Friday, July 30, 2021
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छत्तीसगढ़: वन भूमि अतिक्रमण को लेकर आदिवासी और ईसाई समुदायों में झड़प, मामले को जबरन दिया गया साम्प्रदयिक रंग

कुछ स्थानीय आदिवासी लोगों द्वारा कथित रूप से आदिवासी संस्कृति का पालन नहीं करने पर ईसाई परिवारों पर हमला किया गया था। कथित तौर पर आदिवासी ग्रामीणों ने ईसाई परिवारों से कहा कि यदि वे उनके साथ रहना चाहते है तो वे मूल देवताओं की पूजा करें।

छत्तीसगढ़ में बस्तर संभाग के कोंडागाँव जिले के कथित तौर पर वन भूमि अतिक्रमण के मुद्दे पर कुछ गाँवों के बीच आपस में झड़प का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, एक समूह के लोगों द्वारा 22 और 23 सितंबर को दूसरे समूह से संबंधित कुछ परिवारों के घरों को कथित तौर पर लूट लिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ स्थानीय आदिवासी लोगों द्वारा कथित रूप से आदिवासी संस्कृति का पालन नहीं करने पर ईसाई परिवारों पर हमला किया गया था। कथित तौर पर आदिवासी ग्रामीणों ने ईसाई परिवारों से कहा कि यदि वे उनके साथ रहना चाहते है तो वे मूल देवताओं की पूजा करें।

हालाँकि, इस मामले को लेकर जिला पुलिस ने कहा कि मुद्दा काकडाबेड़ा, सिंगनपुर और सिलाती गाँवों के दो समूहों के बीच वन भूमि अतिक्रमण का है, न कि समुदायों के बीच झगड़े का। पुलिस महानिरीक्षक (बस्तर रेंज) सुंदरराज पी ने कहा कि स्थिति को और अधिक बढ़ने से रोकने के लिए इलाके में पुलिस बल तैनात किया गया है।

इस मामले में पुलिस द्वारा अभी तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है क्योंकि घटनाओं के विवरण का पता लगाने के लिए प्रारंभिक जाँच की जा रही है। उन्होंने बताया कि कुछ परिवार ऐसे हैं जो पिछले 6 वर्षों से ईसाई धर्म का पालन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गाँवों में आदिवासी समुदाय के स्थानीय रीति-रिवाजों का पालन नहीं करने वाले ईसाई परिवारों के साथ कुछ मुद्दे थे।

आईजी ने आश्वासन दिया कि शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस सभी आवश्यक कानूनी कार्रवाई करेगी। उन्होंने बताया, “वरिष्ठ अधिकारी स्थिति के बारे में जानकारी होने के बाद बुधवार को मौके पर पहुँचे और ग्रामीणों को शांत किया। वर्तमान में स्थिति को काबू में कर लिया गया है।”

छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम के अध्यक्ष अरुण पन्नालाल ने दावा किया कि हिंसा पुलिस की मौजूदगी में हुई और कुछ परिवार रायपुर भाग गए हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण ईसाई परिवारों पर ईसाई धर्म छोड़ने या अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को मिलने वाले लाभों से वंचित करने का दबाव डाल रहे थे।

हालाँकि, कोंडागांव के एसपी सिद्धार्थ तिवारी ने सीसीएफ के उन दावों को खारिज कर दिया कि हिंसा पुलिस की मौजूदगी में हुई थी। उन्होंने कहा कि यह एक सांप्रदायिक हिंसा नहीं थी, बल्कि मामला भूमि अतिक्रमण से संबंधित था।

वहीं CCF के अध्यक्ष पन्नालाल ने एक रिटायर्ड हाईकोर्ट जज या जिला जज से उच्चस्तरीय जाँच के साथ-साथ ईसाई परिवारों के लिए 10-10 लाख रुपए के मुआवजे की माँग की है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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