Sunday, July 3, 2022
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‘हिंदू यहाँ सिर्फ 3%, डरकर जीते हैं, पलायन-लव जिहाद से भी पीड़ित’: कानपुर हिंसा के दौरान चंद्रेश्वर हाते पर कब्जे की थी योजना

चेतन बताते हैं, "यहाँ के अधिकतर लोग शत्रु सम्पत्तियों पर काबिज हैं। इसी के साथ अभी कुछ दिन पहले कानपुर की मेयर ने इसी इलाके का दौरा करके कई मंदिरों को मुस्लिमों के कब्जे से मुक्त करवाया था। हिंसक भीड़ में शामिल कई लोगों के गुस्से की एक वजह ये भी है।"

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur, Uttar Pradesh) में 3 जून 2022 को भड़की हिंसा के बाद अगली जुमे की नमाज आज 10 जून (शुक्रवार) को है। इस दौरान किसी भी तरह की अप्रिय घटना से निबटने के लिए प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं।

इस बीच ऑल इंडिया सुन्नी उलेमा काउंसिल ने सभी इमामों को पत्र लिखकर नमाज के बाद लोगों से सीधे घर जाने की अपील करने के लिए कहा है। हालाँकि, बयान जारी करते हुए मौलाना हाजी सलीम ने विरोध प्रदर्शनों को गाँधीवादी ढंग से करने का भी फरमान दिया। इस बीच ऑपइंडिया ने 6 जून को घटनास्थल पर जाकर पूरे मामले की जमीनी पड़ताल की।

हिंसा स्थल पर हिन्दुओं की कई दुकानें

3 जून को हुई हिंसा के दौरान सबसे अधिक प्रभावित यतीमखाना से परेड चौराहे के बीच का हिस्सा रहा। यह दूरी आधे किलोमीटर से कुछ कम है। यहाँ हिन्दुओं की कई दुकानें स्थित हैं। हालाँकि, यह इलाका आबादी के हिसाब से मुस्लिम बहुल कहा जाता है। यहाँ स्थित दुकानों में चंदा मेडिकल, टंडन ज़ेरॉक्स, मीरा पेंट्स, उषा पैथोलॉजी, भाटिया रेस्टोरेंट, डॉक्टर अभिषेक व डॉक्टर प्रसाद की क्लिनिक प्रमुख हैं। इनके बीच में इक्का दुक्का खान चेन एन्ड लेदर, राजू चेन नाम की भी दुकानें भी दिखीं। हमारी रिपोर्टिंग के दौरान इन सभी दुकानों के शटर बंद दिखे।

परेड चौराहे से यतीमखाना रोड

चंद्रेश्वर हाता भी था निशाने पर

ऑपइंडिया की टीम को परेड चौराहे पर भारी फोर्स के बीच सिर पर शिखा रखा एक व्यक्ति अपने दैनिक कामों में व्यस्त दिखा। वहाँ जाने पर कुछ और लोग एक-दूसरे का राम-राम कह कर अभिवादन करते दिखे। उन सभी ने कैमरे के सामने आने से मना कर दिया, लेकिन उन्होंने अपनी बात रखी।

उन्होंने ने कहा, “हम गिने-चुने हिन्दू इस एक खास क्षेत्र में हैं। हमारे मोहल्ले का नाम चंद्रेश्वर है, जहाँ कुछ सौ हिन्दू रहते हैं। घटना के दिन प्रदर्शन के नाम पर हमारे मोहल्ले को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। वो तो फ़ोर्स की सक्रियता थी कि हम बच गए।”

चंद्रेश्वर हाता

इस क्षेत्र में कैराना से ज्यादा पलायन

ऑपइंडिया ने चंद्रेश्वर हाते के ही निवासी चेतन वाजपेई उर्फ़ सर्वेश वाजपेई से बात की। उन्होंने बताया, “पहले हमारे हाते के पीछे चमड़े का बहुत बड़ा काम था, जो अब रेडीमेड का हो गया है। मार्केट में अधिकतर मुस्लिम समुदाय के ही लोग हैं। अभी उस मार्केट में जाने के लिए घूमकर जाना पड़ता है। अगर ये हाता वो हासिल कर लेते हैं तो उनकी मार्केट सड़क पर आ जाएगी।”

वाजपेई आगे बताते हैं, “जिस दिन ये हाता हाथ से निकला, उस दिन इस जगह से हिन्दू नाम का अस्तित्व मिट जाएगा। यहाँ के बचे 3% हिन्दू 97% की आँखों में चुभ रहे हैं। साल 1992 में राम मंदिर और मार्च 2001 में दिल्ली के विवाद के दौरान भी ये हाता चर्चित रहा। तब हिन्दू की आबादी यहाँ ठीक थी, इसलिए हम विरोध कर लेते थे। पलायन का मुद्दा कैराना के बदले कानपुर होना चाहिए।”

जहाँ हुई हिंसा कभी उसी के पास कत्ल हुए थे गणेश शंकर विद्यार्थी

ऐतिहासिक घटना को याद करते हुए चेतन कहते बताते हैं कि जिस परेड चौराहे पर हिंसा हुई थी, वहाँ से मूलगंज मार्ग पर मात्र 300 मीटर की दूरी पर सुनहरी मस्जिद स्थित है। इसी के पास साल 1931 में गणेश शंकर विद्यार्थी की हत्या हुई थी।

वो कहते हैं, “3 जून को हिंसक भीड़ उसी रास्ते पर जा रही थी। अचानक एक लड़का हमारे हाते के आगे खड़ा होकर रुमाल लहराने लगता है और भीड़ को हमारे घरों की तरफ बुलाता है। रुमाल हिलाने का वह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। तब सिर्फ आधे दर्जन के करीब पुलिसकर्मी मौजूद थे। उन्होंने भीड़ रोकने की कोशिश की, लेकिन उन पर पथराव हो गया।”

जान-माल के बचाव में उठाए उनके ही फेंके पत्थर

चेतन ने आगे बताया, “पुलिस बल कम होने के चलते उधर से पथराव होता रहा। इस दौरान हमारे हाते की एक महिला व बच्चा घायल हो गया। इसको देखकर ही हमारी तरफ के लोग आक्रोशित हो गए और उन्होंने पुलिस के साथ मिलकर भीड़ द्वारा फेंके गए पत्थरों को उठाकर आत्मरक्षा में उनकी तरफ वापस फेंका। बाद में पुलिस ने उन्हें खदेड़ा।”

गलती एकतरफा तो कार्रवाई दोतरफा कैसे

चेतन कहते हैं, “कुछ दूर भागने के बाद भीड़ फिर से ठेले में पत्थर और पेट्रोल बम लेकर वापस लौटी। भीड़ में कानपुर के अलग-अलग हिस्सों के लोग शामिल थे। इसलिए उनकी पहचान में दिक्कत आ रही है। आज जो लोग पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगा रहे हैं, वे जान लें कि गलती भी एकतरफा थी। हम लोगों ने किया ही क्या? पथराव में हमारे 8 लोग घायल हैं, जिनमें एक महिला भी शामिल है। एक लड़के की कुहनी टूट गई है।”

हमारे पूरे मोहल्ले को जलाने का था प्लान

चेतन ने आगे कहा, “रास्तों में तैनात पुलिस बल भीड़ को अलग-अलग दिशा में मोड़ने में कामयाब रहे। अगर वो भीड़ एक तरफ चल देती तो हमारे मोहल्ले का बचना मुश्किल था। उनको समस्या नूपुर शर्मा से है तो उनसे विरोध करते। हमारे घरों की तरफ पेट्रोल बम लेकर क्यों आए थे? कल कोई और कुछ बोलेगा तो पूरे देश को जला दोगे क्या?”

शत्रु सम्पत्ति भी है उनके गुस्से की एक वजह

चेतन बताते हैं, “यहाँ के अधिकतर लोग शत्रु सम्पत्तियों पर काबिज हैं। इसी के साथ अभी कुछ दिन पहले कानपुर की मेयर ने इसी इलाके का दौरा करके कई मंदिरों को मुस्लिमों के कब्जे से मुक्त करवाया था। हिंसक भीड़ में शामिल कई लोगों के गुस्से की एक वजह ये भी है।”

चेतन कहते हैं कि अगर सच में शत्रु सम्पत्तियों पर ठोस कार्रवाई हो जाए तो कानपुर का एक बड़ा हिस्सा खाली हो जाएगा। पाकिस्तान गए कई लोगों ने अपनी तमाम सम्पत्तियाँ यहाँ अपने रिश्तेदारों को सौंप रखी हैं। ये एक बहुत बड़ी साजिश है देश के विरुद्ध।

योगीराज में उल्टा पड़ा दंगाइयों का दाँव

चेतन के मुताबिक, “दंगाइयों का दाँव असल में उल्टा पड़ गया। उनको गलतफहमी थी कि आज फ़ोर्स काफी दूर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की सुरक्षा में होगी। इसलिए मोहल्ले में कोई बड़ा काण्ड कर देते हैं। शायद हमारे मोहल्ले में घुसकर नरसंहार या आगजनी का प्लान था। हालाँकि, कुछ ही मिनटों में भारी संख्या में फोर्स पहुँच गई तो दंगाइयों का दाँव उल्टा पड़ा गया और उनको भागना पड़ा। 15 मिनट में पुलिस कमिश्नर तक पहुँच गए, जो दंगाइयों को भी आशा नहीं थी। योगी सरकार में पिछली सरकारों के मुकाबले काफी कुछ सकारात्मक बदलाव हुआ है।”

हाते की लड़कियों के खिलाफ लव जिहाद की साजिश

मोहल्ले में लव जिहाद को लेकर चेतन ने बताया, “हमारे हाते में रहने वाली लगभग 10-15 लड़कियों के खिलाफ लव जिहाद की साजिश रची गई थी। हम जैसे-तैसे उनमें से कई लड़कियों को समझाने में सफल रहे। बाकी को भी समझाने का प्रयास कर रहे हैं। इसमें पुलिस ने भी सहयोग किया।”

मोहल्ले के हिंदुओं के डर को लेकर चेतन ने बताया, “सच्चाई ये है कि हम लोग यहाँ दब कर रहते हैं। हम लोग डरे हुए हैं। हमारे घरों के बगल ऊँची-ऊँची इमारतें बना दी गई हैं, जहाँ से पत्थर और बम फेंके जाते हैं। ये जो भी करें उसको करने दें तो ठीक, अगर हमने विरोध किया तो वहीं दिक्कत शुरू हो जाती है। हमारी सुरक्षा के लिए पुलिस की तैनाती बनी रहे।”

स्थानीय हिन्दू नेता प्रकाश शर्मा ने ऑपइंडिया से कहा, “भीड़ के इरादे काफी खतरनाक थे। उनके निशाने पर चंद्रेश्वर हाता था। प्रशासन ने सही समय पर सख्ती दिखते हुए उनको काबू किया, वरना हालात भयावह होते।” वहीं, स्थानीय भाजपा नेता सुनील बजाज ने भी हिंसा वाले दिन पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी की तारीफ की और उपद्रवियों के मंसूबों को खतरनाक बताया।

भगवा पहने देखा तो मुस्लिम गेस्ट हाउस वाले ने भगा दिया

उस इलाके में भगवा वस्त्र में बैटरी रिक्शा चलाने वाले भदौरिया ने ऑपइंडिया को बताया, “एक बार मैं कानपुर के ही एक गेस्ट हाउस में इसी कपड़े में चला गया। गेस्ट हाउस का मालिक मुस्लिम था। मैंने उससे पानी माँगा तब उसने मुझे डाँटकर भगा दिया था।”

उन्होंने स्थिति कितनी खतरनाक है, इसकी तरफ इशारा करते हुए बताया, “इस इलाके में मेरे थाना क्षेत्र के एक पुलिसकर्मी ने मुझे पहचान लिया और मुझे किसी और क्षेत्र में जाकर रिक्शा चलाने के लिए कहा है।” भदौरिया का कहना है कि वे कम से कम 30 साल से कानपुर में काम कर रहे हैं।

ई रिक्शा चालक भदौरिया

हयात जफर हाशमी पर पहले नहीं हुआ था शक

ऑपइंडिया से बात करते हुए एक स्थानीय निवासी सलीम ने कहा उन लोगों को हयात जफर हाशमी पर पहले शक नहीं हुआ था। उन्होंने कहा, “ये हरकत बाहर से कुछ लोगों ने आकर की है। हिंसा में इस क्षेत्र के लोगों की पहचान नहीं हो पा रही। प्रशासन द्वारा लगाए गए पोस्टरों में उनके चेहरे भी पहचान में नहीं आ रहे।”

सलीम के अनुसार, “मुख्य आरोपित यहाँ से 2 KM दूर चमनगंज के पास के निवासी बताए जा रहे हैं। यहाँ बारावफात का जुलूस भी निकलता है, लेकिन कई सालों से उसमें कभी हिंसा नहीं हुई।”

रोडवेज के पास सड़क से सट कर बनी है मजार

वापसी में रोडवेज बस अड्डे की तरफ जाते हुए ऑपइंडिया की टीम को सड़क से सट कर एक मजार बनी दिखी। उस मजार के पास ही कानपुर पुलिस प्रशासन के EOW (आर्थिक अपराध शाखा) का ऑफिस दिखा। यहाँ से रोडवेज बस अड्डे की दूरी लगभग 1 KM है। इसके अलावा, कई अन्य स्थानों पर भी सड़क के ऊपर मज़हबी स्थलों का अतिक्रमण दिखाई दिया।

सड़क से सटी मजार

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राहुल पाण्डेय
राहुल पाण्डेयhttp://www.opindia.com
धर्म और राष्ट्र को जीवन की प्राथमिकता मानते हुए पत्रकारिता के पथ पर अग्रसर एक प्रशिक्षु। सैनिक व किसान परिवार से संबंधित।

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