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विरोध के आगे झुके पादरी: गुजरात के उमरपाड़ा में अवैध धर्मांतरण को बढ़ावा देने वाली चर्च निर्माण योजना रुकी- ग्राउंड रिपोर्ट

गाँव में हिंदू आबादी बहुत ज़्यादा है और हिंदू से ईसाई बने लोगों की संख्या लगभग न के बराबर है। इसके बावजूद, गाँव के बाहर एक खेत में चर्च बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई थी। जब गाँव के हिंदू लोगों को इस निर्माण के बारे में पता चला, तो उन्होंने जाँच-पड़ताल की। जाँच में यह सामने आया कि इस निर्माण कार्य के लिए न तो पंचायत से कोई परमिशन ली गई थी और न ही गाँव के लोगों को इस बारे में कोई जानकारी दी गई थी।

गुजरात के पूर्वी और दक्षिणी इलाकों, खासकर डांग और तापी जिलों में जबरन या अवैध धर्मांतरण (ईसाई मजहब में बदलने) का मुद्दा हमेशा गरमाया रहता है। पिछले कुछ सालों में इन क्षेत्रों में चर्चों की संख्या भी बहुत बढ़ गई है और आरोप लगते रहे हैं कि इनमें से ज्यादातर चर्च अवैध हैं।

ऐसा ही एक नया मामला हाल ही में सूरत के उमरपाड़ा स्थित वहार गाँव से सामने आया। इस गाँव में बिना किसी की परमिशन (अनुमति) लिए एक चर्च बनाने की तैयारी की जा रही थी। जब गाँव के हिंदू लोगों को इसकी खबर लगी तो उन्होंने इसका जोरदार विरोध किया और सरकारी अधिकारियों से शिकायत की। इस विरोध और शिकायत के बाद, चर्च का निर्माण कार्य फिलहाल रोक दिया गया है।

वहार गाँव में हिंदू आबादी बहुत ज़्यादा है और हिंदू से ईसाई बने लोगों की संख्या लगभग न के बराबर है। इसके बावजूद, गाँव के बाहर एक खेत में चर्च बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई थी। जब वहार गाँव के हिंदू लोगों को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने जाँच-पड़ताल की। जाँच में यह पता चला कि चर्च के निर्माण कार्य के लिए न तो पंचायत से कोई अनुमति (परमिशन) ली गई थी और न ही इस बारे में गाँव के लोगों को सूचित किया गया था।

चर्च बनने के कारण गाँव में धर्मांतरण की गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना को देखते हुए, गाँव के हिंदुओं ने इसका कड़ा विरोध किया। इसके बाद, पिछले काफी समय से जनजातीय क्षेत्रों में सक्रिय देव बिरसा सेना की भी इस मामले में एंट्री हुई। देव बिरसा सेना ने गाँव के प्रमुख हिंदू नेताओं के साथ मिलकर उमरपाड़ा के मामलतदार (राजस्व अधिकारी) को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में उन्होंने चर्च के निर्माण के खिलाफ अपनी बात रखी और मांग की कि इसे तुरंत रोका जाए। उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन शुरू कर देंगे।

एक्शन पर रिएक्शन: चर्च न बनाने का कमिटमेंट

ज्ञापन दिए जाने के बाद, उमरपाड़ा के मामलतदार (राजस्व अधिकारी) ने इस मामले को आगे की कार्रवाई के लिए कलेक्टर के पास भेज दिया। दूसरी तरफ, जब गाँव के हिंदू लगातार सक्रिय हो गए और विरोध बढ़ गया, तो चर्च का निर्माण शुरू करने की तैयारी कर रहे ईसाई पादरियों ने हार मान ली। उन्होंने गाँव के सरपंच और अन्य प्रमुख लोगों से मुलाकात की और चर्च न बनाने की लिखित गारंटी दी। इसके साथ ही, पादरियों ने गाँव वालों से विरोध में दिया गया ज्ञापन वापस लेने की भी माँग की।

गाँव में किसी भी तरह का अवैध चर्च निर्माण नहीं होगा, इसकी गारंटी मिलने के बाद गाँव के प्रमुख लोगों ने पहले विरोध में दिया गया ज्ञापन (आवेद्नपत्र) वापस ले लिया।

इस मामले पर ऑपइंडिया से बात करते हुए गाँव के एक प्रमुख व्यक्ति ने बताया कि गाँव में ईसाई आबादी बहुत कम होने के बावजूद, एक खेत में बिना परमिशन के चर्च बनाया जा रहा था, जिसका हमने विरोध किया। विरोध के बाद, उन्हें यह आश्वासन दिया गया है कि अब ऐसा कोई निर्माण नहीं किया जाएगा। इसके बाद ही, उन्होंने पहले दिया गया ज्ञापन वापस लिया है।

वहर गाँव के नेता आवेदन देने के लिए मामलातदार के ऑफिस पहुँचे

उमरपाड़ा के मामलतदार आरके चौधरी ने ऑपइंडिया को बताया कि यह गाँव का आपसी मामला था, जो अब समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत के दखल से यह विवाद खत्म हुआ है, इसलिए प्रशासन के स्तर पर अब कोई कार्रवाई करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि पहले जो विरोध ज्ञापन कलेक्टर को भेजा गया था, उसके साथ अब इस मामले के समाप्त होने की रिपोर्ट भी भेज दी जाएगी।

वहीं, देव बिरसा सेना के उमरपाड़ा अध्यक्ष चिराग वसावा ने एक बयान में कहा, “हम पूरे जनजातीय क्षेत्र में जनजातीय संस्कृति और रीति-रिवाजों के अस्तित्व को बचाने के लिए काम करते हैं।” उन्होंने आगे बताया कि वहार गाँव के लोगों ने उनके ध्यान में यह बात लाई थी कि गाँव में अवैध रूप से चर्च बन रहा है और भविष्य में वहाँ धर्मांतरण की गतिविधियाँ बढ़ सकती हैं।

चिराग वसावा, उमरपाड़ा, देव बिरसा सेना

देव बिरसा सेना के अध्यक्ष चिराग वसावा ने आगे बताया, “मामला हमारे पास आने के बाद, हमने गाँव वालों की मदद से ही मामलतदार को ज्ञापन सौंपा था। इसके बाद ग्राम पंचायत की बैठक में यह गारंटी दी गई है कि अब कोई चर्च नहीं बनाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर भविष्य में भी इस तरह की कोई अवैध गतिविधि की गई, तो देव बिरसा सेना इस मुद्दे को ज़ोर-शोर से उठाएगी।”

गौरतलब है कि पहले भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जहाँ पहले गाँव में अवैध रूप से चर्च बना दिया जाता है और फिर धीरे-धीरे वहाँ धर्मांतरण की गतिविधियाँ शुरू कर दी जाती हैं। तापी और डांग जैसे कई गाँवों में इसी तरह से लोगों की आबादी का स्वरूप बदल गया है। अब यह समस्या उत्तरी गुजरात की तरफ भी बढ़ रही है। लेकिन, इस बार स्थानीय हिंदुओं और संगठनों की सक्रियता के कारण, यह गाँव धर्मांतरण की चपेट में आने से फिलहाल बच गया है।

ये लेख मूल रूप से गुजराती भाषा में लिखा गया है। इसे पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।

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મેઘલસિંહ પરમાર
મેઘલસિંહ પરમાર
ઇતિહાસ-રાજકારણમાં રુચિ ધરાવતો, ઘટનાઓના ઊંડાણમાં જઈને બૃહદ પરિપેક્ષથી જોવામાં-લખવામાં વિશેષ રસ ધરાવતો પત્રકાર. ક્યારેક લેખક, ક્યારેક રિસર્ચર, ક્યારેક ફેક્ટચેકર.

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