Tuesday, May 21, 2024
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असम: महादेव टीला पर जुटे हिंदू, फिर से शिवलिंग किया स्थापित; ईसाइयों ने पूजा स्थल को अपवित्र कर काट दिया था पवित्र बरगद

चौधरी के मुताबिक 100 से ज्यादा हिंदू महादेव टीला पर गए और वहाँ उन्होंने पूजा-अर्चना की। प्रार्थना और मंत्रोच्चार के बीच वहाँ फिर से शिवलिंग को स्थापित किया गया और एक नया बरगद का पेड़ भी लगाया गया।

हाल ही में असम के कछार की कटिगोरा में एक हिंदू धार्मिक स्थल को खासी ईसाई समुदाय द्वारा अपवित्र करने का मामला सामने आया था। ऑपइंडिया ने 24 नवंबर को अपनी रिपोर्ट में बताया था कि कैसे ईसाई समुदाय ने हिंदुओं की भावनाओं को आहत करते हुए एक शिवलिंग और त्रिशूल को उखाड़ दिया और सदियों पुराने (250 साल) पवित्र बरगद के पेड़ को काट दिया था।

इस मामले की तह तक जाने के लिए ऑपइंडिया ने हिंदू रक्षा दल के एक सदस्य से संपर्क किया। शुभाशीष चौधरी ने हमें बताया कि मणिपुर के हिंदुओं ने हिंदू रक्षा दल और हिंदू छात्र संघ जैसे हिंदू संगठनों के सदस्यों की मदद से असम के महादेवटीला में फिर से पूजा करना शुरू कर दिया है। इसे 17 नवंबर को खासी ईसाई समुदाय ने कथित तौर पर अपवित्र कर दिया था। चौधरी के मुताबिक, (29 नवंबर, 2021) को 100 से ज्यादा हिंदू महादेव टीला पर गए और वहाँ उन्होंने पूजा-अर्चना की। प्रार्थना और मंत्रोच्चार के बीच वहाँ फिर से शिवलिंग को स्थापित किया गया और एक नया बरगद का पेड़ भी लगाया गया। इस पूजा में स्थानीय हिन्दुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

चौधरी ने यह भी बताया कि इस दौरान हिंदू छात्र संघ, हिंदू रक्षा दल और आरएसएस के सदस्यों के साथ मणिपुरी हिंदू और महादेव टीला सेवा समिति लोग मौजूद थे।

बता दें कि हिंदू रक्षा दल और हिंदू छात्र संघ के सदस्यों ने सोमवार (22 नवंबर, 2021) को कछार में उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपकर असम के कटिगोरा के महादेव टीला में एक हिंदू धार्मिक स्थल को अपवित्र करने वाले खासी ईसाई समुदाय के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की थी। सौंपे गए ज्ञापन में हिन्दू संगठनों ने भविष्य में इस तरह के कामों को दोबारा दोहराने से बचने के लिए शिवलिंग और त्रिशूल को पहले की तरह स्थापित करते हुए लोहे की रेलिंग से घेरने की माँग भी की थी। जिस जगह पर यह घटना हुई, वहाँ खासी समुदाय के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं, जिनमें से 85 फीसदी ने ईसाई धर्म अपना लिया है। हिंदू समूह ने अपने ज्ञापन में हमले के पीछे कुछ खासी ईसाइयों का हाथ होने का आरोप लगाया था। मणिपुर के हिंदुओं ने भी इसका विरोध किया था। उन्होंने वन विभाग और कछार पुलिस थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने उन्हें कुछ दिन इंतजार करने को कहा था, लेकिन स्थानीय लोगों का ​कहना है कि पुलिस इस मामले में कुछ नहीं कर रही है।

ऑपइंडिया ने हिंदू छात्र संघ के अनिंदा देव से भी संपर्क किया था, जिन्होंने इस मामले में पुलिस की उदासीनता का आरोप लगाया था। देव ने कहा था कि स्थानीय पुलिस खासी ईसाई समुदाय के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। इसकी बजाए उन्होंने स्थानीय हिंदुओं को ईसाइयों से दूर रहने की धमकी दी थी। ऑपइंडिया ने स्थानीय उपायुक्त से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। इस बीच कछार के एसपी रमनदीप कौर ने कहा, “आपको जो सूचना मिली है वह गलत है। यहाँ एक बरगद का पेड़ था, जिसकी स्थानीय लोग पूजा करते थे। वन अधिनियम (Forest Act) के तहत मामला दर्ज कर स्थानीय एसआई मामले की जाँच कर रहे हैं, ताकि पता लगाया जा सके कि यह किसी शरारती तत्व का काम है या फिर अनजाने में पेड़ को काटा गया।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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