Wednesday, January 26, 2022
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लॉकडाउन के बाद भी रामपुर के मदरसे में पढ़ रहे थे बच्चे, पुलिस ने संचालक को लिया हिरासत में, FIR का आदेश

लॉकडाउन की घोषणा के बाद भी टाँडा क्षेत्र के गाँव लांबा खेड़ा में मदरसा को बंद नहीं किया गया। इतना ही नहीं मदरसे में करीब 100 बच्चों को पढ़ाया जा रहा था। इसकी जानकारी जैसे ही जिले के जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह को हुई तो उन्होंने तत्काल संबंधित विभाग को जाँच के आदेश दे दिए।

इन दिनों पूरा विश्व कोरोना वायरस के खिलाफ अपने-अपने तरीके से जंग लड़ रहा है। वहीं भारत में भी इसकी रोकथाम के लिए तरह-तरह के उपाय किए जा रहे हैं। यही कारण है कि भारत सरकार ने पूरे देश में 21 दिनों के लिए लॉकडाउन घोषित कर दिया है, लेकिन इन सभी घोषणाओं को भारत में कुछ लोग नजरअंदाज कर रहे हैं। कोई मदरसों में बच्चों को इस्लामी तालीम देने में लगा हुआ है तो कोई मस्जिदों में नमाज अदा करने में लगा हुआ है। कुछ ऐसा ही एक मामला सामने आया है उत्तर प्रदेश के जिला रामपुर से। जिले में घोषित लॉकडाउन के बाद भी एक मौलवी द्वारा मदरसे में बच्चों को पढ़ाया जा रहा था। इसकी जानकारी जब जिला प्रशासन को हुई तो उसने तत्काल कार्रवाई करते हुए मदरसा संचालक को हिरासत में ले लिया।

दरअसल जिले में लॉकडाउन की घोषणा के बाद भी टाँडा क्षेत्र के गाँव लांबा खेड़ा में मदरसा को बंद नहीं किया गया। इतना ही नहीं मदरसे में करीब 100 बच्चों को पढ़ाया जा रहा था। इसकी जानकारी जैसे ही जिले के जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह को हुई तो उन्होंने तत्काल संबंधित विभाग को जाँच के आदेश दे दिए। जाँच में शिकायत सही पाए जाने पर डीएम ने मदरसा संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दे दिए गए।

इसके बाद डीएम ने बताया कि जिले में लॉकडाउन का सख्ती से पालन कराया जाएगा, क्योंकि जनता के हित में है और जरा सी लापरवाही सभी को भारी पड़ सकती है। इसे देखते हुए किसी को भी घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। डीएम ने बताया कि इस दौरान इस दौरान गैस एजेंसी, पेट्रोल पंप और जरूरी सामानों की दुकानें खुली रहेंगी। वहीं लॉकडाउन की घोषणा के बाद भी बेवजह सड़कों पर घूम रहे 10 लोगों को रामपुर पुलिस ने हिरासत में लेकर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

रामपुर में खुले मदरसे की दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर की कटिंग

आपको बता दें कि बीते दिनों लॉकडाउन के दौरान मेरठ में पुलिस ने मस्जिदों में नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी थी। इसके बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने न तो 22 मार्च को जनता कर्फ्यू की पालन किया और न ही शाम के पाँच बचते ही ताली, थाली बजाकर अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने वाले लोगों का अभिनंदन किया। इसके बाद भी शाम होने ही सैकड़ों की संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग सड़कों पर आए और पुलिस प्रशासन की अपील का विरोध करने लगे। घंटो समझाने के बाद भी लोग नहीं माने इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की चेतावनी दी तब कहीं जाकर मुस्लिम समुदाय के लोग अपने घरों को रवाना हुए।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या 41 हो गई है। वहीं मोदी जी द्वारा 21 दिनों के लिए घोषित किए गए लॉकडाउन के बाद बाजारों में खरीददारी करने वालों लोगों की भीड़ जुट गई है, जिसे देखते हुए योगी सरकार ने लोगों को घर-घर जरूरी सामान पहुँचाने की बात कही है।

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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