Homeदेश-समाजमाँ दुर्गा की मंदिर में घुसे, प्रतिमा की ऊँगलियाँ तोड़ी, चक्र फेंका-उखाड़ दिया ध्वज:...

माँ दुर्गा की मंदिर में घुसे, प्रतिमा की ऊँगलियाँ तोड़ी, चक्र फेंका-उखाड़ दिया ध्वज: हिंदू संगठनों का प्रदर्शन, बरेली पुलिस ने दर्ज की FIR

पुजारी निर्मान सिंह ने बताया है कि मंगलवार को जब सुबह वे मंदिर आए तो माँ दुर्गा की मूर्ति के बाएँ हाथ की ऊँगलियाँ और सीमेंट से बना चक्र असामाजिक तत्वों द्वारा तोड़ दिया गया था। प्रतिमा का मुकुट भी निकाल कर फर्श पर फेंक दिया गया था।

उत्तर प्रदेश के बरेली में एक मंदिर में घुस कर मूर्तियों को क्षतिग्रस्त करने का मामला सामने आया है। यह मंदिर दुर्गा माता का है। प्रतिमा की ऊँगलियों को तोड़ दिया गया। चक्र फेंक दिया गया। हिंदू संगठनों ने घटनास्थल पर पहुँच कर विरोध-प्रदर्शन किया। पुजारी की तहरीर पर पुलिस ने FIR दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। घटना मंगलवार (23 मई 2023) की है।

घटना बरेली के थाना हाफिजगंज इलाके की है। मंदिर गाँव रिठौरा में बना है। यहाँ के पुजारी निर्मान सिंह ने पुलिस में घटना की शिकायत दर्ज करवाई है। निर्मान सिंह के मुताबिक वे मंदिर में रोज सुबह की पूजा और संध्या की आरती करने आते हैं। घटना के दिन का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि मंगलवार को जब सुबह वे मंदिर आए तो माँ दुर्गा की मूर्ति के बाएँ हाथ की ऊँगलियाँ और सीमेंट से बना चक्र असामाजिक तत्वों द्वारा तोड़ दिया गया था। प्रतिमा का मुकुट भी निकाल कर फर्श पर फेंक दिया गया था।

शिकायत कॉपी

शिकायत में बताया गया है कि मंदिर में लगे ध्वज को भी उखाड़ कर फेंक दिया गया था। मंदिर परिसर में लगे केले के पौधे को भी क्षतिग्रस्त किया गया है। शिकायत में स्थानीय निवासियों ने भी दस्तखत करते हुए आरोपितों पर कानूनी कार्रवाई की माँग की है। क्षतिग्रस्त मूर्तियों के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। घटना की जानकारी मिलती ही आसपास के श्रद्धालुओं के साथ मौके पर हिन्दू संगठन के कार्यकर्ता भी पहुँच गए। इन सभी ने पुलिस से आरोपितों की पहचान कर उन पर कड़ी कार्रवाई की माँग की।

इस मामले में बरेली पुलिस ने थाना हाफिजगंज में FIR दर्ज कर ली है। पुलिस का कहना है कि कानूनी कार्रवाई की जा रही है। आरोपित की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। फ़िलहाल अभी तक किसी गिरफ्तारी की सूचना नहीं है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -