Sunday, January 23, 2022
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कोरोना के अल्फा और डेल्टा वैरिएंट को प्रभावी तरीके से बेअसर करती है भारतीय कौवैक्सीन: अमेरिकी शोध संस्थान का दावा

संस्था ने कहा कि कोवैक्सीन लगवाने वाले लोगों के रक्त सीरम के दो अध्ययनों के परिणाम बताते हैं कि यह वैक्सीन ऐसे एंटीबॉडी विकसित करता है, जो सार्स-कोव-2 (SARS-CoV-2) के बी.1.1.7 (अल्फा) और बी.1.617 (डेल्टा) स्वरूपों को प्रभावी तरीके से बेअसर करते हैं।

भारत की स्वदेशी कंपनी भारत बॉयोटेक द्वारा बनाई गई कोरोना वैक्सीन कोवैक्सीन (COVAXIN) कोविड-19 वायरस के अल्फा और डेल्टा वैरिएंट को प्रभावी तरीके से बेअसर करती है। अमेरिका के शीर्ष स्वास्थ्य शोध संस्थान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) ने इस पर मुहर लगा दी है। एनआईएच (NIH) ने बताया कि दो शोधों के डाटा के आधार पर ये दावा किया जा रहा है।

संस्था ने कहा कि कोवैक्सीन लगवाने वाले लोगों के रक्त सीरम के दो अध्ययनों के परिणाम बताते हैं कि यह वैक्सीन ऐसे एंटीबॉडी विकसित करता है, जो सार्स-कोव-2 (SARS-CoV-2) के बी.1.1.7 (अल्फा) और बी.1.617 (डेल्टा) स्वरूपों को प्रभावी तरीके से बेअसर करते हैं। ये स्वरूप सबसे पहले ब्रिटेन और भारत में पाए गए थे। SARS-CoV-2 एक ऐसा वायरस है, जो Covid-19 संक्रमण का कारण बनता है।

कोवैक्सिन Covaxin में सार्स-सीओवी-2 (SARS-CoV-2) के एक अक्षम रूप को शामिल किया गया है, जो अपनी प्रति नहीं बना सकता है, लेकिन वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बनाने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करता है। एनआईएच (NIH) ने कहा कि वैक्सीन के दूसरे चरण के ट्रायल के परिणाम बताते हैं कि यह सुरक्षित है। उन्होंने बताया कि कोवैक्सिन के तीसरे चरण के ट्रायल के सुरक्षा संबंधी आँकड़े इस साल के अंत में उपलब्ध हो जाएँगे।

एनआईएच ने कहा कि इसी बीच अध्ययन से पता चला है कि तीसरे चरण के ट्रायल से अप्रकाशित अंतरिम परिणाम से संकेत मिलता है कि यह टीका लक्षण वाले संक्रमण के खिलाफ 78 प्रतिशत प्रभावशाली है। यह गंभीर कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ 100 प्रतिशत प्रभावशाली और बिना लक्षण वाले संक्रमण के खिलाफ 70 प्रतिशत प्रभावशाली है।

शीर्ष अमेरिकी शोध संस्थान ने कहा, ”उसकी वित्तीय मदद से विकसित एक सहायक औषधि ने अत्यधिक प्रभावशाली कोवैक्सीन की सफलता में योगदान दिया है।” मालूम हो कि इसे भारत एवं अन्य स्थानों में अब तक लगभग दो करोड़ 50 लाख लोगों को लगाया जा चुका है। सहायक औषधियाँ प्रतिरक्षा क्षमता और टीके की प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए उसके हिस्से के रूप में तैयार की जाती हैं।

संक्रामक रोगों के राष्ट्रीय संस्थान (एनआईएआईडी) के निदेशक एंथनी एस फाउची ने कहा कि एक वैश्विक महामारी को समाप्त करने के लिए वैश्विक स्तर पर कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने आगे कहा कि मुझे खुशी है कि एनआईएआईडी के समर्थन से अमेरिका में विकसित सहायक औषधि भारत में लोगों के लिए उपलब्ध एक प्रभावशाली कोविड-19 टीके का हिस्सा है।

Covaxin, Alhydroxiquim-II में इस्तेमाल किए जाने वाले सहायक को NIAID एडजुवेंट डेवलपमेंट प्रोग्राम के समर्थन से बॉयोटेक कंपनी ViroVax LLC ऑफ लॉरेंस, कैनसस द्वारा एक लैब में खोजा गया और इसका ट्रायल किया गया था। एलहाइड्रॉक्सिकिम-II (Alhydroxiquim-II) संक्रामक रोगों के खिलाफ अधिकृत टीके में पहला सहायक है, जो रिसेप्टर्स टीएलआर 7 और टीएलआर 8 को सक्रिय करता है। यह वायरस के प्रसार को रोकने और सभी को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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