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यूपी: 20 साल पहले स्वास्थ्य विभाग में फर्जीवाड़े से नौकरी पाने वाले 64 बर्खास्त, 18 साल से चल रही जाँच खत्म

सीएमओ ओपी तिवारी ने बताया कि 1996 से 1998 के बीच ग्रेड-4 के पदों पर 64 लोगों को धोखाधड़ी से नियुक्त किया गया था। वे तभी से अपना वेतन ले रहे थे और इनमे से कुछ को पदोन्नत भी किया गया था, जो कि कुछ वर्तमान में क्लर्क के रूप में स्वास्थ्य विभाग के अंदर कार्य कर रहे थे।

उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने 64 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है। इन्होंने करीब 20 साल पहले फर्जीवाड़े से नौकरी पाई थी। 18 साल से मामले की जॉंच चल रही थ्ज्ञी। मिर्जापुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ओपी तिवारी ने यह जानकारी दी।

सीएमओ ओपी तिवारी ने शनिवार (13 जून, 2020) को बताया कि 1996 से 1998 के बीच ग्रेड-4 के पदों पर 64 लोगों को धोखाधड़ी से नियुक्त किया गया था। वे तभी से अपना वेतन ले रहे थे और इनमे से कुछ को पदोन्नत भी किया गया था, जो कि कुछ वर्तमान में क्लर्क के रूप में स्वास्थ्य विभाग के अंदर कार्य कर रहे थे।

18 वर्षों से जाँच चल रही थी कि नौकरी पाने के लिए किन फर्जी तरीकों का इस्तेमाल किया गया था। इस मामले में बीते बुधवार (10 जून, 2020) को सरकार ने आर्थिक अपराध शाखा वाराणसी ने इस मामले में रिपोर्ट पेश की थी। इसके बाद ही स्वास्थ्य विभाग ने सभी 64 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया था।

सीएमओ ने अपने बयान में कहा कि पूछताछ के दौरान पता चला कि आरोपित कर्मचारियों ने नौकरी पाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था। इसके बाद सभी जिलों के सीएमओ को पत्र भेजकर जानकारी दे दी गई, जहाँ कर्मचारी विभाग में तैनात थे।

सीएमओ के मुताबिक यह मामला 2002 में सरकार के संज्ञान में तब आया कि जब एक ऑडिट टीम ने उनकी सर्विस बुक माँगी थी, लेकिन वे सर्विस बुक देने में नाकाम रहे। इसके बाद टीम को शक हुआ और सरकार को जाँच शुरू करने के लिए एक पत्र लिखा और इसी के साथ 18 साल की लंबी जाँच के बाद विभाग ने गलत तरीके से नौकरी पाने वालों का खुलासा कर दिया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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