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12 बजे रात नहीं, 8 बजे हॉस्टल से बाहर गई थी पीड़िता: दुर्गापुर में मेडिकल छात्रा से गैंगरेप केस पर अस्पताल का बयान, CM ममता बनर्जी पर उठे सवाल

दुर्गापुर के प्राइवेट मेडिकल कॉलेज छात्रा से गैंगरेप मामले में सीएम ममता बनर्जी ने झूठ बोला है। उन्होंने पीड़िता के हॉस्टल से बाहर निकलने का वक्त रात 12 बजे बताया। जबकि मेडिकल कॉलेज के रिकॉर्ड के मुताबिक वह रात 8 बजे खाना खाने बाहर गई थी।

दुर्गापुर के मेडिकल कॉलेज की छात्रा से हुए गैंगरेप मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ‘झूठ’ बोलने को लेकर सियासत गर्म है। ममता बनर्जी ने लड़की के रात 12 बजे एक लड़के के साथ बाहर जाने पर सवाल उठाया है। जबकि लड़की रात 8 बजे बाहर गई थी। अस्पताल के बाहर उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होनी चाहिए, न की सिर्फ मेडिकल कॉलेज की। ममता बनर्जी इस मामले पर भी राजनीति करती नजर आ रही हैं।

विपक्षी दलों और महिला अधिकार समूहों ने उन पर ‘पीड़िता को दोषी ठहराने’ का आरोप लगाया है। रविवार (12 अक्टूबर) को इस दर्दनाक घटना पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि लड़कियों को अपनी सुरक्षा के लिए रात में कॉलेज परिसर से बाहर निकलने से बचना चाहिए।

कोलकाता हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा, “लड़कियों को रात में कॉलेज से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्हें अपनी सुरक्षा भी करनी होगी।”

सीएम ममता बनर्जी ने कहा, “वह एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में पढ़ रही थी, तो जिम्मेदारी किसकी है? रात 12.30 बजे बाहर क्यों गई? जाँच चल रही है, लेकिन प्राइवेट मेडिकल कॉलेज को अपने छात्रों पर ध्यान देने की जरूरत है। खास तौर पर रात को छात्राओं को बाहर जाने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।”

इस बीच पीड़िता के पिता ने उसकी सुरक्षा के मद्देनजर उसे ओडिशा शिफ्ट करने को कहा है। उनका कहना है कि लड़की की जान खतरे में है।

ममता बनर्जी ने झूठ बोला- बीजेपी

बीजेपी ने सीएम ममता बनर्जी पर जनता को गुमराह करने और तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया। बीजेपी नेता अमित मालवीय ने ट्वीट कर पूछा है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लड़की के रात 12:30 बजे बाहर होने के बारे में कहा, जो गलत था। सच्चाई यह है कि आईक्यू सिटी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के अनुसार, लड़की रात 8 बजे बाहर गई थी, जो किसी भी मानक से उचित समय है।

दलित छात्रा के साथ कॉलेज परिसर में सामूहिक बलात्कार नहीं हुआ था। बल्कि उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी पुलिस और राज्य प्रशासन की है। मुख्यमंत्री ने मेडिकल कॉलेज पर दोष मढ़ने की कोशिश की।

मेडिकल कॉलेज के पास का वन क्षेत्र आपराधिक गतिविधियों का केन्द्र माना जाता है। यहाँ उचित स्ट्रीट लाइटिंग की व्यवस्था नहीं है। दुर्गापुर के स्थानीय लोग ये जानते हैं। पश्चिम बंगाल पुलिस इस क्षेत्र की सुरक्षित बनाने में विफल रही।

मेडिकल कॉलेज की छात्रा के साथ गैंगरेप

दुर्गापुर की एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज के दूसरे वर्ष की छात्रा के साथ गैंगरेप हुआ था। वह रात 8 बजे अपने पुरुष दोस्त के साथ खाना खाने बाहर गई थी। लड़की का कुछ लोगों ने पीछा किया और दोनों पर हमला किया। इस दौरान उसका दोस्त भाग गया, लेकिन लड़की का गैंगरेप किया गया।

पीड़िता ओडिशा की रहने वाली है। उसके पिता के मुताबिक, अब वह बार बार कहती है कि उसे जीने की इच्छा नहीं रही। उसे मर जाना चाहिए। कहीं ऐसा न हो कि वह खुद को नुकसान पहुँचा ले। इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपितों अपु बाउरी, फिरदौस शेख और शेख रियाजुद्दीन को गिरफ्तार किया है। जबकि चौथा आरोपित अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।

बंगाल की बिगड़ी कानून व्यवस्था पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। एमबीबीएस द्वितीय वर्ष की छात्रा के साथ हुआ सामूहिक बलात्कार भी राज्य की कानून व्यवस्था की पोल खोल रही है। कॉलेज के नजदीक का वह इलाका आपराधिक गतिविधियों का केन्द्र रहा है, तो पुलिस यहाँ चौकन्ना क्यों नहीं थी। क्यों यहाँ आपराधिक तत्व मौजूद थे।

बीजेपी का कहना है कि आगामी चुनाव को देखते हुए मुस्लिम समुदाय का समर्थन पाने के लिए ममता बनर्जी जाँच ठीक से न कराएँ और आरोपितों को रिहा करने के लिए क्षेत्र के मुस्लिम समुदाय के नेताओं से बातचीत करती हैं, तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी। उनकी राजनीतिक स्वार्थ के सामने एक महिला की जान और गरिमा की कोई कीमत नहीं है।

ममता बनर्जी का रेप को कमतर आँकने का इतिहास रहा

ममता बनर्जी ने एक बार फिर यौन उत्पीड़न के मामलों को कम आँकने की कोशिश की और विवादास्पद टिप्पणी की। पिछले कुछ वर्षों में, सीएम बनर्जी और उनकी टीएमसी के वरिष्ठ सदस्यों को बलात्कार की घटनाओं पर अपनी असंवेदनशील प्रतिक्रियाओं को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है।

सबसे अहम मामलों में एक 2012 का पार्क स्ट्रीट सामूहिक बलात्कार मामला था। 6 फरवरी 2012 को कोलकाता के पार्क स्ट्रीट से घर लौट रही एक एंग्लो-इंडियन महिला सुजेट जॉर्डन के साथ चलती कार में 5 लोगों ने रेप किया था।

खबर सामने आने के तुरंत बाद, टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने आरोपितो को क्लीन चिट दे दी। उन्होंने घटना को ‘शजानो घोटोना’ (मनगढ़ंत घटना) करार दिया, जो कथित तौर पर ‘सरकार को बदनाम करने के लिए रची गई थी।’

टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार समेत उनकी पार्टी के नेताओं ने पीड़िता के चरित्र पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए और घटना को ‘एक महिला और उसके मुवक्किल के बीच गलतफहमी’ बताया। 2015 में, कोलकाता की एक अदालत ने तीन आरोपियों को दोषी ठहराया, जिससे साबित हुआ कि हमला हुआ था।

2013 में, पश्चिम बंगाल विधानसभा में राज्य में बलात्कार के बढ़ते मामलों पर एक बहस के दौरान, मुख्यमंत्री ने इशारों-इशारों में कहा कि यह राज्य की बढ़ती आबादी के कारण है। उन्होंने बढ़ते बलात्कार के मामलों के लिए आधुनिकीकरण, शॉपिंग मॉल और मल्टीप्लेक्स की बढ़ती संख्या को भी ज़िम्मेदार ठहराया था।

इसी साल बर्धवान समेत दूसरे रेप मामले में भी उन्होंने आरोपों को दरकिनार किया। उस वक्त जाँच चल रही थी। उन्होंने विपक्ष पर बंगाल को बदनाम करने का आरोप लगाया

अप्रैल 2022 में, ममता बनर्जी उस समय विवादों में घिर गईं जब उन्होंने एक 14 वर्षीय लड़की के साथ हुए बलात्कार और हत्या के आरोपों को ‘प्रेम प्रसंग’ का मामला बताकर कमतर आँकने की कोशिश की। पीड़िता नदिया जिले के हंसखाली की रहने वाली थी।

आरोपी की पहचान तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के गजना ग्राम पंचायत सदस्य समर गौला के बेटे ब्रजगोपाल के रूप में हुई है।

11 अप्रैल 2022 को उन्होंने दावा किया, “एक आम आदमी के रूप में, मैं कह रही हूँ कि किसी को यह सबूत कहाँ से मिलेगा कि लड़की के साथ वास्तव में बलात्कार हुआ था या वह गर्भवती थी। या कोई और कारण था, जैसे किसी ने उसे पीटा था या वह किसी बीमारी से मर गई थी?”

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया, “निश्चित रूप से प्रेम संबंध था, उसके परिवार को इसके बारे में पता था, और उनके पड़ोसियों को भी। अब अगर कोई लड़की और लड़का एक-दूसरे से प्यार करते हैं, तो मैं उन्हें सजा नहीं दे सकती।”

यहाँ तक कि 2023 में, उत्तर दिनाजपुर के कालियागंज में मृत पाई गई एक 17 वर्षीय दलित लड़की के मामले में भी, बनर्जी ने इस घटना को कम करके आँका और कहा कि यह एक प्रेम संबंध के कारण हुई आत्महत्या थी। पुलिस जाँच पूरी होने से पहले ही उन्होंने कहा, “हमने व्हाट्सएप संदेश देखे हैं… प्रेम संबंध था।”

पीड़ितों को दोषी ठहराने का एक पैटर्न

पार्क स्ट्रीट से लेकर दुर्गापुर तक, बनर्जी के बयानों ने पुलिस व्यवस्था और महिला सुरक्षा में व्यवस्थागत कमियों को दूर करने के बजाय, पीड़ितों पर दोष मढ़ने की प्रवृति रही है। विपक्षी दलों और महिला संगठनों का कहना है कि उनकी बार-बार की गई टिप्पणियाँ ‘इनकार की एक खतरनाक संस्कृति’ को दर्शाती हैं जो पीड़ितों को आगे आने से हतोत्साहित करती है।

दुर्गापुर की जाँच जारी रहने के दौरान ममता बनर्जी के पीड़िता की हॉस्टल से निकलने की टाइमिंग को झूठ बता कर सियासी बवाल पैदा कर दिया है। ये न केवल एक जघन्य अपराध के बारे में, बल्कि सत्ता में बैठे उन लोगों की मानसिकता के बारे में भी सवाल खड़े करती है, जो महिलाओं की सुरक्षा को राज्य की बजाय अपनी ज़िम्मेदारी मानते हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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