Saturday, July 24, 2021
Homeदेश-समाजSC ने पूछा- राम का जन्म कब? मुस्लिम पक्ष के वकील बोले- मैं शनि...

SC ने पूछा- राम का जन्म कब? मुस्लिम पक्ष के वकील बोले- मैं शनि के प्रभाव में हूँ

जस्टिस बोबडे ने पूछा कि क्या ज्योतिष ग्रंथों में भी राम के जन्म के समय और स्थान को लेकर कोई जिक्र है? यह सुनते ही सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील धवन ने कहा, "कौन-सा ज्योतिष? वो ज्योतिष जो सूर्य से या वो जो चंद्र की चाल से माना जाता है?"

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को अयोध्या मामले की 35वें दिन की सुनवाई हुई। जन्मस्थान को न्यायिक व्यक्ति मानने और अयोध्या में खुदाई पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट पर हिंदू पक्ष की ओर से दलीलें रखी गई। रामलला विराजमान के वकील के पराशरण और सीएस वैद्यनाथन ने दलीलें पेश की।

पराशरण ने कहा कि यदि लोगों को किसी जगह पर दिव्य शक्ति के होने का यकीन हो तो उसे न्यायिक व्यक्ति माना जा सकता है। जस्टिस एसए बोबडे ने उनसे पूछा कि क्या ज्योतिष ग्रंथों में भी राम के जन्म के समय और स्थान को लेकर कोई जिक्र है? यह सुनते ही सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने कहा, “कौन-सा ज्योतिष? वो ज्योतिष जो सूर्य से या वो जो चंद्र की चाल से माना जाता है?” उन्होंने कहा कि कुछ ज्योतिषी सूर्य से तो कुछ चंद्रमा के हिसाब से ग्रह-गोचर की गणना करते हैं। सबका अपना-अपना तरीका है। धवन ने कहा, “अभी मेरा समय राहु और केतु के बीच फॅंसा है। यह मुझे मुश्किल में डाल रहा है। जन्मकाल के अनुसार मैं फिलहाल शनि के प्रभाव में हूँ।”

बोबडे के सवाल के जवाब में पराशरण ने कहा कि चैत की नवमी को अभिजीत नक्षत्र में अयोध्या में भगवान राम का जन्म हुआ। उस नवमी को हिंदू रामनवमी का उत्सव मनाते हैं। इस उत्सव और विशेष पूजा के लिए जन्मस्थान और वहाँ बने मन्दिर में पूजा का विधान है।

उन्होंने पीठ के सामने गीता के कुछ श्लोक पढ़े और न्यायिक व्यक्ति को परिभाषित करने का प्रयास किया। पराशरण ने कहा कि अगर लोगों को विश्वास है कि किसी जगह पर दिव्य शक्ति है तो इसे न्यायिक व्यक्ति माना जा सकता है। उन्होंने कुड्डालोर मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ मंदिर में कोई मूर्ति नहीं है और केवल एक दीया जलता है जिसकी पूजा की जाती है। उन्होंने कहा कि लोगों के विश्वास के साथ पूजा स्थल को मंदिर कहा जा सकता है। मंदिर पूजा स्थान के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक सामान्य शब्द है।

इससे पहले जब वैद्यनाथन पीठ के सामने दलील रख रहे थे तो मुस्लिम पक्ष के वकील धवन और मीनाक्षी अरोड़ा ने दखल देने की कोशिश की। सीजेआई ने इस पर नाराजगी जताई। इसके बाद धवन ने खेद जताया। गौरतलब है कि मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली संविधान पीठ मामले की रोजाना सुनवाई कर रही है। पीठ में जस्टिस बोबडे के अलावा डीवाई चंद्रचूड़, अशोक भूषण और एस अब्दुल नज़ीर शामिल हैं।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

जहाँ से इस्लाम शुरू, नारीवाद वहीं पर खत्म… डर और मौत भला ‘चॉइस’ कैसे: नितिन गुप्ता (रिवाल्डो)

हिंदुस्तान में नारीवाद वहीं पर खत्म हो जाता है, जहाँ से इस्लाम शुरू होता है। तीन तलाक, निकाह, हलाला पर चुप रहने वाले...

NH के बीच आने वाले धार्मिक स्थलों को बचाने से केरल HC का इनकार, निजी मस्जिद बचाने के लिए राज्य सरकार ने दी सलाह

कोल्लम में NH-66 के निर्माण कार्य के बीच में धार्मिक स्थलों के आ जाने के कारण इस याचिका में उन्हें बचाने की माँग की गई थी, लेकिन केरल हाईकोर्ट ने इससे इनकार कर दिया।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
110,987FollowersFollow
393,000SubscribersSubscribe