मनोहर पर्रिकर के इस बड़े फैसले ने देशवासियों के बचाए ₹49,300 करोड़

पर्रिकर ने रक्षा मंत्री रहते हुए कई ऐसे भी फैसले लिए हैं, जिसका फायदा देश को 2027 तक होता रहेगा। इन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान देश के एयर डिफेंस प्लांस में बदलाव किए।

लंबे समय से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का रविवार को निधन हो गया। जीवन और राजनीति में फाइटर रहे पर्रिकर अंतिम समय में भी एक फाइटर की तरह लड़े। उनकी सादगी और कर्मठता की हर कोई सराहना कर रहा है।

मनोहर पर्रिकर नवंबर 2014 से मार्च 2017 तक देश के रक्षा मंत्री रहे। 2017 में रक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देकर वो गोवा के सीएम बने। बतौर रक्षा मंत्री, पर्रिकर ने देश के हित में कई ऐसे अहम फैसले लिए हैं, जिसकी मिसाल दी जाती है। साल 2016 में जब भारतीय जवानों ने PoK में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक किया था, उस समय देश के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ही थे और इनकी अगुवाई में ही इतने बड़े पैमाने पर सर्जिकल स्ट्राइक की योजना को अंजाम दिया गया था। और इससे पहले भी जब साल 2015 में भारतीय फौज ने म्यांमार में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक किया था, तब भी देश के रक्षा मंत्री पर्रिकर ही थे।

इतना ही नहीं पर्रिकर ने रक्षा मंत्री रहते हुए कई ऐसे भी फैसले लिए हैं, जिसका फायदा देश को 2027 तक होता रहेगा। इन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान देश के एयर डिफेंस प्लांस में बदलाव किए, जिसकी वजह से अब अगले दशक तक एयर डिफेंस सिस्टम्स की खरीद पर देश के टैक्स देने वाले नागरिकों के ₹49,300 करोड़ बचने की संभावना हैं।

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आपको बता दें कि मनोहर पर्रिकर ने रूस के एस-400 लॉन्ग रेंज मिसाइल शील्ड की ऊँची कीमत को देखते हुए 2027 तक नए एयर डिफेंस सिस्टम्स की खरीद के लिए 15 वर्ष के टर्म प्लान की समीक्षा का आदेश दिया। इस समीक्षा प्रक्रिया में कम दूरी के एयर डिफेंस सिस्टम्स की खरीद घटाने पर सर्वसहमति बनी। एस-400 एक ऐसी मिसाइल है, जो चोरी- छुपे हमला करने आ रहे विमानों और मिसाइलों को 380 किमी की दूरी से ही मार गिराने में सक्षम  है।

हालाँकि, एयर डिफेंस स्ट्रैटजी तीन स्तरों की होती है- 25 किमी तक की दूरी से अति गंभीर उपकरणों की सुरक्षा के लिए कम दूरी वाले सिस्टम, 40 किमी तक की मध्यम दूरी वाले सिस्टम और इससे ज्यादा दूरी के खतरों से रक्षा के लिए लंबी दूरी के सिस्टम। मगर मनोहर पर्रिकर ने वायु सेना को इस बात के लिए सहमत किया कि उनकी त्रिस्तरीय सुरक्षा योजना के मुताबिक लंबी दूरी के सिस्टम (एस-400) से मध्यम एवं कम दूरी के एसएएम की कोई जरूरत नहीं रहेगी और ये बेकार हो जाएँगे। जिसके बाद वायु सेना भी इसके लिए सहमत हो गए और ये डील भारत का अब तक का सबसे सस्ता डील बताया जा रहा है।

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