Monday, April 22, 2024
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देवघर रोपवे दुर्घटना में झारखंड की सोरेन सरकार की लापरवाही आई सामने: देर से शुरू हुआ बचाव कार्य, रिपोर्ट और मेटनेंस कार्यों की अनदेखी की

राज्य सरकार ने साल 2007 में रोपवे सर्विस की शुरुआत की थी। शुरुआत के दो साल पर्यटन मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले झारखंड पर्यटन विकास निगम द्वारा संचालित किया गया। उसके बाद इसे साल 2009 में इसे निजी कंपनी दामोदर रोपवे एंड इंफ्रा लिमिटेड (DRIL) को सौंप दिया गया।

झारखंड (Jharkhand) के देवघर में रेपवे दुर्घटना (Deoghar Ropeway Accident) में तीन लोगों की मौत और कई लोगों घायल होने के बाद राज्य की हेमंत सोरेन सरकार (Hemant Soren Government) की हर तरफ किरकिरी हो रही है। वहीं, राज्य सरकार इस लापरवाही को किसी दूसरे के सिर पर डालने का भरपूर प्रायास कर रही है और इसे संचालित करने वाली निजी को प्रतिबंधित कर अपने दोष की इतिश्री कर रही है।

झारखंड पर्यटन विभाग के निदेशक राहुल सिन्हा का कहना है कि रोपवे का धुरा टूटने के कारण यह दुर्घटना हुई। अब सवाल है कि यह धूरा टूटा ही क्यों? रोपवे सेवा संचालित करने वाली निजी कंपनी दामोदर रोपवे एंड इंफ्रा लिमिटेड (DRIL) के मैन्यूअल में स्पष्ट है कि सर्विस शुरू करने से पहले ट्रॉली, हैंगर सहित तमाम आवश्यक जाँच प्रतिदिन की जाती है। इसके अलावा, तिमाही, छमाही और सालाना जाँच और रखरखाव का नियम है।

जैसा कि सिन्हा कहते हैं कि रोपवे का धुरा टूटने के कारण यह दुर्घटना हुई, यदि रखरखाव का नियमित और समय से जाँच की जाती तो खामी स्पष्ट रूप से सामने नजर आती। हालाँकि, यह स्पष्ट है कि इस पर बहुत ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया। झारखंड के पर्यटन मंत्री हफीजुजल हसन का कहना है कि इस घटना की वजह मेंटनेंस नहीं कराना है। उन्होंने कहा कि इसकी पुलिया टेढ़ी थी, तार (रोपवे) भी ढीला था। यहाँ तक कि रोपवे को संचालित करने के लिए बिजली भी नहीं है और जेनरेटर के माध्यम से इसका संचालन किया जाता है।

अब सवाल है कि पर्यटन मंत्री जब यह बात कह रहे हैं तो मंत्रालय ने इस पर अब संज्ञान क्यों नहीं लिया था। निजी कंपनी को रोपवे संचालन का जिम्मा सौंपने के बाद पर्यटन विभाग ने इसकी जाँच करने की जहमत कभी नहीं उठाई, जबकि रेवेन्यू DRIL से लगातार लेती रही। वहीं, DRIL का कहना है कि अनुबंध में स्पष्ट है कि पाँच का उसे दो बार विस्तार देना है। इसलिए कंपनी सेवा संचालित कर रही थी।

ऐसी सर्विसों के लिए रेस्क्यू ड्रील का समय-समय पर संचालन करने की आवश्यकता होती है, लेकिन राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्रालय और विभाग ने इस ड्रील को कराने में कभी रुचि नहीं दिखाई। यही कारण है कि जब दुर्घटना हो गई तो राज्य सरकार के हाथ-पाँव फूल गए और लोगों को 45 घंटे तक आसमान में लटके रहना पड़ा।

यह बात भी सामने आई है कि एक सरकारी एजेंसी ने देवघर रोपवे की स्थित को लेकर सुरक्षा ऑडिट कराया था। इसमें स्पष्ट कहा गया था कि तार के हालात बेहतर नहीं हैं सिर्फ संतोषजनक हैं। इसमें जोड़ों पर निगरानी और तार पर जंग लगने पर ध्यान रखने को कहा गया था। यहाँ बताना आवश्यक है कि रोपवे के लिए इस्तेमाल होने वाला तार सात साल पुराना है।

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे का आरोप है कि घटना वाले दिन शाम छह बजे तक त्रिकूट में क्या हुआ, इसकी जानकारी मुख्य सचिव समेत किसी भी उच्च अधिकारी को नहीं थी। सोरेन सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने हेलिकॉप्टर को समय पर उड़ान भरने के लिए जरूरी सामान मुहैया नहीं कराया, इसलिए बचाव कार्य भी देर से शुरू हुआ।

“अब अपनी त्वचा को बचाने के लिए, यह कहता है कि दामोदर इंफ्रा के साथ अनुबंध 2019 में समाप्त हो गया है। अगर दामोदर इंफ्रा शर्तों को पूरा किए बिना और एसओपी का पालन किए बिना और प्रशासन की नाक के नीचे सरकार की अनुमति के बिना काम कर रहा था, तो इसके लिए किसे दोषी ठहराया जाना है। यह राज्य सरकार की मिलीभगत को दर्शाता है।’

देवघर धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से झारखंड का महत्वपूर्ण स्थान है। त्रिकूट पर्वत पर तीर्थयात्रियों और ट्रेकिंग के शौकीन लोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए राज्य सरकार ने साल 2007 में रोपवे सर्विस की शुरुआत की थी। शुरुआत के दो साल पर्यटन मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले झारखंड पर्यटन विकास निगम द्वारा संचालित किया गया। उसके बाद इसे साल 2009 में इसे निजी कंपनी दामोदर रोपवे एंड इंफ्रा लिमिटेड (DRIL) को सौंप दिया गया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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