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क्या है IPS पूरन कुमार और ASI संदीप लाठर की आत्महत्या का मामला, सुसाइड नोट कानून की नजर में कितना अहम: खुद की ही जान ले लेने का क्या है मनोविज्ञान?

एडीजीपी वाई पूरन कुमार के बाद एएसआई संदीप लाठर ने भी खुद को गोली मार कर जान दे दी है। संदीप कुमार आईपीएस पूरन कुमार के गनमैन के वसूली के आरोपों की जाँच टीम में शामिल थे।दोनों अधिकारियों ने सुसाइड नोट में प्रशासन में जातिवाद, करप्शन जैसे गंभीर आरोप लगाए

हरियाणा में एक हफ्ते के भीतर एक आईपीएस और एक एएसआई के आत्महत्या कर लेने के बाद पूरे प्रशासनिक महकमे में खलबली मची हुई है। सबसे गंभीर बात ये है कि दोनों ने प्रशासनिक अधिकारियों पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। कानून की नजर में सुसाइड नोट व्यक्ति द्वारा दिया गया अंतिम वक्तव्य होता है, हालाँकि परिस्थितियों को भी इसके साथ देखा जाता है। ऐसे में दोनों अधिकारियों के सुसाइड नोट का काफी महत्व है। मनोवैज्ञानिक इसे मानसिक तनाव, डिप्रेशन और एंजाइटी से जोड़ रहे हैं।

आईपीएस पूरन कुमार ने कई आईएएस अधिकारियों पर जातिवाद, करप्शन समेत कई आरोप लगाए, वहीं एएसआई ने आईपीएस पूरन कुमार और उनके परिवार पर करप्शन और जातिवाद का सहारा लेने का आरोप लगाया। दोनों ने ही जान देने से पहले सुसाइड नोट में सारी जानकारी दी। एएसआई संदीप कुमार लाठर ने एक वीडियो भी बनाया है।

एएसआई संदीप लाठर और आईएएस पूरन कुमार के ‘फाइनल नोट’ की तुलना

एएसआई संदीप लाठर ने अपने सुसाइड नोट में दिवंगत आईपीएस पूरन कुमार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। एएसआई के मुताबिक पूरन कुमार के खिलाफ बहुत से सबूत मौजूद हैं। संदीप ने लिखा है कि भ्रष्टाचारी परिवार को नहीं छोड़ा जाए।

पूरन कुमार की तरह अपने सुसाइड नोट पर संदीप लाठर ने ‘फाइनल नोट’ लिखा। वीडियो में वह कहते हैं, ”मैं भगत सिंह का भक्त हूं. ये लड़ाई अधूरी नहीं छोड़ी जाएगी. अगले जन्म में भी इसे पूरा करूंगा।” उन्होंने पूरन कुमार और उनके परिवार की संपत्ति की जाँच की माँग की है।

उन्होंने कहा है कि पूरन कुमार ने अपने मातहत आने वाले कई ईमानदार अफसरों को फँसाया। उनका ट्रांसफर करवाया। अपने पसंद के अधिकारियों को लगाए। कई महिला अफसरों के यौन शोषण किए गए। भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी हैं और पूरन कुमार के खिलाफ शिकायत हुई थी। परिवार को बचाने के लिए उन्होंने जान दी।

एएसआई संदीप ने पूरन कुमार की आईएएस पत्नी और विधायक साले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, संदीप लाठर ने नोट में लिखा-“पूरन कहते थे कि मेरा कुछ नहीं बिगड़ेगा. घरवाली आईएएस है, साला एमएलए है और परिवार एससी आयोग में है.”

एएसआई ने कहा, “आईपीएस पूरन कुमार ने सदर थाना मर्डर केस में पैसे लिए। राव इंद्रजीत को बचाने के लिए 50 करोड़ की डील की गई। ” उन्होंने कहा कि पूरन कुमार अपनी जाति के भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण देते थे।

दरअसल आईपीएस पूरन कुमार के करीबी गन मैन सुशील कुमार की गिरफ्तारी में एएसआई संजीव कुमार का अहम रोल था। गन मैन सुशील को वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उस पर शराब कारोबारी से पैसे की उगाही के आरोप हैं। शराब कारोबारी ने वीडियो जारी कर आईपीएस पूरन कुमार पर वसूली के आरोप लगाए थे। इसकी जाँच चल रही है।

एडीजीपी पूरन कुमार ने अपने सुसाइड नोट में इसकी जानकारी देते हुए आलाधिकारियों द्वारा फँसाए जाने की बात कही है। उन्होंने मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी और डीजीपी समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों पर जातिगत प्रताड़ना, अपमानित करने और भ्रष्टाचार के केस में फँसाने के आरोप लगाए।

करीब 1 दर्जन अधिकारियों और पूर्व अधिकारियों का नाम लिखकर पूरन कुमार ने अपने सुसाइड नोट में लिखा, “मैं अब नहीं सह सकता, जो लोग मुझे इस स्थिति तक पहुँचाया कि मैं जीना नहीं चाहता, वही मेरी मौत के जिम्मेदार हैं।” उन्होंने अपने साथ प्रोमोशन, पोस्टिंग और सामाजिक बहिष्कार तक के आरोप लगाए।

आईपीएस पूरन कुमार ने जिस डीजीपी पर प्रताड़ना का आरोप लगाया, उसे एएसआई संदीप लाठर ने ईमानदार अधिकारी कहा। उन्होंने कहा, “राज्य में कई आईएएस अफसर भ्रष्ट हैं, लेकिन बीजेपी सरकार में कुछ ईमानदार अधिकारी हैं, जिन्होंने भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की कोशिश की। डीजीपी साहब ईमानदार और निडर हैं।”

सुसाइड नोट का कानूनी महत्व

दोनों पुलिस अधिकारियों ने खुद को गोली मारने से पहले सुसाइड नोट लिखा। कानून की नजर में डाइंग डिक्लिरेशन ( dying declaration) यानी मरने से पहले कही गई बातों का काफी महत्व होता है। ये कोर्ट में सबूत के तौर पर स्वीकार किया जा सकता है। इसका महत्व उस वक्त और बढ़ जाता है, जब व्यक्ति की मौत हो जाती है। ऐसा इसलिए कहा जाता है, क्योंकि माना जाता है कि व्यक्ति मरने से पहले झूठ नहीं बोलता। ये अहम सबूत बन सकता है, अगर झूठ बोलने का कोई कारण न नजर आए।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 32(1) के तहत यह मान्य है। इसमें कहा गया है कि जब कोई व्यक्ति अपनी मृत्यु या मृत्यु के लिए जिम्मेदार किसी भी परिस्थिति के बारे में बताता है, तो उन मामलों में ये प्रासंगिक होता है।

दोनों अधिकारियों के आत्महत्या के मामले में ये साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। जाँच के दौरान सच्चाई उजागर करने में ये सबूत के तौर पर पेश किया जा सकता है और इस मामले में अहम भूमिका निभा सकता है।

क्या कहता है सुसाइड को लेकर मनोविज्ञान

दिल्ली यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान के प्रोफेसर नवीन कुमार ने ऑपइंडिया से बात करते हुए आत्महत्या करने की वजहों पर प्रकाश डाला। उनका कहना है कि आत्महत्या करना एक ऐसी मानसिक स्थिति है, जब व्यक्ति खुद को कई समस्याओं से घिरा महसूस करता है और उसका समाधान खुद को खत्म करने में पाता है। उनका कहना है, “आम तौर पर सुसाइड करना, तुरंत का निर्णय नहीं होता है। ये कुछ दिनों से दिमाग में चल रहा होता है। हो सकता है कि पूरन कुमार या संदीप लाठर डिप्रेशन या एंजाइटी के शिकार हों। मानसिक तौर पर तनावग्रस्त हों।”

मनोवैज्ञानिक प्रोफेसर कुमार का मानना है कि पुलिस विभाग में काम करने वाले लोगों पर अक्सर अपने काम को लेकर कई तरह के दबाव होते हैं। उन्हें राजनीतिक परिस्थितियों का भी सामना करना पड़ता है। कई बार न चाहते हुए भी वैसे काम करने पड़ जाते हैं, जो वह नहीं करना चाहता। इससे कुंठा घर कर जाती है।

आईपीएस पूरन कुमार और एएसआई संदीप लाठर को लेकर ऐसा माना जा सकता है कि विभागीय परिस्थितियाँ उनके अनुकूल नहीं रही होंगी। ऐसा उन्होंने अपने सुसाइड नोट में भी लिखा है। घर बाहर अपने मन की बात वो किसी से शेयर नहीं कर पा रहे होंगे। मनोबल लगातार गिरता जा रहा होगा, नकारात्मकता हावी हो गई होगी। इसलिए ये कदम उठाया होगा।

इन परिस्थितियों से बचने के लिए दिनचर्या में बदलाव, बातों को शेयर करना, मनोरोग विशेषज्ञों से परामर्श लेना जरूरी होता है। डिप्रेशन, एंजाइटी का गरीबी या आर्थिक हालत से संबंध नहीं होता। ये किसी भी वजह से ये हो सकता है।

(आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है। अगर आप भी तनाव से गुजर रहे हैं, तो भारत सरकार की हेल्पलाइन नंबर 1800 233 3330 पर मदद ले सकते हैं। आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए। दिनचर्या में बदलाव करना चाहिए।)

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रुपम
रुपम
रुपम के पास 20 साल से ज्यादा का पत्रकारिता का अनुभव है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा। जी न्यूज से टेलीविज़न न्यूज चैनल में कामकाज की शुरुआत। सहारा न्यूज नेटवर्क के प्रादेशिक और नेशनल चैनल में टेलीविज़न की बारीकियाँ सीखीं। सहारा प्रोग्रामिंग टीम का हिस्सा बनकर सोशल मुद्दों पर कई पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया। एडिटरजी डिजिटल हिन्दी चैनल में न्यूज एडिटर के तौर पर काम किया।

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