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भारत-न्यूजीलैंड FTA साइन, एक्सपोर्ट पर टैक्स खत्म-युवाओं को स्पेशल वीजा: जानें भारतीयों को होंगे इससे क्या-क्या फायदे

भारत और न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर सोमवार (27 अप्रैल 2026) को औपचारिक हस्ताक्षर हो गए हैं। दोनों देशों ने मार्च 2025 में इस समझौते पर बातचीत शुरू करने की घोषणा की थी और कई दौर की गहन वार्ताओं के बाद आखिरकार यह डील अंतिम रूप तक पहुँची।

भारत और न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर सोमवार (27 अप्रैल 2026) को औपचारिक हस्ताक्षर हो गए हैं। दोनों देशों ने मार्च 2025 में इस समझौते पर बातचीत शुरू करने की घोषणा की थी और कई दौर की गहन वार्ताओं के बाद आखिरकार यह डील अंतिम रूप तक पहुँची। यह समझौता भारत की इंडो-पैसिफिक व्यापार रणनीति को मजबूत करेगा, वहीं न्यूजीलैंड के लिए दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक तक बेहतर पहुँच सुनिश्चित करेगा।

इस FTA समझौते पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैकले की मौजूदगी में औपचारिक हस्ताक्षर होंगे। इससे पहले रविवार (26 अप्रैल 2026) को मंत्री पीयूष गोयल ने समझौते के बारे में बताते हुए कहा, “ये FTA दरवाजे और सोच दोनों खोलता है। उद्योग को सामान्य से परे सोचना होगा और समझौते के पूरे दायरे का उपयोग करना होगा।”

उन्होंने यह भी बताया कि इस FTA से दोनों देशों के व्यापार, निवेश और रोजगार को बड़ा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। भारत के निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में कई उत्पादों पर शुल्क-मुक्त पहुँच मिलेगी, जिससे कृषि, वस्त्र, फार्मा और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्र को फायदा होगा। वहीं न्यूजीलैंड की कंपनियों को भारत के विशाल उपभोक्ताओं वाले बाजार में बेहतर अवसर मिलेंगे।

10 सालों में हुआ भारत-न्यूजीलैंड के बीच FTA

दरअसल, भारत और न्यूजीलैंड के बीच इस FTA की नींव असल में 2010 में रखी गई थी, 9 दौर की बातचीत के बाद 2015 में इस बातचीत पर लगाम लग गई थी। फिर मार्च 2025 में FTA पर बातचीत को दोबारा शुरू किया गया, जब दोनों देशों ने औपचारिक रूप से FTA वार्ता शुरू करने की घोषणा की। इसके बाद कई चरणों में बातचीत हुई, जिसमें वस्तुओं, सेवाओं, निवेश, डिजिटल व्यापार और पेशेवरों की आवाजाही जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। 10 महीने की लंबी बातचीत के बाद 22 दिसंबर 2025 में दोनों पक्ष प्रमुख शर्तों पर सहमत हुए और समझौते को अंतिम रूप दिया गया।

भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक, यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई दिशा देगा और द्विपक्षीय व्यापार को बेहतर तरीके से बढ़ाएगा। फिलहाल भारत और न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय व्यापार 1.7 अरब डॉलर (लगभग ₹14,100 करोड़) के आसपास है, जिसे आने वाले वर्षों में कई गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। न्यूजीलैंड सरकार ने भी इसे अपने निर्यातकों, निवेशकों और सेवा क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक अवसर बताया है।

समझौते से भारत को क्या होगा फायदा?

भारत-न्यूजीलैंड के बीच यह समझौता भारतीय कारोबार, निवेश और रोजगार के लिए बड़ा अवसर लेकर आया है। सबसे बड़ा फायदा यह है कि समझौता लागू होते ही भारत के सभी 8,284 निर्यात उत्पादों को न्यूजीलैंड के बाजार में 100 प्रतिशत ड्यूटी-फ्री पहुँच मिल जाएगी। पहले भारतीय सामान पर औसतन 2.2 प्रतिशत शुल्क लगता था, जबकि करीब 450 उत्पादों पर यह 10 प्रतिशत तक पहुँच जाता था। अब यह पूरी तरह खत्म हो जाएगा, जिससे भारतीय उत्पाद वहाँ और सस्ते और प्रतिस्पर्धी बनेंगे।

इसका सीधा लाभ टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट्स, लेदर, फुटवियर, इंजीनियरिंग गुड्स, केमिकल्स, इलेक्ट्रिकल्स, फूड प्रोसेसिंग और कृषि उत्पादों को मिलेगा। खासतौर पर आगरा के चमड़ा उद्योग को बड़ी राहत मिलेगा, क्योंकि यहाँ देश के करीब 75 प्रतिशत लेदर फुटवियर का उत्पादन होता है। लेदर और फुटवियर पर लगने वाला 5 प्रतिशत शुल्क अब शून्य हो जाएगा। वस्त्र, होम टेक्सटाइल, हैंडलूम और मैन-मेड फाइबर को भी तुरंत ड्यूटी-फ्री एंट्री मिलेगी।

फार्मा और मेडिकल डिवाइस सेक्टर के लिए भी यह समझौता बेहद अहम है। न्यूजीलैंड अब भारतीय कंपनियों के GMP और GCP प्रमाणन को मान्यता देगा। इससे बार-बार होने वाले निरीक्षण खत्म होंगे, लागत घटेगी और भारतीय दवाओं व मेडिकल उपकरणों को वहाँ तेजी से मंजूरी मिल सकेगी। इसके अलावा AYUSH- जैसे आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी को भी इस समझौते में विशेष मान्यता दी गई है।

साथ ही भारतीय पेशेवरों के लिए विशेष वीजा व्यवस्था की गई है। शुरुआती तीन वर्षों के लिए हर साल 1,667 अस्थायी रोजगार वीजा जारी किए जाएँगे और कुल 5000 भारतीय पेशेवर एक समय में इस योजना का लाभ उठा सकेंगे।

समझौते से न्यूजीलैंड को क्या होगा फायदा?

भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता न्यूजीलैंड के लिए बहुत बड़ा मौका है। इस समझौते के तहत भारत, न्यूजीलैंड से आने वाले करीब 95% सामान पर आयात शुल्क कम करेगा या पूरी तरह हटा देगा। इसमें कीवीफ्रूट, चेरी, ब्लूबेरी, एवोकाडो, वाइन, ऊन, लकड़ी, समुद्री उत्पाद, मनुका हनी और कोयला जैसे प्रमुख उत्पाद शामिल हैं। इनमें से कई उत्पादों को समझौता लागू होते ही भारत में बिना किसी शुल्क के प्रवेश मिल जाएगा। इससे न्यूजीलैंड की कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में कारोबार करना आसान और सस्ता हो जाएगा।

भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता बड़ा उपभोक्ता बाजार है। ऐसे में न्यूजीलैंड के किसानों, बागवानी कारोबारियों और खाद्य कंपनियों को 140 करोड़ से ज्यादा उपभोक्ताओं तक पहुँच मिलेगी। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने इसे ‘पीढ़ियों में एक बार मिलने वाला अवसर’ बताया है। उनका कहना है कि इस समझौते से देश के कृषि, बागवानी, वाइन, समुद्री खाद्य और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को बड़ा फायदा होगा।

इसके अलावा, न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर (लगभग ₹1,88,397 करोड़) निवेश करने की योजना बनाई है। यह निवेश बुनियादी ढाँचे, विनिर्माण, कृषि तकनीक, शिक्षा, पर्यटन और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। इससे न्यूजीलैंड की कंपनियों को भारत में लंबे समय तक कारोबार बढ़ाने का मौका मिलेगा। कुल मिलाकर, यह समझौता न्यूजीलैंड के निर्यात, निवेश और रोजगार को नई रफ्तार देने वाला साबित हो सकता है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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