहों के बीच दो पूर्ण चन्द्रमा की दूरी थी, इसीलिए वो इतने पास नहीं दिखे थे।

पिछले 400 वर्षों में ये दोनों ग्रह सबसे करीब आने वाले हैं। इसे ईसाई महजब में ‘क्रिसमस स्टार’ भी कहा गया है। हालाँकि, बृहस्पति और शनि हर 20 वर्षों बाद अपनी मार्गरेखा में करीब आते हैं, लेकिन इससे पहले ये 1623 में ही आज की तरह नजदीक आए थे। ये भी जानने लायक बात है कि यहाँ से दोनों भले करीब दिखें, लेकिन असल में वो इतने करीब आकर भी आकाश में लाखों कोस की दूरी पर स्थित होंगे।

आप सूर्यास्त के बाद इस नज़ारे को देख सकते हैं। ये अचानक से ख़त्म नहीं होगा, बल्कि कुछ दिनों तक रहेगा। गूगल ने भी डूडल बना कर अपने होमपेज पर इस घटना का उल्लेख किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जहाँ ‘Great Conjunction’ इस पर निर्भर करता है कि पृथ्वी, बृहस्पति और शनि की सूर्य के परिक्रमण के मार्ग में उसके साथ स्थिति क्या है, वहीं ‘Winter Solstice’ पृथ्वी की अक्ष पर उसके झुकाव पर निर्भर होता है।

इससे पहले सोमवार (दिसंबर 14, 2020) को साल 2020 का अंतिम सूर्यग्रहण (Solar Eclipse) लगा था, लेकिन ये भारत में नहीं दिखा। बता दें कि सूर्यग्रहण भी 3 प्रकार के होते हैं। ‘टोटल’ (पूर्ण) सूर्यग्रहण (Total Solar Eclipse) उसे कहते हैं, जिसे पृथ्वी के एक छोटे हिस्से से ही देखा जा सकता है। आकाश में अँधेरा छा जाता है, जैसे रात हो गई हो। इस दौरान सूर्य, चाँद और पृथ्वी एकदम सीधी रेखा में होते हैं। जबकि दूसरे प्रकार के सूर्यग्रहण को आंशिक (Partial Solar Eclipse) सूर्यग्रहण कहते हैं।

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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