मैनाज़ ने अपने बच्चे का नाम ‘नरेंद्र मोदी’ रखा, समाज क्या कहेगा इसकी फ़िक्र नहीं

मैनाज़ बेगम ने डीएम के नाम एक शपथ पत्र बनवाया है और इसे उनके ससुर मोहम्मद इदरीस ने डीएम कैम्प कार्यालय में शुक्रवार को रिसीव करा लिया है। परिवार रजिस्टर में नवजात बच्चे का नाम नरेंद्र दामोदर दास मोदी दर्ज हो जाएगा।

लोकसभा चुनाव 2019 में पीएम मोदी ने ऐतिहासिक जीत प्राप्त करके यह स्पष्ट कर दिया कि भारतवासी उनके नेतृत्व से प्रसन्न हैं। वहीं, दूसरी तरफ़ उनकी जीत की एक और तस्वीर सामने आई है, जिसमें एक मुस्लिम परिवार ने अपने नवजात बच्चे का नाम ‘नरेंद्र दामोदर दास मोदी’ रखा।

ख़बर के अनुसार, गुरूवार (23 मई) को वज़ीरगंज के एक मुस्लिम परिवार का आंगन एक नवजात की किलकारियों से गूँज उठा। अगले दिन, बात जब उस बच्चे के नाम रखने की बात आई, तो उसकी माँ मैनाज़ बेगम ने बच्चे का नाम ‘नरेंद्र दामोदर दास मोदी’ रखने की बात कहकर घर के सभी सदस्यों को चौंका दिया। मैनाज़ बेगम ने PM मोदी के नाम पर अपने बच्चे का नाम रखने की ज़िद्द इस हद तक पकड़ी कि ससुराल वालों को उसकी बात माननी पड़ी। महिला के ससुर इदरिस ने बहु के फ़ैसले पर अपनी सहमति जताते हुए इस बाबत, दुबई में रह रहे अपने बेटे मुश्ताक अहमद से फोन पर बात करके उसकी रज़ामंदी ली, जिसके बाद बच्चे का नाम नरेंद्र दामोदर दास मोदी रख दिया गया।

मैनाज़ बेगम ने अपने बच्चे का नाम PM मोदी के नाम पर रखने की वजह तमाम विकास कार्यों को बताया। मुस्लिम महिलाओं के लिए तीन तलाक़ पर बनाए गए क़ानून से वो काफ़ी प्रभावित थीं। उनका कहना है कि मोदी जी मुस्लिम महिलाओं का सहारा साबित हुए हैं, और इसीलिए उन्होंने यह प्रण लिया था कि अगर मोदी जी सत्ता में दोबारा वापसी करेंगे तो वो अपने बच्चे का नाम उन्हीं (PM मोदी) के नाम पर रखेंगी।

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बता दें कि मैनाज़ बेगम ने डीएम के नाम एक शपथ पत्र बनवाया है और इसे उनके ससुर मोहम्मद इदरीस ने डीएम कैम्प कार्यालय में शुक्रवार को रिसीव करा लिया है। इस शपथ-पत्र की पुष्टि एडीओ पंचायत घनश्याम पाण्डेय ने कर दी है। इस पत्र को वीडीओ परसापुर महरौर को भेजा जा चुका है। परिवार रजिस्टर में नवजात बच्चे का नाम नरेंद्र दामोदर दास मोदी दर्ज हो जाएगा।

परिवार द्वारा उठाए गए इस क़दम पर बच्चे के दादा मोहम्मद इदरिस का कहना है कि वो ख़ुद भी व्यक्तिगत रूप से मोदी जी के प्रति आस्था रखते हैं। पोते के नाम पर समाज क्या कहेगा इससे उन्हें कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता क्योंकि यह एक पारिवारिक फ़ैसला है, इसमें किसी को दखल नहीं देना चाहिए।

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