छात्रों के विरोध के बीच डॉ. फिरोज ने दिया BHU आयुर्वेद संकाय में गुपचुप तरीके से इंटरव्यू

ऑपइंडिया के सूत्रों के अनुसार, छात्रों के विरोध को मद्देनजर रखते हुए आज फिरोज खान के इंटरव्यू को समय से पहले ही संपन्न करा लिया गया। सूत्रों ने यह भी बताया कि डॉ. फिरोज खान ने कला संकाय के संस्कृत विभाग में भी आवेदन किया है जिसके लिए उनका साक्षात्कार 4 दिसम्बर को है।

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति का विरोध जारी है। इसी बीच खबर है कि BHU के आयुर्वेद संकाय के संस्कृत विभाग में असोसिएट प्रोफ़ेसर के पद के लिए आज शुक्रवार (नवम्बर 29, 2019) को डॉ. फिरोज खान ने गुपचुप तरीके से इंटरव्यू दिया जिसकी पुष्टि आयुर्वेद संकाय प्रमुख यामिनी भूषण त्रिपाठी ने किया है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि फिरोज खान इंटरव्यू देने आए थे, सभी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, रिजल्ट आने इसकी सूचना आपको जल्द दी जाएगी।

बता दें कि फिरोज खान का संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान में नियुक्ति का वहाँ के छात्रों द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा है। जिसके लिए वे 15 दिनों तक धरना पर भी बैठे और अभी भी आंदोलन जारी रखे हुए हैं। कक्षाओं और परीक्षाओं का बहिष्कार किया जा रहा है जिससे संकाय में पठन-पाठन ठप है। ऑपइंडिया के सूत्रों के अनुसार, छात्रों के विरोध को मद्देनजर रखते हुए आज फिरोज खान के इंटरव्यू को समय से पहले ही संपन्न करा लिया गया।
सूत्रों ने यह भी बताया कि डॉ. फिरोज खान ने कला संकाय के संस्कृत विभाग में भी आवेदन किया है जिसके लिए उनका साक्षात्कार 4 दिसम्बर को है।

मीडिया ने SVDV के आंदोलन को संस्कृत भाषा से जोड़कर भ्रम फ़ैलाने की कोशिश की थी। जबकि यह मुद्दा संस्कृत भाषा और हिन्दू-मुस्लिम का न होकर धर्म विज्ञान संकाय में नियुक्ति से जुड़ा था। उस संकाय से इतर किसी और संस्कृत विभाग में होता तो SVDV के छात्र इसका कभी विरोध नहीं करते बल्कि स्वागत करते। वहाँ के छात्रों के उनके स्थान्तरण के माँग को देखते हुए इस बीच विश्विद्यालय में चर्चा ये भी है कि BHU प्रशासन ने अन्दोलनकारी छात्रों से 10 दिन की मोहलत माँगी थी, जिसकी समय सीमा एक-दो दिन में समाप्त हो रही है और छात्र अपनी माँगे न माने जाने के कारण एक बड़े आंदोलन की तैयारी कर चुके हैं और इस आंदोलन को काशी के विद्वानों, SVDV के पूर्व आचार्यों और छात्रों सहित काशी विद्वत परिषद, शंकराचार्यों और रामलला जन्मभूमि के संतो सहित तमाम गणमान्य नागरिकों के समर्थन को देखते हुए प्रशासन डॉ. फिरोज खान क नियुक्ति आयुर्वेद या कला संकाय के संस्कृत विभाग में करके इस पूरे मामले का पटाक्षेप करना चाहता है।

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हालाँकि, प्रशासन का यह दावा है कि फिरोज खान एक मेधावी छात्र हैं और उन्होंने पहले से ही BHU के कई विभागों में आवेदन कर रखा था। और उनका किसी अन्य संकाय के संस्कृत विभाग में चयन होता है तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। जब ऑपइंडिया ने इसे लेकर छात्रों से बात की तो उनका कहना है, “फिरोज खान की SVDV छोड़कर कहीं भी नियुक्ति हो हम उनका स्वागत करेंगे। हमें इसमें कोई आपत्ति नहीं है हमारा विरोध सिर्फ उनके संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में पढ़ाने से है। हम उन्हें अपना आचार्य नहीं मान सकते, यहाँ उनकी नियुक्ति पूरी तरह से मालवीय मूल्यों, BHU संविधान और धर्म के संरक्षण के खिलाफ है।”

ग़ौरतलब है कि पहली बार बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय (SVDV) के साहित्य विभाग में एक मुस्लिम सहायक प्रोफ़ेसर डॉ फ़िरोज़ ख़ान की नियुक्ति 5 नवम्बर को हुई थी। संकाय के विद्यार्थियों को जैसे ही इसका पता चला, उन्होंने इस नियुक्ति के ख़िलाफ़ विश्वविद्यालय में विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया था।

बता दें कि BHU में विवाद के बाद अल्पसंख्यक प्रोफ़ेसर फ़िरोज़ ख़ान ने आयुर्वेद विभाग के संस्कृत प्रोफ़ेसर के लिए आवेदन किया है। और उनका इंटरव्यू आयुर्वेद विभाग में 29 नवंबर को है। इसका खुलासा ऑपइंडिया ने अपने पहले के रिपोर्ट में भी किया था।

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शरजील इमाम
शरजील इमाम वामपंथियों के प्रोपेगंडा पोर्टल 'द वायर' में कॉलम भी लिखता है। प्रोपेगंडा पोर्टल न्यूजलॉन्ड्री के शरजील उस्मानी ने इमाम का समर्थन किया है। जेएनयू छात्र संघ की काउंसलर आफरीन फातिमा ने भी इमाम का समर्थन करते हुए लिखा कि सरकार उससे डर गई है।

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