Tuesday, July 27, 2021
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घर से फरार हुआ मूक-बधिर आदित्य, अब्दुल्ला बन कर लौटा: व्हाट्सएप्प-टेलीग्राम से ब्रेनवॉश, केरल से जुड़े तार

फिर वो उर्दू सीखने लगा। परिजनों ने मोबाइल खँगाला तो पता चला कि वो केरल के कुछ लोगों से संपर्क में है। केरल में इस्लामी कट्टरपंथियों की खबरें अक्सर आती थीं, इसीलिए माँ-बाप चिंतित रहने लगे।

इस्लामी धर्मांतरण गिरोह कई वर्षों से दिव्यांगों को भी निशाना बनाता रहा था, जिसकी परत अब खुल रही है। ऐसी ही एक कहानी उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित काकादेव हितकारी नगर के आदित्य की है, जो इस गिरोह का शिकार बन गया। धर्मांतरण के बाद आदित्य जब घर लौटा तो वो आदित्य नहीं, अब्दुल्ला था। वो घर में ही चोरी-छिपे 5 वक़्त की नमाज अदा किया करता था। जब घर वालों को इसकी भनक लगी तो मार्च 10, 2021 को वो फरार हो गया।

इसके दो दिन बाद कल्याणपुरी थाने में परिजनों ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की। इधर ATS ने मूक-बधिर लोगों का धर्मांतरण कराने वाले दो मौलानाओं को गिरफ्तार किया। हालाँकि, इसके एक दिन पहले ही आदित्य घर लौट चुका था। आदित्य को परिजन किसी से मिलने नहीं दे रहे हैं। वो खुद भी किसी से बात नहीं करना चाह रहा। आदित्य की माँ लक्ष्मी देवी ने अपने बेटे के कारण मूक-बधिर की भाषा सीखी थी।

लोगों ने बताया कि आदित्य के जन्म के बाद परिजन बेहद खुश थे और उसे पढ़ा-लिखा कर कुछ बनाने के सपने देख रहे थे, लेकिन बच्चे के मूक-बधिर होने की बात पता चली तो उन्हें धक्का लगा। माँ लक्ष्मी ने साइन लैंग्वेज सीखी। एक दिव्यांग स्कूल में नौकरी भी लग गई। बेटे के कारण वो इस भाषा में पारंगत हो गईं और यूट्यूब पर वीडियो भी अपलोड करने लगीं। आदित्य से वो इशारों में बात करती थीं।

आदित्य का एक भाई और एक बहन है। उन्होंने भी मूक-बधिर भाषा सीख ली थी, जिस कारण उन्हें भी आदित्य से बात करने में परेशानी नहीं होती थी। दोनों मौलानाओं ने पूछताछ में बताया कि नोएडा डेफ सोसाइटी में उन्होंने कई बच्चों का धर्मांतरण कराया। सोसाइटी के पेज पर लिखा है कि कानपुर स्थित ज्योति बधिर विद्यालय उनका आउटरिच पार्टनर है। इसी विद्यालय में आदित्य की माँ लक्ष्मी भी पढ़ाती थीं।

आदित्य की उम्र 24 साल है। उसके पिता वकील हैं। ये सब कुछ लॉकडाउन लगने के साथ शुरू हुआ, जब आदित्य मोबाइल का ज्यादा प्रयोग करने लगा। पूछने पर उसने बताया कि इंडोनेशिया, जापान, चीन और यूएसए के कई बच्चों से उसकी दोस्ती हो गई है। कई बार वह घर से बाहर चुपके से बात करने निकल जाता। रमजान का महीना शुरू होते ही उसने खाना-पीना छोड़ दिया। उसने बताया कि वो एक्सपेरिमेंट कर रहा है।

फिर वो उर्दू सीखने लगा। परिजनों ने मोबाइल खँगाला तो पता चला कि वो केरल के कुछ लोगों से संपर्क में है। केरल में इस्लामी कट्टरपंथियों की खबरें अक्सर आती थीं, इसीलिए माँ-बाप चिंतित रहने लगे। बाद में उसने बताया कि वो इस्लाम अपनाना चाहता है। फिर वो घर से फरार हो गया। बीच में एक बार थाने में शिकायत भी की गई थी, जिसके बाद आदित्य ने सुधरने का वादा किया था। उसे फिर से मोबाइल दे दिया गया, जिससे वो फिर उन कट्टरपंथियों के संपर्क में आ गया।

उसका जम कर ब्रेनवॉश किया गया था। इसके लिए व्हाट्सएप्प और टेलीग्राम जैसे एप्स का उपयोग किया गया। ‘इस्लामिक दावाह सेंटर’ से उसे धर्मांतरण का प्रमाण पत्र दिलाया गया। जब वो घर लौटा तो उसने बताया कि वो माँ की बीमारी के कारण लौटा है, लेकिन उसकी गतिविधियाँ अब भी संदिग्ध थीं। उसके माता-पिता ने चरमपंथियों से जुड़े कुछ दस्तावेज पुलिस को दिए हैं, जिसमें बाहरी फंडिंग के भी सबूत हैं।

बता दें कि उत्तर प्रदेश के नोएडा में ए़टीएस की टीम पुलिस ने धर्मांतरण कराने वाले दो मौलानाओं को गिरफ्तार किया है। इसमें से एक उमर गौतम पहले हिंदू ही था। वह करीब 30 साल पहले धर्मांतरण कर मुस्लिम बन गया था। इसके बाद से ही वो दिल्ली के जामिया नगर इलाके में इस्लामिक दावा सेंटर चला रहा था। यहीं से धर्मांतरण का सारा खेल खेला जाता है। ये दोनों अब तक 1,000 से अधिक लोगों का धर्मांतरण करा चुके हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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