Monday, April 22, 2024
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अब्बा लगाते थे पंचर, बेटा पत्थरबाजों पर लगाने लगा पैसा: कानपुर के चंद्रेश्वर हाता पर कब्जा करना चाहता था मुख्तार, जुमे पर हुई थी हिंसा

बताया जाता है कि चंद्रेश्वर हाते पर मुख़्तार के कुछ बिल्डर साथियों की नजर थी। हिंसा के दौरान मुख़्तार के ही एक सहयोगी ने रुमाल लहराते हुए भीड़ को चंद्रेश्वर हाते की तरफ आने का इशारा भी किया था। माना जा रहा है कि कब्ज़ा कर यहाँ आपर्टमेंट बनाने की प्लानिंग थी।

कानपुर में 3 जून 2022 को जुमे पर हिंसा हुई थी। इस मामले में मुख्तार अहमद की गिरफ्तारी हुई है। वह बाबा बिरयानी के नाम से रेस्टोरेंट चलाता है। उस पर पत्थरबाजों को फंडिंग का आरोप है। बताया जा रहा है कि हिंसा की आड़ में वह चंद्रेश्वर हाते पर कब्जा करना चाहता था।

दरअसल, अवैध कब्जा और मुख्तार का पुराना नाता रहा है। पिछले दिनों यह बात भी सामने आई थी कि जिस जगह बाबा बिरयानी चल रही, वह जगह सरकारी दस्तावेजों में राम जानकी मंदिर के नाम पर है। इसके दम पर ही उसके अकूत संपत्ति जुटाने की बात कही जाती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मुख़्तार के अब्बा मोहम्मद इशहाक अहमद उर्फ बाबा साल 1968 में बेकनगंज के राम-जानकी मंदिर के पास साइकिल का पंचर लगाया करते थे। शुरुआत में मुख्तार भी इस पंचर शॉप में काम करता था। बाद में वह इसी जगह पर बिस्किट और मिठाई बेचने लगा। 1990 के दशक में उसने कथित तौर पर कानपुर गैंगस्टर लाला हड्डी के साथ मिलकर प्रॉपर्टी डीलिंग का काम शुरू किया। बाद में वह विवादित जमीनों को खरीदने और कब्ज़ा हटवाने जैसे अवैध कामों में भी शामिल हो गया। इस काम में उसकी मदद करने वाले SBI के एक मैनेजर को नौकरी भी गँवानी पड़ी थी।

बजरंग दल के कानपुर जिला संयोजक कृष्णा तिवारी के मुताबिक, “मुख़्तार अहमद कानपुर के कई बड़े अपराधियों का संरक्षक रहा है। साल 2017 में कानपुर गैंगवार में मारे गए डी-2 गैंग के दुर्दांत अपराधी गुलाम नबी से मुख़्तार के सम्पर्क पाए गए थे। मात्र 25 सालों में वो एक सामान्य आदमी से करोड़पति कैसे हो गया इसकी जाँच हर हल में होनी चाहिए।”

प्रॉपर्टी के क्षेत्र में मुख़्तार अहमद अहमद का नया साथी मोहम्मद वसी है। उस पर भी दंगाइयों को फंडिंग का आरोप है। माना जा रहा है कि मुख्तार अहमद ने कागजों में फेरफेरी करते हुए कई शत्रु संपत्तियों की खरीद-फरोख्त की है। मुख़्तार अहमद उर्फ़ बाबा पर न सिर्फ अपराधियों से गठजोड़ बल्कि मंदिरों की जमीनों पर भी कब्ज़े के आरोप लगे हैं।

रिपोर्टों के अनुसार कानपुर के बेकनगंज स्थित डॉक्टर बेरी चौराहा का भवन संख्या 99/14ए रिकॉर्ड में राम-जानकी मंदिर ट्रस्ट का है। यहाँ भगवान श्रीराम का मंदिर था। अस्सी के दशक तक यहाँ पूजा हुआ करती थी। लेकिन अब मंदिर का कुछ ही हिस्सा बचा हुआ है। वह भी जर्जर हाल में है। मंदिर के अन्य हिस्सों को तोड़कर उसका इस्तेमाल रेस्टोरेंट की रसोई के तौर पर किया जा रहा है। 

मुख़्तार से SIT की पूछताछ में हुए खुलासे के मुताबिक चंद्रेश्वर हाते पर मुख़्तार के कुछ बिल्डर साथियों की नजर थी। हिंसा के दौरान मुख़्तार के ही एक सहयोगी ने रुमाल लहराते हुए भीड़ को चंद्रेश्वर हाते की तरफ आने का इशारा किया था। माना जा रहा है कि चंद्रेश्वर हाते को कब्ज़ा कर वहाँ आपर्टमेंट बनाने की प्लानिंग थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस की पूछताछ में मुख़्तार ने बताया कि 500 रुपए से 1000 रुपए दे कर बाहर से पत्थरबाज बुलाए गए थे। हिंसा की साजिश बाबा बिरयानी में रची गई थी। इस साजिश में 15 से 16 युवकों को हिंसा फैलाने के लिए अलग-अलग टास्क दिए गए थे। पथराव के दौरान वह वीडियो कॉल कर पूरे हंगामे को देख रहा था। पूछताछ में उसने कई अन्य आरोपितों के नाम भी पुलिस को बताए हैं। उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। 

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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