Wednesday, April 14, 2021
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‘काट के लेंगे आजादी’: JNU के छात्र कर रहे थे प्रदर्शन, युवती ने IPS अधिकारी को काटा

वीसी को हटाने की मॉंग को लेकर छात्रों ने राष्ट्रपति भवन तक जाने की कोशिश की। लेकिन, पुलिस ने उन्हें रोक दिया। मानव संसाधन मंत्रालय ने भी छात्रों की मॉंग खारिज करते हुए कहा है कि उसका ध्यान परिसर में उठे मुद्दे का निपटारा करने पर है।

वीसी को हटाने के लिए जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के छात्रों के एक धड़े ने गुरुवार को प्रदर्शन किया। जेएनयू कैंपस से लेकर मंडी हाउस और जंतर-मंतर तक मार्च निकाला गया। प्रदर्शनकारी छात्र राष्ट्रपति भवन की ओर जाना चाहते थे। लेकिन, पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।

इस दौरान एक हैरान करने वाला वाकया हुआ। एक प्रदर्शनकारी युवती ने विजय चौक पर आईपीएस अधिकारी इंगित प्रताप सिंह के अँगूठे पर दाँत से काट लिया। सिंह दक्षिणी-पश्चिमी दिल्ली के एडिशनल डीसीपी हैं। प्रदर्शन का आह्वान JNU छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष ने किया था।

प्रदर्शनकारी युवती की हरकत पर ट्वीट करते हुए अभिनेता रणवीर शौरी ने लिखा है, “काट के लेंगे आज़ादी!” हालॉंकि, दॉंत काटने वाली युवती की पहचान नहीं हो पाई है। डीसीपी ने किसी तरह उससे अपना हाथ छुड़ाया। दॉंत काटने से उनके हाथ पर हल्के घाव हो गए। बाद में उपचार के लिए उन्हें अस्पताल ले जाया गया। 

ख़बर के अनुसार, 2011 बैच के अधिकारी इंगित प्रताप सिंह एक पुरुष प्रदर्शनकारी को खींचने की कोशिश कर रहे थे, तभी उस महिला ने अपने मित्र को बचाने की कोशिश में आईपीएस अधिकारी का अँगूठा काट लिया। वहीं, पुलिस ने शांति-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। इसके अलावा, कुछ छात्रों ने दिल्ली के कनॉट प्लेस में सड़क किनारे खड़े होकर कुलपति के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी भी की। इसके चलते जनपथ पर जाम लग गया और आवागमन भी प्रभावित हुआ।

बता दें कि JNU के छात्रों और अध्यापकों के एक धड़े ने कुलपति एम जगदीश कुमार को पद से हटाने की माँग के बीच गुरुवार को मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने उन्हें हटाने से इनकार किया। मंत्रालय का कहना था कि कुलपति को हटाना समाधान नहीं है और सरकार का ध्यान परिसर में उठे मुद्दे का निपटारा करने पर है। वही, मंत्रालय ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि छात्रों और प्रशासन के साथ बैठक के दौरान तय ‘फॉर्मूले’ को लागू करने की भी ज़रूरत है। कुलपति समेत यूनिवर्सिटी के अधिकारियों को छात्रों के दावे पर बातचीत करने के लिए शुक्रवार (10 जनवरी) को मंत्रालय बुलाया गया है। छात्रों ने दावा किया है कि मानव संसाधन मंत्रालय के हस्तक्षेप के दौरान तय संशोधित शुल्क को लागू नहीं किया गया है।

ग़ौरतलब है कि JNU में पिछले दो महीने से चल रहा विवाद ने रविवार को हिंसक हो गया था। शुक्रवार और शनिवार (3, 4 जनवरी) को छात्रों ने JNU परिसर में हंगामा किया था। इस दौरान छात्रों ने सर्वर रूम ठप कर लोगों को बँधक बनाया और सरकारी सम्पत्ति को नुक़सान पहुँचाया। इसके बाद पाँच जनवरी की रात कुछ नक़ाबपोश गुंडोंं ने हाथों में रॉड और डंडे लेकर छात्रों को पीटा और तोड़फोड़ की।

एबीवीपी के छात्रों के रूम का गेट तोड़ कर उन पर हमला किया गया। किसी की गर्दन में चोटें आई हैं तो किसी का हाथ टूट गया है। जब कैम्पस में पुलिस पहुँची तो पुलिस के ख़िलाफ़ भी ‘गो बैक’ के नारे लगाए गए। छात्रों को घेर-घेर कर पीटा गया। एबीवीपी की एक छात्रा शाम्भवी की वेशभूषा में एक वामपंथी छात्रा ने हमले किए ताकि इसमें संगठन का नाम बदनाम हो। बाद में पता चला शाम्भवी ख़ुद घायल हुई हैं और वामपंथी गुंडों की पोल खुल गई। इस हिंसा पर वामपंथी और अज्ञात हिंसक छात्रों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर लिया गया है। इसमें JNU छात्र संग की आइशी घोष भी शामिल हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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