Homeदेश-समाजगुजरात की 17 जेलों में 1700 पुलिसवालों का छापा, अतीक अहमद की जेल में...

गुजरात की 17 जेलों में 1700 पुलिसवालों का छापा, अतीक अहमद की जेल में 300 पहुँचे: चप्पे-चप्पे का लाइव टेलीकास्ट, 39 घातक हथियार बरामद

गुजरात पुलिस की तरफ से राज्य के अहमदाबाद, राजकोट, सूरत, बड़ौदा, बनासकाठा, भावनगर, जामनगर, महेसाणा समेत 17 जेलों का औचक निरीक्षण किया गया। छापेमारी का लाइव टेलीकास्ट भी किया जा रहा था जिसे गाँधीनगर स्टेट कंट्रोल रूम में देखा जा रहा था।

गुजरात पुलिस की तरफ से शुक्रवार (24 मार्च 2023) की रात राज्य के 17 जेलों में बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इस ऑपरेशन की मॉनिटरिंग राज्य के गृहमंत्री हर्ष संघवी ने खुद की। अहमदाबाद के साबरमती जेल में लगभग 300 पुलिसकर्मियों ने सर्च ऑपरेशन चलाया। इसी जेल में माफिया अतीक अहमद भी कैद है। छापेमारी के दौरान कई मोबाइल फोन और मादक पदार्थ मिलने की बात कही जा रही है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक राज्य भर की 17 प्रमुख जेलों में एक साथ मेगा सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। ऑपरेशन में कुल 1700 पुलिसकर्मियों की मदद ली गई। टीम में एसओजी और लोकल क्राइम ब्राँच के ऑफिसर भी शामिल थे। बॉडी वियर कैमरों से लैश पुलिसकर्मियों ने जेल का चप्पा-चप्पा खंगाला। रात भर चले इस तलाशी अभियान की मॉनिटरिंग राज्य के गृहमंत्री हर्ष संघवी ने की। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने भी सीएम डेशबोर्ड से रेड पर नजर रखी।

गुजरात पुलिस की तरफ से राज्य के अहमदाबाद, राजकोट, सूरत, बड़ौदा, बनासकाठा, भावनगर, जामनगर, महेसाणा समेत 17 जेलों का औचक निरीक्षण किया गया। छापेमारी का लाइव टेलीकास्ट भी किया जा रहा था जिसे गाँधीनगर स्टेट कंट्रोल रूम में देखा जा रहा था।

बड़ा होने के कारण साबरमती जेल में 300 पुलिसकर्मियों ने छापेमारी की। माफिया अतीक अहमद भी इसी जेल में बंद है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक छापेमारी की खबर से उसकी नींद उड़ गई। कुछ दिन पहले खबरें आई थी कि अतीक अहमद जेल में मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहा था।

गुजरात में चलाए गए मेगा सर्च ऑपरेशन के दौरान 16 मोबाइल फोन, 10 इलेक्टॉनिक सामान, 39 घातक हथियार और 500 से अधिक नशीले पदार्थ पाए गए। पुलिस सुत्रों की मानें तो छापेमारी का मकसद जेल में अवैध गतिविधियों का पता लगाना और कैदियों को दी जा रही सुविधाओं का जायजा लेना था। बताया जा रहा है कि ऑपरेशन के दौरान पुलिस टीमों द्वारा कैदियों से बातचीत की गई और उनकी काउंसलिंग भी की गई।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

12 वर्ष पहले गोरखनाथ पीठ के पीठाधीश्वर, फिर देश के सबसे बड़े सूबे के CM: जनता तक पहुँच और समस्याओं पर तत्काल प्रतिक्रिया –...

योगी आदित्यनाथ की गोरखनाथ पीठाधीश्वर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक की यात्रा, विरासत को आगे बढ़ाने से लेकर विकसित होते UP की पूरी कहानी।

अखिलेश सरकार में हुए 62+ हत्याओं को याद करा रहा ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ पोस्टर: मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर...

मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ लिखे पोस्टर लगा गए हैं। इन पोस्टर्स ने 2013 की उस भयावह हिंसा की याद फिर ताजा कर दी है।
- विज्ञापन -