Monday, June 24, 2024
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‘दो मिनट के मजे’ की जगह ‘सेक्स की इच्छा’ पर कंट्रोल रखे लड़कियाँ: कलकत्ता हाई कोर्ट, लड़कों को भी नसीहत; नाबालिग से रेप में किया रिहा

"हमें कभी यह नहीं सोचना चाहिए कि केवल एक लड़की ही दुर्व्यवहार का शिकार होती है। क्योंकि लड़के भी दुर्व्यवहार का शिकार होते हैं। माता-पिता के मार्गदर्शन के अलावा, इन पहलुओं और रिप्रोडक्टिव हेल्थ और हाइजीन पर जोर देने वाली यौन शिक्षा हर स्कूल के पाठ्यक्रम का हिस्सा होनी चाहिए।"

कलकत्ता हाई कोर्ट ने कम उम्र में यौन संबंधों को लेकर किशोरों को नसीहत दी है। कहा है कि किशोर लड़कियों को यौन इच्छाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए। दो मिनट के सुख के लिए सेक्स से बचना चाहिए। वहीं लड़कों से महिलाओं की गरिमा का सम्मान करने को कहा है।

हाई कोर्ट के जस्टिस चित्तरंजन दास और पार्थ सारथी सेन ने 18 अक्टूबर 2023 को नाबालिग से रेप के दोषी एक युवक को बरी करते यह यह टिप्पणी की। युवक को जिससे रेप का दोषी ठहराया गया था, उससे उसके ‘रोमांटिक सम्बन्ध’ रहे थे।

इस दौरान अदालत ने किशोरों को सेक्स की शिक्षा देने पर भी जोर दिया। कहा कि इसकी शुरुआत घर से होनी चाहिए। माता-पिता पहले शिक्षक होने चाहिए। बच्चों, खासकर लड़कियों को बैड टच, अश्लील इशारों के बारे में बताना आवश्यक है। कम उम्र में सेक्स से स्वास्थ्य और बच्चे पैदा करने की क्षमता पर पड़ने वाले दुष्परिणामों के बारे में बताया जाना चाहिए।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, हाई कोर्ट ने इस तरह के मामलों में यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (POCSO) के इस्तेमाल पर भी चिंता व्यक्त की। 16 साल से अधिक उम्र के किशोरों के बीच सहमति से सेक्स की स्थिति में इसे अपराध की श्रेणी से हटाने का सुझाव दिया।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में यह भी कहा, “हमें कभी यह नहीं सोचना चाहिए कि केवल एक लड़की ही दुर्व्यवहार का शिकार होती है। क्योंकि लड़के भी दुर्व्यवहार का शिकार होते हैं। माता-पिता के मार्गदर्शन के अलावा, इन पहलुओं और रिप्रोडक्टिव हेल्थ और हाइजीन पर जोर देने वाली यौन शिक्षा हर स्कूल के पाठ्यक्रम का हिस्सा होनी चाहिए।”

कोर्ट ने बताया यौन इच्छाओं के जागृत होने का कारण

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा, “प्रमुख एंड्रोजेनिक स्टेरॉयड टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन है, जो मुख्य रूप से पुरुषों में वृषण (Testicle) और महिलाओं के अंडाशय (Ovaries) से और पुरुषों और महिलाओं दोनों में अधिवृक्क ग्रंथियों (Adrenal Glands) से थोड़ी मात्रा में स्रावित होता है। हाइपोथैलेमस और पिट्यूटरी ग्लैंड्स टेस्टोस्टेरोन की मात्रा को नियंत्रित करते हैं, जो मुख्य रूप से (पुरुषों में) सेक्स या कामेच्छा के लिए जिम्मेदार होता है।

इसका अस्तित्व शरीर में है, इसलिए जब संबंधित ग्रंथि उत्तेजना से सक्रिय हो जाती है, तो यौन इच्छा जागृत होती है। लेकिन संबंधित जिम्मेदार ग्रंथि का सक्रिय होना स्वचालित नहीं है। क्योंकि इसे हमारी दृष्टि, श्रवण, कामुक सामग्री पढ़ने और विपरीत लिंग के साथ बातचीत से उत्तेजना की आवश्यकता होती है। यौन इच्छा हमारी अपनी क्रियाओं से जागृत होता है।”

कलकत्ता हाई कोर्ट ने अपने फैसले में आगे यह भी कहा, “किशोरों में सेक्स सामान्य है लेकिन यौन इच्छा या ऐसी इच्छा की उत्तेजना व्यक्ति, शायद पुरुष या महिला, के कुछ कार्यों पर निर्भर होती है। इसलिए, यौन इच्छा बिल्कुल भी सामान्य और आदर्श नहीं है। अगर हम कुछ क्रियाएँ  बंद कर देते हैं, तो यौन इच्छा की उत्तेजना सामान्य नहीं रह जाती, जैसा कि हमारी चर्चा में वकालत की गई है।” इसलिए, पीठ ने इस मुद्दे पर ‘कर्तव्य/दायित्व आधारित दृष्टिकोण’ का प्रस्ताव रखा और किशोर महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए कुछ कर्तव्यों का सुझाव दिया। 

महिलाओं के लिए हाई कोर्ट के सुझाव 

यह प्रत्येक महिला का कर्तव्य/दायित्व है:

  1. वे अपने शरीर की रक्षा करें।
  2. अपनी गरिमा और आत्म-सम्मान की रक्षा करें।
  3. लैंगिक बाधाओं को परे रख अपने सम्पूर्ण विकास के लिए प्रयास करें।
  4. यौन इच्छाओं पर नियंत्रण रखें, क्योंकि समाज की नजरों में वे तब हार जाती हैं, जब मुश्किल से दो मिनट के यौन सुख का आनंद लेने के लिए तैयार हो जाती हैं।
  5. अपने शरीर की सीमाओं और उसकी निजता के अधिकार की रक्षा करें।

किशोर लड़कों के लिए हाई कोर्ट के सुझाव 

वहीं किशोर पुरुषों के हाई कोर्ट ने कहा, ”किसी युवा लड़की या महिला के उपरोक्त कर्तव्यों का सम्मान करना एक किशोर पुरुष का कर्तव्य है और उसे अपने दिमाग को एक महिला, उसकी मूल्यों, उसकी गरिमा, गोपनीयता और उसकी शारीरिक सीमाओं का सम्मान करना चाहिए।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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