Monday, July 4, 2022
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करौली दंगों के FIR में आरोपित-पीड़ित एक जैसे, मुख्य आरोपित मतलूब भी बेखौफ: स्थानीय लोगों का आरोप- केस खा गई कॉन्ग्रेस सरकार

स्थानीय कार्यकर्ता के अनुसार, "दंगों के बाद हर आरोपित मुस्लिम परिवार को जमीयत उलेमा और PFI ने पैसे दिए, लेकिन हिन्दुओं को किसी ने एक पैसे की मदद नहीं की। उल्टे हिन्दुओं को ही जेल भेज दिया गया।"

राजस्थान के करौली (Karauli, Rajasthan) जिले में 2 अप्रैल 2022 (शनिवार) को हिन्दू नववर्ष पर निकली शोभायात्रा पथराव के बाद आगजनी और हिंसा को अंजाम दिया गया था। हिन्दू संगठनों ने मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों पर हमले का आरोप लगाया था। इस मामले में पुलिस ने दोनों पक्ष के लोगों को जेल भेज दिया।

ऑपइंडिया ने इस घटना के वर्तमान हालात की जानकारी करौली जिले के हिंडौन निवासी सामाजिक कार्यकर्ता अशोक पाठक से ली। अशोक पाठक हिन्दू संगठनों और भाजपा से जुड़े हैं। इसके साथ ही वह RTI एक्टिविस्ट भी हैं।

करौली में नहीं निकल पाई रामनवमी की शोभायात्रा

ऑपइंडिया से बात करते हुए अशोक पाठक ने बताया, “करौली हिंसा के लगभग 8 दिन बाद रामनवमी थी। रामनवमी से 2 दिन पहले करौली के DM और SP ने सभी धर्मों के प्रतिनिधियों की एक सभा बुलाई। इस सभा में हिन्दुओं के लिए तमाम नियम और प्रतिबंध लगा दिए गए। हिन्दुओं से संख्या कभी 25 तो कभी 5 बताई गई और उनकी शोभायात्रा के रूट के बारे में भी बदलाव को कहा गया। आख़िरकार करौली में रामनवमी की शोभायात्रा नहीं निकल पाई।”

SP ने हिन्दू संगठनों से कहा, ‘जूते बजाएँगे’

पाठक ने आगे बताया, “मुझे जानकारी दी गई कि सभी धर्मों की उस मीटिंग में करौली SP शैलेन्द्र इंदौलिया बार-बार हिन्दू संगठन से जुड़े लोगों को धमका रहे थे। मीटिंग को कवर कर रहे एक पत्रकार ने मुझे बताया कि SP बार-बार कह रहे थे कि अगर रामनवमी जुलूस में 5 से अधिक लोग शामिल हुए तो जूते से मारूँगा।”

उन्होंने आगे बताया, “इसके विरोध में मैंने एक फेसबुक LIVE किया। करौली प्रशासन के मुताबिक, मेरे कुछ शब्दों से मुस्लिमों की भावनाएँ आहत हो गईं। करौली प्रशासन ने इसके बाद मेरे ऊपर FIR दर्ज कर दी। मैं लगभग 1 माह तक फरार रहकर हाईकोर्ट से स्टे पाया।”

नूपुर के सपोर्टर को जेल, लेकिन बूंदी के मौलवी पर चुप्पी

हिंदू कार्यकर्ता ने कहा, “अगर पूरे राजस्थान को खोजा जाए तो हजारों केस ऐसे मिल जाएँगे, जिसमें नूपुर का ऑनलाइन सपोर्ट करने वालों को पुलिस ने जेल भेज दिया। वहीं, बूंदी जिले के मौलवी ने खुलेआम जहरीला भाषण देते हुए हिन्दू समाज के खिलाफ आपत्तिजनक शब्द बोले तो उस पर कोई एक्शन नहीं हुआ। हालाँकि, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत मौलवी पर कोई एक्शन ले भी नहीं पाएँगे।”

करौली हिंसा का मुख्य आरोपित मतलूब अभी तक फरार

पाठक ने बताया, “करौली हिंसा में मुस्लिम पक्ष से अभी भी कोई मुख्य आरोपित पकड़ा ही नहीं गया। मुख्य आरोपित मतलूब फरार है। जिस अंचू जिम वाले के जिम से पत्थर फेंके गए वो भी अभी तक नहीं पकड़ा गया। मतलूब का पूरा परिवार अब तक पुलिस से बचा हुआ है। इनका एक भाई मुश्ताक सरकारी अस्पताल में नौकरी भी कर रहा, जबकि इन सभी के फुटेज और सबूत भी हैं।”

भाजपा सांसद ने छतों पर देखे जमा किए गए पत्थर

पाठक के मुताबिक, “घटना के 2 दिन बाद भाजपा सांसद और पुलिस अधीक्षक ने एक साथ घटनास्थल का दौरा किया था। भाजपा सांसद मनोज कुमार राजोरिया ने SP से छत पर चलने को कहा। मौके पर बड़े-बड़े पत्थर जमा दिखे। उस समय तक अंचू जिम वाला वहीं मौजूद था, लेकिन उसको नहीं पकड़ा गया। हमलावर और पीड़ित दोनों को अशोक गहलोत सरकार के इशारे पर एक ही FIR में नामजद कर दिया गया। पत्थर फेंकने वाले और सिर फूटने वाले एक जैसे हो गए।”

बहुत सोच समझ कर FIR में डाले गए हैं हिन्दुओं के नाम

अशोक पाठक ने कहा, “बहुत सोची-समझी साजिश के साथ एक ही FIR में हिन्दू और मुस्लिम पक्ष के नाम डाले गए हैं। भविष्य में अगर किसी सरकार में केस वापस लिया गया तो हिन्दू और मुस्लिम दोनों को एक केस में होने के नाते रिहा करना पड़ेगा।”

हर आरोपित मुस्लिम को जमीयत उलेमा और PFI ने दिए पैसे, हिन्दुओं को कुछ नहीं

पाठक ने आगे कहा, “दंगों के बाद हर आरोपित मुस्लिम परिवार को जमीयत उलेमा और PFI ने पैसे दिए, लेकिन हिन्दुओं को किसी ने एक पैसे की मदद नहीं की। उल्टे हिन्दुओं को ही जेल भेज दिया गया। हिन्दू पक्ष की सैकड़ों बाइकों को नुकसान पहुँचा था। एक चार पहिया वाहन भी पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया था। गहलोत सरकार ने केवल उन्हें पैसे दिए, जिनकी दुकानें थीं। हालाँकि इसमें भी मुस्लिम फायदे में रहे, क्योंकि मुस्लिमों की अधिकतर दुकानें हिन्दुओं की बिल्डिंग में थीं।”

अब डर गए हैं हिन्दू बच्चों के माता-पिता

बकौल पाठक, “जिन हिन्दुओं की बाइकों का नुकसान हुआ वो लड़के बेरोजगार थे। उनके घर में एक ही बाइक थी, जिससे उनका पूरा परिवार चलता था। अपने वाहनों को बनवाने के बजाए आज के समय में प्रशासन के डर से 100 से अधिक लड़के फरार होकर मारे-मारे फिर रहे हैं। हिन्दू रैली में शामिल हर व्यक्ति के घर पुलिस गई और उनमें से कई लोगों को शांति भंग की धारा 151 में जेल भेज दिया। लगभग 1 दर्जन मुकदमे में गिरफ्तार किए गए। अब हिन्दुओं में इतना डर फैल गया है कि उनके माता-पिता उन्हें किसी भी हिन्दू आयोजन में भेजने से डरेंगे।”

पुलिस पर हमले की अलग FIR नहीं दर्ज हुई

एक्टविस्ट के मुताबिक, “जब कोई पुलिस पर हमला करता है तो उस पर 307 और सरकारी काम में बाधा डालने का केस दर्ज होता है। करौली में यह केस दर्ज नहीं हुआ। अगर ये केस दर्ज होता तो उसमें हमलावर सिर्फ मुस्लिम होते, जबकि कई पुलिस वाले इस हमले में घायल हुए थे। सरकार इस पूरे मुकदमे को खा गई।”

मतलूब के बराबर का मुल्जिम बना दिया साहिब सिंह गुर्जर को

पाठक ने आगे बताया, “हिन्दू पक्ष में एक वॉलेंटियर लड़के साहिब सिंह गुर्जर ने पूरी रैली के लिए झंडे और बैनर आदि का प्रबंध किया था। राजस्थान पुलिस ने इस हिंसा में साहिब गुर्जर और मतलूब को बराबर का मुजरिम बना दिया। इसी के साथ नीरू शुक्ला और राजाराम गुर्जर को भी आरोपित कर दिया। ये वो लोग थे जो रैली की परमिशन आदि लेने गए थे।

उन्होंने आगे बताया, “घटना के बाद DM राजन सिंह शेखावत पूरे जिले में घूमे थे। वो गलत को गलत कह रहे थे, इसलिए कलेक्टर को हटा दिया गया। लॉ एन्ड ऑर्डर का विषय SP का था, पर न तो SP बदले और न ही DSP ही। यहाँ तक की SHO भी बस 15 दिन पहले रूटीन ट्रांसफर में बदले गए हैं। करौली में अभी भी इबादतगाहों पर माईक ज्यों के त्यों लगे हुए हैं।”

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राहुल पाण्डेय
राहुल पाण्डेयhttp://www.opindia.com
धर्म और राष्ट्र को जीवन की प्राथमिकता मानते हुए पत्रकारिता के पथ पर अग्रसर एक प्रशिक्षु। सैनिक व किसान परिवार से संबंधित।

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