Sunday, April 21, 2024
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ईसाई बन रहे रोहिंग्या और अफगान मुस्लिम, पर क्या मिलेगा CAA का फायदा, बन जाएँगे भारतीय नागरिक?

नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) 10 जनवरी 2020 को लागू हुआ था। यह पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के छह धार्मिक उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों (हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई) को भारतीय नागरिकता प्रदान करता है।

भारत में रह रहे अफगान और रोहिंग्या मुस्लिम नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) का फायदा लेने के मकसद से ईसाई बन रहे हैं। उनका मानना है कि इससे भारतीय नागरिकता लेने की उनकी राह आसान हो जाएगी।

‘द इकोनॉमिक टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटनाक्रम से वाकिफ केंद्रीय एजेंसियों ने सरकार को अवगत कराया है कि अफगान मुस्लिमों के ईसाई धर्म में परिवर्तित होने के लगभग 25 मामले हाल में सामने आए हैं।

दक्षिणी दिल्ली में एक अफगान चर्च के प्रमुख, आदिब अहमद मैक्सवेल ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया कि सीएए के बाद, धर्म परिवर्तन कर ईसाई बनने वाले अफगान मुस्लिमों की संख्या में तेजी आई है।

CAA रोहिंग्या मुस्लिमों को भारतीय नागरिक नहीं बनाता

यहाँ यह बताना आवश्यक है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) 10 जनवरी 2020 को लागू हुआ था। यह पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के छह धार्मिक उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों (हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई) को भारतीय नागरिकता प्रदान करता है।

चूँकि, रोहिंग्या अवैध प्रवासी हैं, जिन्होंने बांग्लादेश के माध्यम से भारतीय भूमि में प्रवेश किया है, इसलिए भारत सरकार ने उन्हें स्वीकार करने और उन्हें भारतीय नागरिकता देने से इनकार कर दिया है। इस प्रकार से भारत रोहिंग्याओं को स्वीकार करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानदंडों से भी बाध्य नहीं है।

पिछले साल दिसंबर में नागरिकता संशोधन विधेयक (जो कि अब अधिनियम बन चुका है) बहस के दौरान, गृह मंत्री अमित शाह ने देश में रोहिंग्याओं को स्वीकार करने के लिए स्पष्ट रूप से मना कर दिया था। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि शरणार्थियों पर अंतरराष्ट्रीय कानून भारत पर एक संप्रभु देश के रूप में बाध्यकारी नहीं होंगे।

भारत रोहिंग्या मुस्लिमों को स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं है

भारत शरणार्थियों पर हुए 1951 के कन्वेंशन, और न ही 1967 के किसी प्रोटोकॉल का हिस्सा है। इसलिए, कोई भी अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन भारत के लिए बाध्यकारी नहीं है। इसके बावजूद कि भारत अंतरराष्ट्रीय समझौतों को ध्यान में रखता है। रोहिंग्या आर्थिक लाभ हेतु भारत पहुँचने के लिए बांग्लादेश को एक सुरक्षित ठिकाने की तरह इस्तेमाल करते आए हैं। इस प्रकार, यह स्पष्ट रूप से, भारत में प्रवेश करने पर उन्हें आर्थिक प्रवासी बनाता है, ना कि अल्पसंख्यकों पर उत्पीड़ित प्रवासी।

अफगान मुस्लिम और रोहिंग्या भारत में अवैध रूप से रहते आए हैं

चूँकि इन अवैध अप्रवासियों को पता है कि उन्हें भारतीय नागरिकता नहीं दी जाएगी, इसलिए वे अब ईसाई धर्म अपना रहे हैं। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, दिल्ली में 150,000-160,000 अफगान मुस्लिम रहते हैं।

इसके अलावा, आधिकारिक अनुमान बताते हैं कि लगभग 40,000 रोहिंग्या मुस्लिम पूरे भारत में अवैध रूप से रह रहे हैं, जिनमें सबसे अधिक संख्या जम्मू और कश्मीर में है। इन प्रवासियों की एक बड़ी तादाद 2012 से पहले भारत में रह रही है और अब ईसाई धर्म अपनाते हुए बांग्लादेश से होने का दावा कर रही है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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